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नई दिल्ली। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, टिकाऊ खेती और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार इस वर्ष 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। अभियान के तहत कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के माध्यम से कुल एक करोड़ प्रतिभागियों तक पहुंचने तथा देशभर में डेढ़ लाख बैठकों के आयोजन का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में बिहार सहित 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के कृषि मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान किसानों तक आधुनिक खेती की जानकारी पहुंचाने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और कृषि वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा हुई। गांव-गांव पहुंचेगी आधुनिक खेती की जानकारी खेत बचाओ अभियान के जरिए किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी, जिनसे खेती की उत्पादकता बढ़ाने के साथ मिट्टी, पानी और अन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। अभियान में टिकाऊ खेती, जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और बदलते मौसम के अनुकूल फसल उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसानों को केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं और सेवाओं के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। श्री चौहान ने राज्यों से कहा कि अभियान केवल बैठकों और आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कार्यक्रमों को गंभीरता से लागू करने और किसानों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। एक करोड़ प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने के लिए कृषि संस्थानों और जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है। बैठक में प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के लिए अलग-अलग 50-50 लाख प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस तरह दोनों संस्थागत माध्यमों से कुल एक करोड़ प्रतिभागियों तक पहुंचने की तैयारी है। अभियान के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और आत्मा की कुल 4,150 टीमें गठित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 12 हजार से अधिक कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के अभियान से जुड़ने की अपेक्षा है। अभियान की अवधि में कुल डेढ़ लाख बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों का लक्ष्य तय किया गया है। कार्यक्रमों के दौरान किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के साथ नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया जाएगा। पराली प्रबंधन से प्राकृतिक खेती तक मिलेगा मार्गदर्शन अभियान में फसल अवशेष प्रबंधन को प्रमुखता दी जाएगी। किसानों को पराली और अन्य फसल अवशेषों के उचित उपयोग तथा कीटों से फसलों की सुरक्षा के प्रभावी तरीकों की जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही मिट्टी की सेहत सुधारने, प्राकृतिक खेती अपनाने, एकीकृत कृषि प्रणाली विकसित करने और कृषि यंत्रों के बेहतर इस्तेमाल के बारे में बताया जाएगा। दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किसानों को पुनर्योजी कृषि पद्धतियों, जलवायु के अनुकूल खेती और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जाएगा। उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल, ग्रीन अमोनिया, जैविक कृषि आदानों, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और अंतरफसली खेती पर भी जोर रहेगा। धान की कटाई के बाद खाली खेतों का होगा बेहतर उपयोग अभियान के दौरान किसानों को धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त फसलों और उनकी किस्मों के चयन की जानकारी देंगे। इसका उद्देश्य उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर इस्तेमाल करना और एक ही खेत में अधिक फसलें उगाने की संभावनाओं को बढ़ाना है। इसके जरिए फसल सघनता बढ़ाने और कृषि संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड पर भी रहेगा जोर इस अभियान के तहत किसानों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें किसान पहचान पत्र यानी फार्मर आईडी बनवाने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के तहत उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। पात्र किसानों तक किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ पहुंचाने, बीज वितरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और कृषि यंत्रों के वितरण से जुड़ी योजनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा किसानों को व्यापार समझौतों से मिलने वाले लाभों और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी सहायता के बारे में जागरूक किया जाएगा। बिहार समेत 11 राज्यों के कृषि मंत्री बैठक में शामिल केंद्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित ऑनलाइन बैठक में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखंड, राजस्थान, असम, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्रा और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी मौजूद रहे। इस दौरान अभियान की तैयारियों, कार्यक्रमों की रूपरेखा, कृषि संस्थानों की भूमिका और किसानों तक पहुंचने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। राज्यों को अपनी सुविधा से कार्यक्रम तय करने की छूट केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों को देखते हुए अभियान के अंतर्गत होने वाले कार्यक्रमों की तारीख तय कर सकते हैं। हालांकि, सभी जरूरी तैयारियां समय पर पूरी होनी चाहिए ताकि अभियान की शुरुआत प्रभावी तरीके से हो सके। उन्होंने जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने और राज्य तथा जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर जोर दिया। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी अभियान के संचालन, निगरानी और समय पर कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित करने की होगी। उन्होंने कहा कि अभियान को केवल औपचारिक आयोजन बनाने के बजाय किसानों के लिए उपयोगी और परिणाम देने वाला कार्यक्रम बनाया जाना चाहिए। कार्यक्रम में नहीं पहुंचने वाले किसानों को भी मिलेगी जानकारी अभियान में अधिक से अधिक किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों को शामिल करने की योजना है। जो किसान किसी कारण से बैठकों या कार्यक्रमों में नहीं पहुंच सकेंगे, उन तक भी अभियान की जानकारी पहुंचाई जाएगी। इसके लिए समाचार पत्रों, टेलीविजन, रेडियो और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। श्री चौहान ने राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं से आपसी तालमेल के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभियान में कृषि वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। किसानों के साथ सीधे संवाद, आधुनिक तकनीकों के प्रदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी के जरिए अभियान को प्रभावी बनाया जा सकेगा।