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दुशान्बे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई का आह्वान करते हुए आज कहा कि आतंकवादियों को धन, समर्थन या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों को किसी भी तरह की छूट नहीं मिलनी चाहिए और इस खतरे से निपटने में दोहरा मापदंड अपनाने के बजाय इसके पूरे नेटवर्क को समाप्त करने के लिए सदस्य देशों को एकजुट होना होगा। आतंकियों के साथ मददगारों पर भी कार्रवाई जरूरी श्री सिंह ने मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शासनाध्यक्षों की परिषद की 25वीं बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद शांति, सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि आतंकी गतिविधियां केवल निर्दोष लोगों की जान नहीं लेतीं बल्कि व्यापार, निवेश और विकास की संभावनाओं को भी नुकसान पहुंचाती हैं। आतंकवाद से कट्टरता को बढ़ावा मिलता है और युवाओं के भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। इसके खिलाफ कार्रवाई में अलग-अलग देशों के लिए अलग नियम नहीं होने चाहिए। उन्होंने आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने, उन्हें संरक्षण प्रदान करने और सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने वाले पूरे तंत्र को खत्म करने पर जोर दिया। संप्रभुता की अनदेखी कर बने गलियारे नहीं होंगे टिकाऊ रक्षा मंत्री ने क्षेत्रीय संपर्क और व्यापारिक गलियारों के विकास पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाओं में संबंधित देशों की सहमति और उनकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी है। सभी देशों के साथ परामर्श किए बिना या उनकी संप्रभुता की अनदेखी करके तैयार की गई संपर्क परियोजनाएं लंबे समय तक सफल नहीं हो सकतीं। भारत ऐसी योजनाओं का समर्थन करता है, जिनसे देशों के बीच व्यापार बढ़े, बाजारों तक पहुंच आसान हो और विकास के नए अवसर पैदा हों। उन्होंने इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और ईरान के चाबहार बंदरगाह का उल्लेख किया और कहा कि ये परियोजनाएं मध्य एशियाई देशों को बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। केवल सड़क और बंदरगाह नहीं, व्यापार की बाधाएं भी हटानी होंगी श्री सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए केवल सड़क, रेल और बंदरगाह जैसी सुविधाएं विकसित करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सीमा शुल्क से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, दस्तावेजों का डिजिटलीकरण करने और माल ढुलाई की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई और कहा कि विभिन्न देशों की डिजिटल प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल से व्यापार की लागत घटाई जा सकती है और सामान की आवाजाही तेज हो सकती है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब वे कारोबारियों के लिए व्यावहारिक और किफायती साबित होंगी। वैश्विक तनाव के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं में रुकावट, ऊर्जा तथा खाद्य सुरक्षा की चिंताएं और नई तकनीकों तक असमान पहुंच जैसी चुनौतियां सामने हैं। इन परिस्थितियों में एससीओ सदस्य देशों को आपसी सहमति के आधार पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करने, व्यापार और निवेश की प्रक्रिया आसान बनाने तथा तकनीक के इस्तेमाल से आर्थिक विकास को गति देने पर जोर दिया। भारत ने वर्ष 2026 से 2030 तक के लिए बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना को समर्थन देने की पुष्टि भी की। नए संस्थान बनाने से ज्यादा जरूरी ठोस नतीजे श्री सिंह ने एससीओ के कामकाज में व्यावहारिक परिणामों को प्राथमिकता देने का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल नए संस्थानों की संख्या बढ़ा देने से संगठन की उपलब्धियां नहीं बढ़ जातीं। नई व्यवस्थाओं का गठन वास्तविक जरूरतों के आधार पर होना चाहिए। एक जैसे काम करने वाली कई संस्थागत व्यवस्थाएं बनाने के बजाय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और सदस्य देशों को सीधे लाभ पहुंचाना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने एससीओ से समान संप्रभुता, आम सहमति और पारस्परिक सम्मान के सिद्धांतों पर कायम रहने का आग्रह किया। ताशकंद और दुशान्बे में बनेंगे स्थायी केंद्र रक्षा मंत्री ने अगस्त-सितंबर 2026 में बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के निर्णयों का स्वागत किया और कहा कि इन निर्णयों के तहत उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में एक सार्वभौमिक केंद्र और ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक केंद्र स्थापित किया जाएगा। दोनों को एससीओ के स्थायी निकायों के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इन केंद्रों की सफलता उनके बीच समन्वय, कार्यकुशलता और तय समय के भीतर काम पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। उन्होंने बिश्केक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सुरक्षा, संपर्क और अवसरों के संबंध में रखे गए दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। युवाओं, किसानों और छोटे कारोबारियों तक पहुंचे विकास श्री सिंह ने कहा कि एससीओ की सफलता का आकलन केवल बैठकों, समझौतों या संस्थानों की संख्या से नहीं होना चाहिए। असली उपलब्धि यह होगी कि संगठन युवाओं के लिए रोजगार और विकास के कितने अवसर पैदा करता है, उद्यमियों को कितने नए बाजार उपलब्ध कराता है तथा किसानों और छोटे कारोबारियों तक कितनी उपयोगी तकनीक पहुंचाता है। उन्होंने सदस्य देशों के समाजों के बीच आपसी संपर्क और सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि आर्थिक सहयोग ऐसा होना चाहिए, जिसका लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और प्रत्येक सदस्य देश को उससे फायदा हो। डिजिटल क्रांति और स्टार्टअप में भारत का अनुभव साझा रक्षा मंत्री ने भारत की डिजिटल प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक और नवाचार के जरिए विकास की रफ्तार बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने सरकारी सेवाओं की उपलब्धता और वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल हो चुका है। उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व में विकास को भी भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताया। उनके अनुसार, महिलाओं की भागीदारी केवल विकास का लाभ पाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें विकास की दिशा तय करने में भी प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए। स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सुरक्षा पर भी चर्चा श्री सिंह ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी भारत की वैश्विक पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से सस्ती स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा उन्होंने ‘मिशन लाइफ’ के माध्यम से पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली और जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा देने का जिक्र किया और कहा कि वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन को भी स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा समाधानों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुंबई की संगोष्ठी और आर्थिक संवाद का किया उल्लेख रक्षा मंत्री ने अक्टूबर की शुरुआत में मुंबई में आयोजित मध्य एशिया की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण संबंधी संगोष्ठी का भी जिक्र किया और इसमें भाग लेने वाले मध्य एशियाई देशों और एससीओ के साझेदारों का आभार जताया। इसके साथ ही पहली बार आयोजित एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। भारत में होगा पहला एससीओ सभ्यता संवाद मंच श्री सिंह ने एससीओ के सदस्य देशों को वर्ष 2026 के अंत में भारत में आयोजित होने वाले पहले एससीओ सभ्यता संवाद मंच में भाग लेने का निमंत्रण दिया और कहा कि संगठन को पिछले 25 वर्षों में तैयार हुई सहयोग की बुनियाद को और मजबूत करना चाहिए। इसके लिए ऐसी भविष्य की कार्ययोजना जरूरी है, जिसमें सदस्य देशों की सहमति के साथ स्पष्ट लक्ष्य और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने इन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए भारत की ओर से सहयोग जारी रखने का भरोसा दिलाया। वर्ष 2027 का बजट और पांच साल की कार्ययोजना मंजूर दुशान्बे में आयोजित बैठक में सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। बैठक में प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने संयुक्त घोषणा स्वीकार की। इसके तहत वर्ष 2027 के लिए एससीओ का बजट, संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक फैसले तथा वर्ष 2026 से 2030 तक की बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। वर्ष 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है भारत गौरतलब है कि शंघाई सहयोग संगठन की शासनाध्यक्ष परिषद सदस्य देशों के बीच आर्थिक और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। भारत वर्ष 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है और संगठन की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करता रहा है।