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मोतिहारी। बिहार के 20वें आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े पूर्वी चंपारण के विकास की असमान तस्वीर पेश करते हैं। आबादी में दूसरे और क्षेत्रफल में तीसरे स्थान पर रहने वाला जिला प्रति व्यक्ति आय के मामले में 38 जिलों में 34वें पायदान पर है। बड़ी आबादी, व्यापक कृषि क्षेत्र और भारत-नेपाल सीमा पर महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति के बावजूद जिले की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से काफी नीचे है। यह स्थिति सवाल उठाती है कि आर्थिक संभावनाओं से भरपूर पूर्वी चंपारण में विकास का लाभ आम लोगों की आमदनी में अपेक्षित वृद्धि क्यों नहीं कर पा रहा है। आबादी 50 लाख से अधिक, लेकिन आय में पिछड़ा जिला वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, पूर्वी चंपारण की आबादी 50 लाख 99 हजार 371 और भौगोलिक क्षेत्रफल 3,968 वर्ग किलोमीटर है। बिहार की कुल आबादी में जिले की हिस्सेदारी लगभग 4.90 प्रतिशत थी। इतनी बड़ी आबादी और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की व्यापक संभावनाओं के बावजूद प्रति व्यक्ति आय का निचले स्तर पर होना बताता है कि विकास की चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि आर्थिक गतिविधियों से पैदा होने वाला मूल्य स्थानीय रोजगार और आम लोगों की आमदनी में कितना योगदान दे रहा है। 38 जिलों में 34वां स्थान, नीचे केवल चार जिले केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में 30 मार्च 2026 को प्रस्तुत जिलावार आंकड़ों के अनुसार, स्थिर मूल्य (2011-12) पर प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद के मामले में पटना 1,31,332 रुपये के साथ पहले स्थान पर रहा जबकि पूर्वी चंपारण 22,300 रुपये के साथ 34वें स्थान पर रहा। राज्य के 38 जिलों की सूची में इस स्थान का अर्थ है कि जिले से नीचे केवल चार जिले हैं। यह अंतर जिले की आर्थिक क्षमता और प्रति व्यक्ति आर्थिक उत्पादन के बीच मौजूद दूरी को रेखांकित करता है। पटना से 1.96 लाख रुपये का अंतर वर्तमान कीमतों पर भी दोनों जिलों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। बिहार के 20वें आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, पटना का प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद 2,41,220 रुपये, जबकि पूर्वी चंपारण का 44,992 रुपये है। इस आधार पर पटना का आंकड़ा पूर्वी चंपारण से लगभग 5.36 गुना है। दोनों जिलों के बीच प्रति व्यक्ति 1,96,228 रुपये का अंतर है। राज्य के औसत से भी 31,498 रुपये पीछे वर्तमान कीमतों पर बिहार की प्रति व्यक्ति औसत आय 76,490 रुपये बताई गई है। इसके मुकाबले पूर्वी चंपारण का आंकड़ा 44,992 रुपये है यानी जिले की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से 31,498 रुपये कम है। यह अंतर स्पष्ट करता है कि पूर्वी चंपारण को आर्थिक रूप से अग्रणी जिलों से दूरी कम करने के साथ राज्य के औसत स्तर तक पहुंचने के लिए भी लंबा सफर तय करना है। बड़ी आबादी के साथ बुनियादी सुविधाओं की व्यापक जरूरत 3,968 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ पश्चिम चंपारण और गया के बाद पूर्वी चंपारण बिहार का तीसरा सबसे बड़ा जिला है। इतनी बड़ी आबादी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, सिंचाई, पेयजल और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी बड़ी चुनौती है। विकास का लाभ व्यापक आबादी तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त और उत्पादक रोजगार के अवसर पैदा करना जरूरी है। पूर्व पत्रकार रामजय प्रताप सिंह का मानना है कि बड़ी आबादी और विशाल क्षेत्रफल अपने आप कम प्रति व्यक्ति आय का कारण नहीं होते। उन्होंने "आईएनआई" को बताया, “आय का स्तर उत्पादन, श्रम उत्पादकता, निवेश, रोजगार की प्रकृति, औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों के वितरण जैसे कई कारकों से प्रभावित होता है इसलिए जिले की आर्थिक स्थिति को इन पहलुओं के समग्र संदर्भ में देखना होगा।” कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन से बढ़ सकती है आय मुंशी सिंह महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. अरुण मिश्रा ने स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और रोजगार सृजन को महत्वपूर्ण बताया। डॉ. मिश्रा ने "आईएनआई" को बताया, “कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले पूर्वी चंपारण में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण और विपणन की बेहतर व्यवस्था के साथ ग्रामीण उद्यमों तथा लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देकर स्थानीय रोजगार और आय बढ़ाने की संभावनाएं हैं। उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में निवेश, कौशल विकास और रोजगारपरक गतिविधियों का विस्तार भी इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।” संसाधनों को समृद्धि में बदलना सबसे बड़ी चुनौती पूर्वी चंपारण की आर्थिक चुनौती केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने की नहीं बल्कि उसके मूल्य में वृद्धि करने, स्थानीय स्तर पर उद्योगों और सेवाओं का विस्तार करने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करने की भी है। कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, बेहतर भंडारण, विपणन व्यवस्था और ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देकर जिले की अर्थव्यवस्था को अधिक उत्पादक बनाया जा सकता है। इसके साथ निवेश और कौशल विकास पर जोर देना जरूरी है ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर न रहना पड़े। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े जिले की संभावनाओं और मौजूदा आर्थिक स्थिति के बीच की खाई को रेखांकित करते हैं। आबादी और क्षेत्रफल में राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल होना अपने आप समृद्धि की गारंटी नहीं है। पूर्वी चंपारण के विकास की असली कसौटी यही होगी कि उपलब्ध संसाधन, कृषि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियां कितनी तेजी से उत्पादक रोजगार और आम लोगों की आय में वृद्धि का आधार बनती हैं।



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