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पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित एक विशेष अदालत ने बिहार कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक मामले में आज आरोपित 30 लोगों के खिलाफ आरोपों का गठन कर दिया। निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने खुली अदालत में आरोपितों को उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों को पढ़कर सुनाया, जिसे सुनने के बाद आरोपितों ने अपने ऊपर लगाये गये आरोपों से इनकार किया। इसके बाद अदालत ने मामले में अभियोजन को गवाही पेश करने का निर्देश दिया है। जिनके खिलाफ आरोप गठन किए गए उसमें आयोग के पूर्व सचिव परमेश्वर राम, आपूर्तिकर्ता आनंद प्रीत सिंह बराड़ और एक अन्य मुख्य अभियुक्त आशीष रंजन शामिल है। मामले की विशेष लोक अभियोजक सुश्री आनंदी सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 में पटना के अगमकुआं थाना की पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की और कई लोगों को गिरफ्तार किया और उनके पास से बिहार कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा आयोजित की जाने वाली संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से संबंधित प्रश्न पत्र एवं अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किए। इसके बाद अगमकुआं थाना में कांड संख्या 44/2017 के रूप में प्राथमिकी दर्ज की गई। बाद में मामले का अनुसंधान विशेष जांच ईकाई को सौपा गया। इस मामले में जांच के बाद पुलिस ने भारतीय दंड विधान और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की अलग-अलग धाराओं में 41 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुधीर कुमार भी शामिल हैं, जो कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष थे। अदालत में सुनवाई के दौरान मामला वर्ष 2017 से एक अभियुक्त की उपस्थिति के लिए लंबित था। पिछली तिथि पर उक्त अभियुक्त का अभिलेख अलग कर दिया गया और आरोप के गठन के लिए आज की तिथि निश्चित की गई थी। आज अदालत में 30 अभियुक्त सशरीर उपस्थित थे। अदालत में अन्य 10 अभियुक्त का अभिलेख अलग करते हुए 30 अभियुक्तों के खिलाफ आरोपों का गठन कर दिया।