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मुंबई। एक 17 साल की लड़की, सामने बेहद प्रभावशाली धर्मगुरु और आरोप ऐसा, जो मामला पुलिस से लेकर अदालत की चौखट तक पहुंचा देता है। इसी टकराव के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आस्था आखिर कहां खत्म होती है और अंधभक्ति कहां से शुरू होती है? इसी सवाल को केंद्र में रखकर बनी छह एपिसोड की सीरीज ‘हुंकार: द रोअर’ रिलीज के बाद चर्चा में है। 25 सितंबर को जियोहॉटस्टार पर रिलीज हुई इस सीरीज को लेकर दुनिया भर में बातचीत हो रही है और इसकी अदालती कहानी ने दर्शकों का ध्यान खींचा है। 17 साल की मीनू ने उठाई आवाज ‘हुंकार: द रोअर’ की कहानी 17 साल की मीनू रावत के इर्द-गिर्द घूमती है। इस किरदार को अनीत पड्डा ने निभाया है कहानी उस वक्त गंभीर मोड़ लेती है, जब मीनू बेहद प्रभावशाली धर्मगुरु बापजी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाती है। बापजी की भूमिका रघुबीर यादव ने निभाई है। आरोप लगने के बाद मामला पुलिस की जांच से आगे बढ़ते हुए अदालत तक पहुंचता है और यहीं से शुरू होती है प्रभाव, विश्वास, दबाव और इंसाफ के बीच की लड़ाई। सिर्फ अपराध नहीं, उसके आसपास की दुनिया भी सवालों के घेरे में सीरीज़ की कहानी केवल आरोप और अदालती कार्यवाही तक सीमित नहीं है। यह उस माहौल को भी सामने लाती है, जहां लोग किसी धार्मिक नेता पर बिना सवाल किए भरोसा करते हैं। इसके साथ ही कहानी प्रभावशाली लोगों की ताकत और उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर पड़ने वाले दबाव को भी दिखाती है। यही वजह है कि आस्था और अंधभक्ति के बीच की लकीर सीरीज के सबसे अहम विषयों में शामिल है। आरोप गंभीर, फिर भी गुरु पर सवाल क्यों नहीं सीरीज में अनुयायियों के व्यवहार को भी कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है। गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद कुछ अनुयायी अपने आध्यात्मिक गुरु पर सवाल उठाने से इनकार करते दिखाई देते हैं। दर्शकों के बीच इस पहलू को लेकर खास तौर पर चर्चा हो रही है। यहीं ‘हुंकार’ एक सवाल दर्शकों के सामने छोड़ती है कि क्या विश्वास इतना मजबूत हो सकता है कि उसके सामने गंभीर आरोप भी सवाल पैदा न कर पाएं? अनीत पड्डा और रघुबीर यादव के अभिनय की चर्चा कहानी के साथ-साथ कलाकारों के अभिनय को लेकर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अनीत पड्डा के अभिनय को “साल का सबसे शानदार अभिनय” कहा गया है जबकि रघुबीर यादव की परफॉर्मेंस को “संयमित अभिनय की बेहतरीन मिसाल” बताया गया है। सीरीज में अनीत पड्डा और रघुबीर यादव के अलावा फातिमा सना शेख, मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब, अर्जुन माथुर और राम कपूर भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। कोर्टरूम ड्रामा पर समीक्षकों की नजर ‘हुंकार’ को “प्रभावशाली और असरदार अदालती नाटक” और “रोमांचक और जरूर देखने लायक सीरीज़” बताया गया है। इसके अलावा सीरीज़ में यौन हिंसा, पीड़िता को ही दोषी ठहराने की प्रवृत्ति और अंधविश्वास जैसे विषयों के चित्रण की भी सराहना किए जाने की बात कही गई है। प्रियंका चोपड़ा जोनस भी सीरीज़ से जुड़ीं ‘हुंकार: द रोअर’ का निर्माण बिरला स्टूडियोज़ और अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट ने पर्पल पेबल पिक्चर्स के साथ मिलकर किया है। छह भागों वाली इस सीरीज़ का निर्माण करन डी. कपाड़िया और नित्या मेहरा ने किया है, जबकि प्रियंका चोपड़ा जोनस इसकी कार्यकारी निर्माता हैं। ‘हुंकार’ का सबसे बड़ा सवाल: आस्था या अंधभक्ति अदालत की लड़ाई, एक प्रभावशाली धर्मगुरु, गंभीर आरोप और उनके बीच खड़ी 17 साल की लड़की—‘हुंकार: द रोअर’ इन्हीं परतों के जरिए विश्वास और प्रभाव की कहानी सामने रखती है। इसकी ऑनलाइन चर्चा के केंद्र में भी वही सवाल है, जो पूरी कहानी के बीच मौजूद है आस्था कहां खत्म होती है और अंधभक्ति कहां से शुरू होती है? ‘हुंकार: द रोअर’ के सभी छह एपिसोड जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध हैं।