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मुंबई। महंगाई के इस वर्ष सिंतबर में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निर्धारित सहनशीलता सीमा के ऊपरी स्तर के आसापास पहुंचने से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद रुपये में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट से हुई लिवाली की बदौलत बीते सप्ताह करीब तीन प्रतिशत की छलांग लगा चुके घरेलू शेयर बाजार की नजर अगले सप्ताह कंपनियों के चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजों के साथ ही अक्टूबर महीने के विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई आंकड़ों पर रहेगी। सेंसेक्स और निफ्टी ने भरी ऊंची उड़ान बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 2256.94 अंक यानी 3.1 प्रतशत की उड़ान भरकर सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिवस शुक्रवार को 74729.27 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 625.7 अंक यानी 2.8 प्रतिशत की छलांग लगाकर 23146.15 अंक पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप में सीमित बढ़त हालांकि बीएसई की दिग्गज कंपनियों के मुकाबले मझौली और छोटी कंपनियों के शेयरों में लिवाली की रफ्तार धीमी रही। समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई का मिडकैप 89.86 अंक अर्थात 0.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16009.02 अंक और स्मॉलकैप 32.59 अंक यानी 0.5 प्रतिशत मजबूत होकर 6915.82 अंक पर पहुंच गया। महंगाई की चिंता के बावजूद शेयर बाजार में सुधार महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने इस सप्ताह अच्छी वापसी की। सप्ताह की शुरुआत में महंगाई के दबाव से निवेशकों में चिंता थी लेकिन रुपये में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट से बाजार का माहौल धीरे-धीरे बेहतर हुआ। खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक की निर्धारित सहनशीलता सीमा के ऊपरी स्तर के आसपास बनी हुई है। वहीं, थोक महंगाई उम्मीद से अधिक रहने के कारण सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका पैदा हुई। रिजर्व बैंक की ओर से बैंकों के लिए दैनिक नकद आरक्षित अनुपात बनाए रखने की अनिवार्यता बढ़ाए जाने से भी शुरुआत में बाजार पर दबाव रहा। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से इस वर्ष सितंबर में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.83 प्रतिशत से बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई जबकि खाद्य महंगाई 5.97 प्रतिशत से उछलकर 7.74 प्रतिशत हो गई। इसी तरह देश में विनिर्मित वस्तुओं, ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण इस वर्ष सितंबर में थोक मूल्य आधारित (डब्ल्यूपीआई) महंगाई दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो अगस्त के 9.92 प्रतिशत से 1.47 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, तेल विपणन कंपनियों के लिए रिजर्व बैंक की विशेष डॉलर सुविधा और विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव के नियम सख्त किए जाने के बाद रुपये में मजबूती आई। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर और प्रतिभूति लेनदेन कर की समीक्षा की उम्मीदों ने भी बाजार को सहारा दिया। इस दौरान निवेशकों ने उन कंपनियों के शेयरों में अधिक दिलचस्पी दिखाई, जिनके वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के कारोबारी आंकड़े मजबूत रहे। हालांकि, तेजी मुख्य रूप से बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित रही। मझोली कंपनियों के शेयरों में मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि छोटी कंपनियों के शेयरों में हल्की गिरावट रही। आईटी शेयरों में तेजी, फार्मा और एफएमसीजी पर दबाव बीते सप्ताह सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों और प्रबंधन की सकारात्मक टिप्पणियों से आईटी शेयरों को फायदा हुआ। वैश्विक बाजारों में प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के बाद निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार की बड़ी कंपनियों की ओर भी बढ़ा। दूसरी ओर, स्वास्थ्य सेवा और दवा कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा। निवेशकों ने उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी, जहां निकट भविष्य में बेहतर मुनाफे की संभावना दिखाई दे रही है। वहीं, कच्चे माल की ऊंची लागत के कारण मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका से रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। अब कंपनियों के नतीजों और आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी नजर आने वाले दिनों में शेयर बाजार की तेजी कितनी टिकाऊ होगी, यह काफी हद तक कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा। अगले सप्ताह बजाज फाइनेंस, इरेडा, नेल्को, अल्ट्रासेम्को, यूनियन बैंक, अडानी ग्रीन, इटरनल, हैवेल्स, अडानी पावर, बैंक ऑफ इंडिया, बीपीसीएल, डॉ. रेड्डी, इंडसइंड बैंक, इंफोसिस, जिंदल स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स जैसी दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होने वाले हैं। बाजार में मजबूती बनाए रखने के लिए आईटी क्षेत्र के अलावा बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, उपभोक्ता वस्तुओं तथा औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों के कारोबार और मुनाफे में भी सुधार जरूरी होगा। निवेशकों की नजर भारत के अक्टूबर महीने के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों से जुड़े खरीद प्रबंधक सूचकांक के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा अमेरिका में बेरोजगारी भत्ते के नए दावों और जापान के महंगाई आंकड़ों से वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें प्रभावित हो सकती हैं। निवेश सलाह देने वाली कंपनी जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि महंगाई का दबाव अभी बना हुआ है और मौद्रिक नीति का रुख सख्ती की ओर झुका हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में शेयर बाजार में चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में ही निवेशकों की अधिक दिलचस्पी रहने की संभावना है। कंपनियों की कमाई और वित्तीय प्रदर्शन बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



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