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मोतिहारी। बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नवरात्रि महोत्सव आध्यात्मिक संदेशों, मां दुर्गा की चैतन्य झांकी और आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच संपन्न हो गया। महोत्सव में महिषासुर वध की नाट्य प्रस्तुति, डांडिया, पारंपरिक झिझिया नृत्य और कथक आधारित भाव नृत्य श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहे। समापन पर 12 ब्रह्माकुमारी बहनों को चुनरी ओढ़ाकर, मुकुट पहनाकर और उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। देवाधिदेव सोमेश्वरनाथ महादेव की नगरी अरेराज के मुख्य मार्ग के किनारे आयोजित इस महोत्सव में तीनों दिनों तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। देवी स्वरूप में सजी ब्रह्माकुमारी बहनों की चैतन्य झांकी ने लोगों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई, वहीं गीत-संगीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा। महोत्सव का उद्घाटन उत्तर बिहार की वरिष्ठ राजयोगिनी बी. के. मीना दीदी, पूर्व विधायक सुनील मणि तिवारी, बी. के. अशोक वर्मा, बी. के. विभा और बी. के. करुणा बहन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का निर्देशन बीके लक्ष्मी बहन ने किया। इसमें बी. के. विभा और बी. के. करुणा बहन ने सहयोग दिया। पांच विकारों पर विजय का प्रतीक है दुर्गा पूजा वरिष्ठ राजयोगिनी बी. के. मीना दीदी ने दुर्गा पूजा के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुर्गा शक्ति का स्वरूप हैं। दुर्गा पूजा मनुष्य के भीतर मौजूद काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी पांच विकारों पर विजय प्राप्त करने का प्रतीक है। यह पर्व असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और आंतरिक विकारों से मुक्त होने की प्रेरणा दी। महिषासुर वध की प्रस्तुति ने बांधा समां महोत्सव में प्रतिदिन आयोजित महिषासुर वध की नाट्य प्रस्तुति दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। महिषासुर की भूमिका में शिव प्रसाद गिरी और शक्ति स्वरूपा दुर्गा के रूप में परिधि के अभिनय की सराहना हुई। दुर्गा और असुर के बीच संवाद तथा युद्ध के दृश्यों को कलाकारों ने जीवंत बना दिया। प्रस्तुति के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया।ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारी कलाकारों ने गीत, सामूहिक नृत्य, लघु नाटिका और डांडिया की प्रस्तुतियों से दर्शकों को बांधे रखा। पारंपरिक झिझिया नृत्य ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचा। पुरुष नर्तक कृष्ण प्रसाद ने कथक आधारित भाव-भंगिमाओं के माध्यम से आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। तीनों दिनों के कार्यक्रम का संचालन बिहार के जाने-माने राजयोगी एवं मधुबन निवासी बीके राजकिशोर भाई ने किया। अपने ओजपूर्ण वक्तव्य और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को कार्यक्रम से जोड़े रखा। दूसरे दिन इंस्पेक्टर प्रणव कुमार, वरिष्ठ पत्रकार भोला जी, राजू मिश्रा सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। संस्था की ओर से अतिथियों को पट्टा, ईश्वरीय सौगात और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। 12 ब्रह्माकुमारी बहनों का सम्मान, विकारों को स्वाहा करने का संकल्प महोत्सव के अंतिम दिन दो सत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह 10 बजे सेवा केंद्र में आयोजित पहले सत्र में 12 ब्रह्माकुमारी बहनों को मंच पर चुनरी ओढ़ाकर, मुकुट पहनाकर और उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके बाद उनकी आरती उतारी गई। नंदू भाई, बीके अशोक वर्मा, बीके छोटू भाई सहित कई वरिष्ठ भाई-बहनों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बनाए गए विशेष हवन कुंड में उपस्थित लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से अपने भीतर के विकारों को स्वाहा करने का संकल्प लिया। सम्मान समारोह के बाद भाई-बहनों ने सामूहिक नृत्य कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। शाम छह बजे शुरू हुआ महोत्सव का दूसरा सत्र रात 12 बजे तक चला। इसमें नगर के समाजसेवी, व्यवसायी और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। पूर्व विधायक सुनील मणि तिवारी ने अतिथियों को सम्मानित किया, जबकि ब्रह्माकुमारी बहनों ने उन्हें ईश्वरीय सौगात भेंट की। समापन संबोधन में पूर्व विधायक सुनील मणि तिवारी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था अपनी आध्यात्मिक सेवाओं, समर्पण और ईश्वरीय कार्यों के लिए विश्वभर में जानी जाती है। संस्था का योगदान आध्यात्मिक क्षेत्र के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी सराहनीय है। उन्होंने बीके मीना दीदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अरेराज क्षेत्र के लोगों को उनकी आध्यात्मिक सेवाओं का लाभ मिलना सौभाग्य की बात है। तीन दिवसीय नवरात्रि महोत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ आत्मिक शुद्धता, सकारात्मक जीवन और आंतरिक बुराइयों पर विजय प्राप्त करने का संदेश दिया।



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