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मोतिहारी। किसी घर में अपनों के साथ सफर की उम्मीद थी तो किसी परिवार के लिए जिंदगी अभी लंबी राह तय करने को बाकी थी लेकिन सड़कों पर दौड़ती रफ्तार और हादसों के बेरहम झटकों ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में बीते 24 घंटे के दौरान तीन सड़क दुर्घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक ही परिवार के देवर और भाभी शामिल हैं। चकिया में हुए भीषण हादसे ने एक परिवार से एक साथ दो सदस्य छीन लिए जबकि पति और उनकी महज तीन वर्षीय बेटी गंभीर हालत में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक सफर, दो मौतें और जिंदगी से जूझते पिता-बेटी सबसे दर्दनाक हादसा चकिया थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुआ। मुजफ्फरपुर जिले के कटिया थाना क्षेत्र के जसौली कटिया गांव निवासी रवींद्र राम अपनी पत्नी पूनम देवी, तीन वर्षीय बेटी अनुष्का और छोटे भाई जयप्रकाश राम के साथ मोटरसाइकिल से पिपरा थाना क्षेत्र के सीताकुंड गांव स्थित अपने ससुराल जा रहे थे। रास्ते में सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से उनकी मोटरसाइकिल टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि चारों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से सभी को चकिया सदर अस्पताल पहुंचाया गया। वहां इलाज के दौरान 35 वर्षीय पूनम देवी और 27 वर्षीय जयप्रकाश राम ने दम तोड़ दिया। रवींद्र राम और उनकी मासूम बेटी अनुष्का की हालत गंभीर बताई जा रही है।जिस सफर में परिवार साथ था, उसी सफर ने दो जिंदगियां छीन लीं। तीन साल की अनुष्का के सिर से मां का साया उठ गया, जबकि पिता भी गंभीर रूप से घायल हैं। एक ही दुर्घटना में पत्नी और भाई को खोने का यह दर्द उस परिवार के लिए ऐसा घाव है, जिसे शब्दों में समेटना आसान नहीं। अज्ञात बाइक की ठोकर से 75 वर्षीय महिला की मौत दूसरी दुर्घटना शनिवार की देर शाम पताही थाना क्षेत्र के बोकाने पट्टी गांव में हुई। यहां अज्ञात मोटरसाइकिल की ठोकर से 75 वर्षीय कांति देवी की मौत हो गई। दुर्घटना की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। 19 वर्षीय मुस्कान की भी नहीं बच सकी जान तीसरा हादसा चोरमा-बैरगनिया भारतमाला सड़क पर शनिवार की देर शाम हुआ। पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के धनौजी गांव निवासी चिमनी व्यवसायी ओमप्रकाश सिंह की 19 वर्षीय पुत्री मुस्कान कुमारी तेज रफ्तार मोटरसाइकिल की ठोकर से गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। जिस उम्र में सपनों को आकार मिलना शुरू होता है, उस उम्र में मुस्कान की जिंदगी का सफर खत्म हो गया। हर हादसे के बाद वही सवाल, आखिर कब थमेगी मौत की रफ्तार पूर्वी चंपारण जिले में 24 घंटे के भीतर चार मौतें महज दुर्घटनाओं के आंकड़े नहीं हैं। इनके पीछे चार जिंदगियों का अंत, कई परिवारों का असहनीय दुख और अपनों को खोने की पीड़ा है। सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकराने की घटना हो या तेज रफ्तार मोटरसाइकिल की ठोकर, हर हादसा सड़क सुरक्षा को लेकर जवाबदेही की जरूरत रेखांकित करता है। सवाल यह भी है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़े वाहनों से होने वाले खतरे और सड़कों पर अनियंत्रित रफ्तार पर प्रभावी रोक कब लगेगी? हादसे के बाद जांच और कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन असली चुनौती उन दुर्घटनाओं को रोकना है, जिनके बाद किसी घर में लौटने वाला अपना हमेशा के लिए खामोश हो जाता है।