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मोतिहारी। पूजा के लिए निकली नवविवाहिता के साथ दरिंदगी, सुगौली में सामूहिक दुष्कर्म और मोतिहारी में किशोरी के साथ जघन्य अपराध...बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में पिछले सात माह में सामूहिक दुष्कर्म की तीन घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बेचैन करने वाले सवाल खड़े कर दिए हैं। महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में सबसे घृणित और अमानवीय अपराधों में शामिल सामूहिक दुष्कर्म की बार-बार हुई घटनाएं बता रही हैं कि चुनौती केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं को भयमुक्त माहौल देने की भी है। वैज्ञानिक जांच और त्वरित न्याय मधुबन कांड में पुलिस ने अब त्वरित न्याय की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सात दिनों के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करने की तैयारी शुरू की है। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बुधवार को घटनास्थल का निरीक्षण कर वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी करने का निर्देश दिया। मामले में आठ आरोपित गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों को पुख्ता करने और त्वरित सुनवाई के लिए जांच प्रक्रिया जल्द पूरी करने में जुटी है। पुलिस तथा राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को जांच अभिलेख में शामिल किया जा रहा है। प्रयोगशाला भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट शीघ्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की कोशिश है कि साक्ष्यों का संकलन और आवश्यक जांच पूरी कर निर्धारित समय के भीतर आरोपपत्र दाखिल किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सके। आस्था के सफर में दरिंदगी पुलिस के अनुसार, रविवार को पड़ोसी शिवहर जिले के श्यामपुर भटहां थाना क्षेत्र का नवविवाहित दंपती मां दुर्गा की पूजा के लिए मधुबन आ रहा था। इसी दौरान बंजरिया गांव के समीप कुछ युवकों ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया। आरोप है कि दंपती के साथ मारपीट कर रुपये छीन लिए गए और नवविवाहिता को पास के एक बगीचे में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के बयान पर मधुबन थाने में कांड संख्या 363/26 दर्ज की गई। शिवहर पुलिस के सहयोग से आठ आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पीड़िता का मोतिहारी सदर अस्पताल में उपचार और चिकित्सकीय परीक्षण कराया जा रहा है। जांच के लिए नमूने और कपड़े विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए हैं। सुगौली से मधुबन तक, अपराध की पुनरावृत्ति ने बढ़ाई चिंता पूर्वी चंपारण में 24 मई 2026 की रात सुगौली थाना क्षेत्र में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब आठ घंटे के भीतर सभी पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। उस मामले में भी त्वरित न्याय की प्रक्रिया अपनाने की घोषणा की गई थी। इससे पहले 14 मार्च को मोतिहारी के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में दिल्ली के जनकपुरी-डाबरी इलाके से आए किशोरवय प्रेमी युगल को कमरा दिलाने के बहाने बंधक बनाने और किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था। पुलिस ने 15 मार्च को जमला गांव में एक सुनसान स्थान पर बने मकान से दोनों को मुक्त कराया था। सुरक्षा के दावों और हकीकत का फासला इन तीनों घटनाओं का सिलसिला महिला सुरक्षा के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर पर सवाल उठाता है। गिरफ्तारी, वैज्ञानिक जांच और त्वरित सुनवाई की घोषणा न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं लेकिन पीड़िताओं को न्याय दिलाने के साथ ऐसी वारदातों की पुनरावृत्ति रोकना भी उतना ही जरूरी है। मधुबन कांड में सात दिनों के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करने की तैयारी अब पुलिस की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता की कसौटी है। अंततः न्याय की सार्थकता केवल त्वरित कार्रवाई में नहीं बल्कि दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा और महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में है।



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