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मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में पिछले सप्ताह रही तेजी के बाद अब निवेशकों की नजर कंपनियों के चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजों और महंगाई के आंकड़ों पर टिक गई है जबकि पश्चिम एशिया के हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स 562.63 अंक और निफ्टी 98.50 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि बड़ी कंपनियों के मुकाबले मझौली और छोटी कंपनियों के शेयरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और विप्रो समेत कई दिग्गजों के आएंगे नतीजे आने वाला सप्ताह शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दौरान आईटी और बैंकिंग क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां अपने दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी। इनमें एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, विप्रो, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों से उनके कारोबार, मुनाफे और वित्तीय प्रदर्शन की स्थिति स्पष्ट होगी, जिसका असर संबंधित शेयरों के साथ बाजार की निवेश धारणा पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा सितंबर 2026 के खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े भी इसी सप्ताह जारी होने हैं। निवेशकों की नजर इन आंकड़ों पर रहेगी क्योंकि महंगाई की स्थिति बाजार के रुख को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। तीन दिन चढ़ा बाजार, दो दिन रही गिरावट बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद प्रमुख सूचकांक बढ़त हासिल करने में सफल रहे। सोमवार, मंगलवार और शुक्रवार को बाजार में तेजी दर्ज की गई, जबकि बुधवार और गुरुवार को बिकवाली के दबाव में गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 562.63 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ 72,472.33 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक 98.50 अंक यानी 0.44 प्रतिशत मजबूत होकर 22,520.45 अंक पर पहुंच गया। हालांकि, मझौली कंपनियों के निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक में 0.32 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि छोटी कंपनियों का स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.50 प्रतिशत चढ़ा। ट्रेंट ने मारी बाजी, एक सप्ताह में 12.42% उछला शेयर सेंसेक्स की 30 कंपनियों में पिछले सप्ताह मुकाबला बराबरी का रहा। इनमें 15 कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई जबकि शेष 15 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे शानदार प्रदर्शन टाटा समूह की ट्रेंट का रहा। बेहतर तिमाही वित्तीय नतीजों के दम पर कंपनी का शेयर एक सप्ताह में 12.42 प्रतिशत उछल गया। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर में 4.84 प्रतिशत, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में 4.03 प्रतिशत और भारती एयरटेल में 3.77 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 3.72 प्रतिशत, एक्सिस बैंक का 3.71 प्रतिशत, आईटीसी का 3.58 प्रतिशत और इटरनल का शेयर 3.14 प्रतिशत मजबूत हुआ। रिलायंस, एसबीआई और बजाज फाइनेंस भी बढ़त में सप्ताह के दौरान कई अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी का रुख रहा। अडानी पोर्ट्स के शेयर में 1.27 प्रतिशत, हिंदुस्तान यूनिलीवर में 1.09 प्रतिशत और बजाज फाइनेंस में 0.93 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और बजाज फिनसर्व के शेयर 0.43-0.43 प्रतिशत मजबूत हुए। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 0.41 प्रतिशत और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का शेयर 0.37 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। बीईएल को सबसे बड़ा झटका, टाटा स्टील और टाइटन भी फिसले बाजार में तेजी के बावजूद कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों को नुकसान उठाना पड़ा। सेंसेक्स की कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। कंपनी के शेयर में सप्ताह के दौरान 3.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। टाटा स्टील का शेयर 3.07 प्रतिशत, सन फार्मा का 2.93 प्रतिशत और टाइटन का 2.84 प्रतिशत टूट गया। इसी तरह एशियन पेंट्स में 2.55 प्रतिशत, एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 2.34 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.07 प्रतिशत और पावरग्रिड में 2.02 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस और टेक महिंद्रा भी दबाव में पिछले सप्ताह कई अन्य बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट रही। एनटीपीसी का शेयर 1.77 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक का 1.70 प्रतिशत और इंडिगो का 1.45 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। इसके अलावा टेक महिंद्रा के शेयर में 1.43 प्रतिशत, अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.10 प्रतिशत और इंफोसिस में 1.06 प्रतिशत की गिरावट रही। मारुति सुजुकी का शेयर भी मामूली 0.04 प्रतिशत कमजोर हुआ। पश्चिम एशिया और कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी नजर घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों के अलावा वैश्विक परिस्थितियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव निवेशकों की धारणा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में घरेलू और वैश्विक संकेतों का मिला-जुला प्रभाव बाजार में देखने को मिल सकता है।