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नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शिशुओं को अतिरिक्त चीनी से बचाने और बेहतर पोषण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छह महीने तक के बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर प्रतिबंध लगाने संबंधी नियमों में संशोधन का मसौदा जारी कर 60 दिनों के भीतर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। छह महीने तक के बच्चों के लिए बदलेंगे नियम स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। यह मसौदा 16 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। प्रस्ताव के मुताबिक, जन्म से छह महीने तक के शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज नहीं मिलाए जा सकेंगे। हालांकि, यह प्रतिबंध अभी लागू नहीं हुआ है। फिलहाल इसे प्रस्तावित नियम के रूप में सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया है। अभी क्या हैं चीनी मिलाने के नियम मौजूदा नियम जन्म से 24 महीने तक के बच्चों के लिए तैयार होने वाले विभिन्न पोषण उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और पोषक तत्वों की मात्रा तय करते हैं। इन नियमों में कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान व्यवस्था में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने की सीमित अनुमति है। इन्हें निर्धारित मात्रा में तभी इस्तेमाल किया जा सकता है, जब कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में इनकी जरूरत हो लेकिन नए प्रस्ताव में छह महीने तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों के लिए इस छूट को समाप्त करने की तैयारी है। अतिरिक्त चीनी पर रोक क्यों जरूरी जन्म के बाद शुरुआती छह महीने बच्चे की शारीरिक वृद्धि और विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान मिलने वाला पोषण उसके स्वास्थ्य के लिए खास अहमियत रखता है। एफएसएसएआई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस आयु वर्ग के लिए बनाए गए खाद्य उत्पाद बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करें लेकिन उनमें अनावश्यक सुक्रोज या फ्रक्टोज न मिलाया जाए। यह कदम बचपन में मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के आहार संबंधी जोखिमों को कम करने के व्यापक प्रयासों का भी हिस्सा है। स्तनपान को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप फैसला प्रस्तावित बदलाव शुरुआती छह महीने तक केवल स्तनपान कराने की स्थापित जनस्वास्थ्य सिफारिशों के अनुरूप है। एफएसएसएआई का जोर इस बात पर है कि शिशु पोषण उत्पाद बनाने वाली कंपनियां बच्चों की उम्र और विशेष पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अपने उत्पाद तैयार करें। इसके साथ ही खाद्य उत्पादों के निर्माण में वैज्ञानिक मानकों और जिम्मेदार उत्पादन पद्धतियों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया है। कंपनियों और अन्य पक्षों को सुझाव देने का मौका नए नियमों को अंतिम रूप देने से पहले एफएसएसएआई ने सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत संबंधित पक्ष राजपत्र की अधिसूचना की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 60 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव भेज सकते हैं। निर्धारित समय में मिलने वाले सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही प्राधिकरण संशोधन को अंतिम रूप देगा।