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सीवान। बिहार के सीवान जिले में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना के तहत दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों की सूची की पुष्टि कर दी गई है, जहां पुलिस की ओर से दुर्घटना संबंधी आईडी जारी होने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र मरीजों को बिना आयुष्मान कार्ड के भी योजना का लाभ मिल सकेगा। सात दिनों तक इलाज, डेढ़ लाख रुपये की सीमा प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (पीएम राहत) योजना के तहत पात्र घायलों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक निर्धारित चिकित्सा पैकेज के अनुसार कैशलेस इलाज मिलेगा। इस दौरान उपचार पर अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का खर्च योजना के अंतर्गत वहन किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को शुरुआती महत्वपूर्ण समय में पैसों की चिंता से राहत दिलाना और समय पर इलाज उपलब्ध कराना है। हालांकि, यह सुविधा योजना की पात्रता शर्तों और निर्धारित उपचार पैकेज के अनुसार ही मिलेगी। पुलिस की आईडी से शुरू होगी कैशलेस इलाज की प्रक्रिया सीवान में आयुष्मान भारत योजना के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) राजकिशोर प्रसाद ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को योजना का लाभ दिलाने में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। दुर्घटना की सूचना मिलने पर पुलिस संबंधित मामले की आईडी तैयार कर अस्पताल को उपलब्ध कराएगी। इसके आधार पर अस्पताल में मरीज का पंजीकरण होगा और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कैशलेस उपचार की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ लेने के लिए दुर्घटना की जानकारी पुलिस तक पहुंचाना और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करना आवश्यक है। सीवान के इन सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलेगा इलाज जिले में पीएम राहत योजना के तहत उपचार के लिए कई सरकारी और निजी अस्पतालों की पुष्टि की गई है। निजी अस्पतालों में श्री साईं एवं ट्रामा सेंटर, आस्था हॉस्पिटल, किस्मत ईएनटी केयर सेंटर, सदा चिल्ड्रन हॉस्पिटल, रंजन चिकित्सालय, शिव आई हॉस्पिटल, शिव सेवा क्लीनिक, यहान हॉस्पिटल और ममता मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। सरकारी अस्पतालों में सदर अस्पताल सीवान और महाराजगंज अनुमंडलीय अस्पताल में भी यह सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना से सूचीबद्ध सरकारी रेफरल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र दुर्घटना पीड़ितों का इलाज किया जाएगा। सड़क हादसा हो तो 112 पर दें सूचना सड़क दुर्घटना होने पर तत्काल 112 नंबर पर सूचना देकर पुलिस और एंबुलेंस की सहायता मांगी जा सकती है। घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द निर्धारित अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। अस्पताल में मरीज की जानकारी दर्ज करने के बाद योजना के डिजिटल सिस्टम के माध्यम से इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही पुलिस दुर्घटना से संबंधित विवरण का सत्यापन करेगी। योजना के तहत गैर-जीवन-घातक मामलों में पुलिस की प्रतिक्रिया के लिए 24 घंटे और जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक की निर्धारित व्यवस्था है। हालांकि, पुलिस सत्यापन या अन्य औपचारिकताओं के कारण किसी घायल के आपातकालीन उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए। आयुष्मान कार्ड नहीं है, तब भी मिल सकता है लाभ पीएम राहत योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका लाभ लेने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का कार्ड होना अनिवार्य नहीं है। बिना आयुष्मान कार्ड वाले सड़क दुर्घटना पीड़ित भी योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हों। इसके लिए इलाज सूचीबद्ध अस्पताल में होना चाहिए और चिकित्सा सुविधा योजना के स्वीकृत पैकेज के अंतर्गत आनी चाहिए। योजना में गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे और जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक मरीज की स्थिति स्थिर करने के लिए आवश्यक उपचार का भी प्रावधान है। यह सुविधा निर्धारित शर्तों के अधीन मिलेगी। अस्पताल इलाज से इनकार करे तो यहां करें शिकायत यदि कोई निर्धारित अस्पताल पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को योजना के तहत कैशलेस इलाज देने से इनकार करता है तो मरीज के परिजन संबंधित जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण या योजना के शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। शिकायत के लिए अस्पताल का नाम, मरीज के भर्ती होने का समय और इलाज से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज सुरक्षित रखना उपयोगी होगा। इससे शिकायत की जांच और संबंधित मामले में आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया में मदद मिल सकती है। हादसे के बाद समय पर इलाज दिलाना सबसे जरूरी सड़क दुर्घटनाओं में कई बार घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने और इलाज शुरू कराने में देरी हो जाती है। ऐसे में पीएम राहत योजना के जरिए पात्र मरीजों को शुरुआती दिनों में आर्थिक सहायता के साथ उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। योजना के तहत पुलिस, अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा, ताकि घायल व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय पर इलाज मिल सके।