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मोतिहारी। बिहार में पूर्वी चंपारण जिले की विशेष अदालत ने आपत्तिजनक स्थिति में देखने से उत्पन्न विवाद में एक युवक की चाकू से गोदकर हत्या करने के मामले में आज दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अनुसूचित जाति-जनजाति मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश कमलेश चंद्र मिश्र ने दोषी आलोक पासवान पर 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषी को दो वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। शादी समारोह से लौटते समय हमला मामला कोटवा थाना क्षेत्र के जसौली पट्टी गांव का है। अभियोजन के अनुसार, 5 जून 2023 की रात जसौली वार्ड संख्या-4 निवासी साधु पासवान अपने छोटे बेटे रूपम पासवान के साथ पड़ोसी गांव गोसाईबारी में शादी समारोह में गए थे। वहां आलोक पासवान और अन्य लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इसकी सूचना मिलने पर साधु पासवान का बड़ा बेटा अनीश पासवान घर से निकला। वह नहर बांध के पास पहुंचा, जहां आरोपितों ने उसके भाई रूपम पासवान पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में रूपम की मौत हो गई जबकि उसके पिता साधु पासवान घायल हो गए। सात गवाहों के बयान के बाद दोषसिद्धि घटना के संबंध में अनीश पासवान ने कोटवा थाने में कांड संख्या 219/2023 दर्ज कराया था। प्राथमिकी में आलोक पासवान समेत पांच लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस ने आलोक पासवान को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अनुसंधान पूरा करने के बाद उसके खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। सत्र वाद संख्या 05/2024 की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक रवि प्रकाश ने अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आलोक पासवान को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 324 के तहत दोषी ठहराया। धारा 302 के तहत उसे आजीवन कारावास और धारा 324 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके अतिरिक्त, अदालत ने 55 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। माता-पिता को प्रतिकर देने का निर्देश अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, हत्या की वजह यह थी कि मृतक रूपम पासवान ने अभियुक्त को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। अदालत ने रूपम की मृत्यु के बाद उसके माता-पिता को पीड़ित के आश्रित के रूप में प्रतिकर पाने का हकदार माना है। प्रतिकर की राशि संबंधित विधिक प्रावधानों और जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा निर्धारित की जाएगी। प्रतिकर दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकार को भेजने का निर्देश दिया गया है।



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