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नई दिल्ली। इस वर्ष जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर और राजधानी के बाहर अलग-अलग स्थानों पर हुई हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) ने शिकायतें और साक्ष्य जुटाने के लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। गृह मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर बताया कि समिति हिंसा के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न, लक्षित हमलों, अत्यधिक बल प्रयोग और संपत्ति को हुए नुकसान से जुड़े आरोपों की जांच करेगी। प्रभावित आम नागरिकों के साथ पुलिसकर्मी भी अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा और पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था भी की गई है। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर जांच जुलाई में हुई हिंसक घटनाओं के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति का गठन किया था। समिति को 18 अगस्त 2026 के न्यायालयी आदेश में निर्धारित विषयों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। इन आदेशों के तहत समिति घटनाओं से जुड़े आरोपों, परिस्थितियों और संबंधित पक्षों की भूमिका की पड़ताल करेगी। इन आरोपों की होगी प्राथमिक जांच समिति की जांच में पैलेट गन के इस्तेमाल और लक्षित हिंसा के आरोपों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित उत्पीड़न की घटनाओं की भी जांच होगी। हिंसा के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को पहुंचाए गए नुकसान से जुड़े मामलों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। समिति इन घटनाओं से संबंधित शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्यों की पड़ताल करेगी। पीड़ितों के साथ पुलिसकर्मी भी दे सकेंगे शिकायत जांच प्रक्रिया में प्रभावित लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समिति ने [एचपीईसी शिकायत पोर्टल]( http://hpec.nic.in?utm_source=chatgpt.com ) शुरू किया है। इस सुविधा का इस्तेमाल हिंसा से प्रभावित आम नागरिकों के साथ पुलिसकर्मी भी कर सकेंगे। संबंधित व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में अपनी शिकायत, आवेदन और आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। इसके अलावा घटनाओं से जुड़ी जानकारी या सुझाव रखने वाले अन्य लोग भी पोर्टल के माध्यम से समिति तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे। गवाहों की पहचान रहेगी गोपनीय समिति ने संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पोर्टल में विशेष प्रावधान किए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, शिकायतकर्ता या प्रभावित व्यक्ति की इच्छा होने पर उसकी पहचान गोपनीय रखी जा सकेगी। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को अपनी बात रखने का अवसर देना है, जो पहचान सार्वजनिक होने को लेकर चिंतित हो सकते हैं। कार्यालय में भी जमा होंगे दस्तावेज ऑनलाइन शिकायत दर्ज नहीं करा पाने वाले लोगों के लिए सीधे कार्यालय पहुंचकर आवेदन देने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इच्छुक व्यक्ति सभी कार्य दिवसों में दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे के बीच समिति के कार्यालय में अपनी शिकायत, अभ्यावेदन या अन्य संबंधित दस्तावेज जमा कर सकते हैं। इसके लिए नई दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित शिक्षा सदन में व्यवस्था की गई है। समिति ने शिकायतों और साक्ष्यों को स्वीकार करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल के अलावा डाक और ईमेल का विकल्प भी उपलब्ध कराया है।