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पटना। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने बिहार विधान परिषद चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जनसुराज प्रत्याशी का खुलकर समर्थन करने और संगठन विरोधी गतिविधियों के आरोप में मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह और पूर्व विधायक नीलम देवी को आज छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया तथा श्री सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है। पार्टी से बाहर, अब विधायकी पर भी सवाल जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से शनिवार को जारी कार्यालय आदेश में दोनों नेताओं की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। पार्टी ने श्री अनंत सिंह पर अनुशासन तोड़ने, शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने और विधान परिषद चुनाव में जदयू प्रत्याशी के विरोध में काम करने का आरोप लगाया है। मामला केवल पार्टी से निष्कासन तक सीमित नहीं है। जदयू ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत श्री सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। हालांकि, श्री सिंह की विधायकी अभी स्वतः समाप्त नहीं हुई है। इस पर अंतिम निर्णय निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विधानसभा अध्यक्ष को करना होगा। नीरज कुमार से पुरानी अदावत बनी टकराव की वजह गौरतलब है कि इस पूरे विवाद के केंद्र में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार और मोकामा विधायक अनंत सिंह के बीच पुरानी राजनीतिक नाराजगी रही। जदयू ने अपने विधान परिषद सदस्य और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को दोबारा उम्मीदवार बनाया था। वहीं, जनसुराज पार्टी ने डॉ. अनुज सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। श्री सिंह का आरोप रहा है कि मोकामा विधानसभा चुनाव के दौरान श्री नीरज कुमार ने उनके खिलाफ प्रचार किया था जबकि उस समय वह जदयू में थे और श्री नीतीश कुमार की सरकार का समर्थन कर रहे थे। श्री सिंह ने कहा कि उन्होंने इसकी शिकायत पार्टी नेतृत्व से भी की थी लेकिन श्री नीरज कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक अक्टूबर को खुलकर आए विरोध में श्री नीरज कुमार को दोबारा टिकट मिलने के बाद श्री सिंह की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। एक अक्टूबर को वह जनसुराज प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के नामांकन में पहुंचे और उनके समर्थन में प्रचार करने की घोषणा कर दी। इसके बाद श्री सिंह ने अलग-अलग इलाकों में जनसंपर्क और रोड शो किए। इस दौरान उन्होंने जदयू प्रत्याशी श्री कुमार की आलोचना करते हुए मतदाताओं से उन्हें हराने की अपील भी की। पार्टी नेतृत्व ने इस कदम को दो नेताओं की व्यक्तिगत नाराजगी के बजाय आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ खुली राजनीतिक गतिविधि के रूप में लिया। ललन सिंह ने मनाया, फिर भी नहीं बदला रुख विवाद बढ़ने पर जदयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने मामला शांत कराने की कोशिश की। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बातचीत के बाद श्री ललन सिंह ने श्री अनंत सिंह से संपर्क किया और उन्हें पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ बयानबाजी तथा प्रचार बंद करने की सलाह दी। पांच अक्टूबर को श्री ललन सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि श्री अनंत सिंह से उनकी बातचीत हो गई है और अब वह श्री नीरज कुमार के खिलाफ बयान नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि अनंत सिंह जदयू में थे, हैं और रहेंगे। लेकिन, यह कोशिश विवाद खत्म नहीं कर सकी। श्री अनंत सिंह ने श्री नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार करने से इनकार कर दिया और बाद में जनसुराज प्रत्याशी के समर्थन में दोबारा चुनाव प्रचार किया। मतदान के दिन टिप्पणी से बढ़ा विवाद विधान परिषद चुनाव के मतदान वाले दिन 23 अक्टूबर को श्री अनंत सिंह की एक और टिप्पणी चर्चा में आ गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, श्री ललन सिंह के बारे में पूछे जाने पर श्री अनंत सिंह ने कहा, “बिहार में 100 ललन सिंह हैं, मैं नहीं जानता।” इस बयान को पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बढ़ते टकराव के संदर्भ में देखा गया। जदयू के कार्यालय आदेश में भी श्री अनंत सिंह पर शीर्ष नेतृत्व के प्रति अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। नीलम देवी पर भी गिरी अनुशासन की गाज जदयू ने श्री अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह वर्षों के लिए निष्कासित किया है। पार्टी ने नीलम देवी पर भी दलविरोधी गतिविधियों में शामिल रहने और संगठन के निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।