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नई दिल्ली। देश में विनिर्मित वस्तुओं, ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण इस वर्ष सितंबर में थोक मूल्य आधारित (डब्ल्यूपीआई) महंगाई दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो अगस्त के 9.92 प्रतिशत से 1.47 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 को आधार मानकर तैयार की गई नई सीरीज में थोक महंगाई पहली बार दहाई अंक में पहुंची है। सितंबर 2025 में थोक महंगाई दर शून्य से 0.2 प्रतिशत नीचे थी। इस तरह एक साल के भीतर थोक कीमतों में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। खाद्य पदार्थों की महंगाई 8.66 फीसदी पर सितंबर में खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर 8.66 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, प्राथमिक वस्तुओं के वर्ग में कुल महंगाई दर 8.67 प्रतिशत रही। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, प्राथमिक वस्तुओं में खाने-पीने की चीजों की कीमतें एक साल पहले की तुलना में 8.14 प्रतिशत बढ़ीं। गैर-खाद्य उत्पादों की महंगाई दर 10.28 प्रतिशत और खनिजों की 9.51 प्रतिशत दर्ज की गई। ईंधन-बिजली की महंगाई 25.85 फीसदी पर थोक महंगाई में तेज बढ़ोतरी के पीछे ईंधन और बिजली वर्ग की कीमतों में आया उछाल प्रमुख कारण रहा। सितंबर में इस वर्ग की महंगाई दर 25.85 प्रतिशत दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में हुई। एक साल पहले की तुलना में इनकी महंगाई दर 57.32 प्रतिशत रही। वहीं, खनिज तेलों की कीमतों में 40 प्रतिशत और कोयला तथा लिग्नाइट की कीमतों में 9.31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान बिजली की कीमतों में 0.43 प्रतिशत की गिरावट रही। इसके बावजूद ईंधन और बिजली वर्ग की कुल महंगाई दर काफी ऊंचे स्तर पर बनी रही। धातु, केमिकल और कपड़ों की कीमतों में भी उछाल सितंबर में विनिर्मित उत्पादों की थोक महंगाई दर 9.76 प्रतिशत दर्ज की गई। इस वर्ग में कई प्रमुख उत्पादों की कीमतें एक साल पहले की तुलना में तेजी से बढ़ीं। आंकड़ों के अनुसार, सामान्य धातु उत्पादों की कीमतों में 16.96 प्रतिशत और रसायन एवं रासायनिक उत्पादों में 16.74 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, कपड़ों की कीमतें 13.85 प्रतिशत और रबर एवं प्लास्टिक उत्पाद 13.47 प्रतिशत महंगे हुए। इनके अलावा तंबाकू उत्पादों की कीमतों में 12.90 प्रतिशत और बिजली के उपकरणों में 11.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तरह विनिर्माण क्षेत्र के कई प्रमुख उत्पादों में दोहरे अंक की महंगाई रही। छह महीने में औसत थोक महंगाई 9.85 फीसदी चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान औसत थोक महंगाई दर 9.85 प्रतिशत रही। इस अवधि में ईंधन और बिजली वर्ग की औसत महंगाई सबसे अधिक 25.31 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, प्राथमिक वस्तुओं की औसत महंगाई दर 6.89 प्रतिशत और विनिर्मित उत्पादों की 8.08 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों में ईंधन और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी थोक महंगाई का प्रमुख कारण रही है। एक महीने में 1.47 प्रतिशत अंक बढ़ी महंगाई थोक महंगाई के आंकड़ों में अगस्त से सितंबर के बीच तेज उछाल देखने को मिला है। अगस्त 2026 में थोक महंगाई दर 9.92 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई। इस तरह महज एक महीने में महंगाई दर 1.47 प्रतिशत अंक बढ़ गई। वहीं, सितंबर 2025 में थोक महंगाई दर शून्य से 0.2 प्रतिशत नीचे थी। इसकी तुलना में सितंबर 2026 में महंगाई दर 11.59 प्रतिशत अंक ऊपर पहुंच गई है। सितंबर के आंकड़ों में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, खनिज तेल, धातु उत्पादों, रसायनों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी प्रमुख रूप से सामने आई है। खास बात यह है कि नई आधार वर्ष सीरीज में पहली बार थोक महंगाई दर 10 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई है।