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सीवान। दूर-दराज से उड़ान भरकर आने वाले प्रवासी परिंदों का ठिकाना, पानी के आसपास पनपती जिंदगी और प्रकृति की अनमोल विविधता को अपनी गोद में समेटे बिहार में सीवान जिले का सुरैला चौर अब संरक्षण की नई उम्मीदों से जुड़ गया है क्योंकि बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने इस प्राकृतिक जलक्षेत्र की प्रारूप अधिसूचना प्रकाशित कर दी है, जिससे यहां के पक्षियों, वन्यजीवों और समूची जैव विविधता को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण रास्ता खुला है। तीन गांवों के बीच प्रकृति का अनमोल खजाना सीवान जिले के पचरुखी अंचल में नारायणपुर, मल्लूपुर और पंगवारा गांवों के बीच फैला सुरैला चौर महज पानी से भरा एक इलाका नहीं बल्कि अनेक जीवों की जिंदगी का सहारा है। करीब 144 एकड़ यानी 58.59 हेक्टेयर में फैले मीठे पानी के इस जलक्षेत्र की अपनी अलग प्राकृतिक दुनिया है। यहां पक्षियों को ठिकाना मिलता है, वन्यजीवों को आश्रय और आसपास के पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने में मदद। यही वजह है कि सुरैला चौर को संरक्षित करने की पहल केवल एक जलक्षेत्र को बचाने तक सीमित नहीं है। यह उस प्राकृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास भी है, जिसका महत्व स्थानीय सीमाओं से कहीं आगे तक फैला है। हजारों मील की उड़ान और सुरैला चौर में पड़ाव सुरैला चौर की सबसे खूबसूरत पहचान यहां आने वाले प्रवासी पक्षी हैं। यह जलक्षेत्र विश्व प्रसिद्ध सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर स्थित है। प्रवासी पक्षियों की आवाजाही के इस महत्वपूर्ण मार्ग पर सुरैला चौर उनके लिए एक प्राकृतिक पड़ाव का काम करता है। नॉर्दर्न पिनटेल, गार्गेनी और गैडवाल जैसे पक्षियों की मौजूदगी इस चौर की खासियत है। पर्पल हेरॉन और एशियन ओपनबिल भी यहां पाए जाते हैं। इन परिंदों की मौजूदगी बताती है कि सुरैला चौर केवल स्थानीय प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रवासी पक्षियों की लंबी यात्राओं से भी जुड़ा हुआ है। 30 प्रजातियों के परिंदे, हर जीव की अपनी दुनिया एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2026 के दौरान सुरैला चौर में 17 कुलों की 30 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें संकटग्रस्त फेरुजिनस डक और साइबेरियाई स्टोनचैट जैसे पक्षी भी शामिल हैं लेकिन यहां की प्राकृतिक दुनिया केवल पंखों और उड़ानों तक सीमित नहीं है। सुरैला चौर में मछुआरा बिल्ली, गोह, कछुए, नेवला और सियार जैसे वन्यजीव भी पाए जाते हैं। एक ही जलक्षेत्र में इतनी विविधता का होना इस बात का संकेत है कि यहां का प्राकृतिक वातावरण अनेक जीवों के अस्तित्व के लिए कितना महत्वपूर्ण है। सिर्फ परिंदों का घर नहीं, धरती की प्यास बुझाने वाला जलक्षेत्र भी सुरैला चौर की अहमियत उसकी खूबसूरती और जैव विविधता से कहीं अधिक है। आर्द्रभूमि होने के कारण यह भूजल स्तर को बनाए रखने और बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही, पानी में मौजूद अतिरिक्त पोषक तत्वों और कुछ प्रदूषकों को जलस्रोतों तक पहुंचने से पहले अवशोषित करने की क्षमता भी रखता है यानी यह चौर प्रकृति की उस व्यवस्था का हिस्सा है, जो बिना किसी शोर के आसपास के पर्यावरण को संतुलित रखने का काम करती है। इसी प्राकृतिक महत्व के कारण इसका संरक्षण जरूरी माना जा रहा है। अब इस प्राकृतिक विरासत को सहेजने की पहल सुरैला चौर के संरक्षण की दिशा में प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला आर्द्रभूमि समिति इसकी प्रारूप अधिसूचना को पहले ही अनुमोदित कर चुकी है। अब बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने प्रारूप अधिसूचना प्रकाशित कर दी है। सीवान के जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा के अनुसार, यह कदम सुरैला चौर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन यहां की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।वहीं, गोपालगंज वन प्रमंडल की वन प्रमंडल पदाधिकारी मेघा यादव का कहना है कि इस पहल से प्रवासी पक्षियों सहित पूरे क्षेत्र की जैव विविधता के संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। संरक्षण के साथ इको पर्यटन की भी उम्मीद प्राकृतिक संपदा और पक्षियों की विविधता से समृद्ध सुरैला चौर में इको पर्यटन की भी व्यापक संभावनाएं हैं। यहां का मीठे पानी का जलक्षेत्र, प्रवासी पक्षियों का आगमन और वन्यजीवों की मौजूदगी प्रकृति में रुचि रखने वालों के लिए इसे खास बनाते हैं। हालांकि, फिलहाल महत्वपूर्ण कदम प्रारूप अधिसूचना का प्रकाशन है। इसके साथ संरक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ है। सुरैला चौर की असली पहचान उसके पानी में नहीं बल्कि उस जीवन में बसती है जिसे यह अपने भीतर और आसपास जगह देता है। दूर देशों से आने वाले परिंदों से लेकर यहां रहने वाले वन्यजीवों तक, सबकी इस साझा दुनिया को सहेजने की पहल अब एक नई दिशा में बढ़ चली है।