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नई दिल्ली। भारत ने कुछ कंपनियों के लिए अमेरिका के श्रम विभाग के परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पीईआरएम) आवेदन निलंबित किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि पीईआरएम प्रक्रिया एच-1बी वीजा कार्यक्रम से अलग है और इसके निलंबन से मौजूदा एच-1बी वीजा या वीजाधारकों तथा उनके आश्रितों की स्थिति अपने आप प्रभावित नहीं होती वहीं प्रभावित कंपनियों के योग्य कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर इसका कुछ असर पड़ सकता है। पीईआरएम और एच-1बी अलग-अलग, भारत ने किया स्पष्ट विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि भारत कुछ कंपनियों से संबंधित पीईआरएम कार्यक्रम पर अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले से अवगत है। मंत्रालय ने खास तौर पर स्पष्ट किया कि पीईआरएम, एच-1बी वीजा कार्यक्रम से अलग है इसलिए पीईआरएम आवेदनों के निलंबन का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा एच-1बी वीजा की वैधता या एच-1बी वीजाधारकों और उनके आश्रितों की स्थिति भी प्रभावित हो जाएगी। हालांकि, मंत्रालय के मुताबिक इस कदम का असर संबंधित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर पड़ सकता है। प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों के लिए फायदेमंद भारत ने अमेरिकी कदम पर असहमति जताते हुए कहा कि प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए मूल्यवान है।विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इससे जहां भारतीयों के लिए अवसर पैदा होते हैं वहीं अमेरिकी कंपनियों को अत्याधुनिक प्रतिभा, नवाचार और शोध का लाभ मिलता है। इसके साथ उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और रोजगार सृजन में भी मदद मिलती है। मंत्रालय ने कहा कि इससे अमेरिका में शेयरधारकों के लिए संपत्ति निर्माण में भी योगदान होता है और इसलिए यह दोनों देशों के लिए बड़े पारस्परिक लाभ का क्षेत्र है। ‘अमेरिकी कदम साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाते’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों से इन तथ्यों को समझने की अपेक्षा है। भारत ने अमेरिकी फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से घोषित कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाते हैं। भारत ने इस मुद्दे से जुड़ी अमेरिकी उपराष्ट्रपति की कुछ टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह का वर्णन अनुचित है और यह इस तथ्य की अनदेखी करता है कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं तथा वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ‘ऐतिहासिक और औपनिवेशिक संदर्भ वाली शब्दावली बेहद आपत्तिजनक’ विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी इतिहास में अप्रवासियों की भूमिका का भी जिक्र किया। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का इतिहास खुद अप्रवासियों की कई पीढ़ियों के श्रम, उद्यमिता और नवाचार से आकार लेता रहा है और उन्होंने देश की वृद्धि तथा समृद्धि में योगदान दिया है। मंत्रालय ने कहा कि दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत से जुड़े अर्थ वाली शब्दावली का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है। मंत्रालय ने कहा कि भारत इस मुद्दे से जुड़े घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।