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पटना। बिहार में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था मजबूत करने, उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने के लिए सरकार ने बिजली वितरण प्रणाली पर 11,096.55 करोड़ रुपये खर्च करने, पांच वर्षों में एक करोड़ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने के लक्ष्य वाली एमएसएमई नीति को मंजूरी देने और पुलिस व्यवस्था के विस्तार के निर्णय लिए। मंत्रिमंडल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि बिजली, उद्योग, सड़क, कृषि, खेल और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है। इनमें कुछ योजनाओं के लिए धनराशि मंजूर की गई जबकि कई नई नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लागू करने का रास्ता साफ किया गया है। बिजली व्यवस्था पर 11,096 करोड़, तीन साल में होगा काम श्री चौधरी ने बताया कि राज्य में बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए सरकार ने वितरण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए 11,096.55 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी मिली है, जिसे अधिकतम तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य है। योजना के तहत कम क्षमता वाले एलटी एबी केबल बदले या उन्नत किए जाएंगे। अधिक भार झेल रहे वितरण ट्रांसफॉर्मरों और दूसरे बिजली उपकरणों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। साथ ही कम वोल्टेज वाली वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। इस योजना के लिए राज्य सरकार की गारंटी पर नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड को 6,066 करोड़ रुपये और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड को 5,030.55 करोड़ रुपये विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने की अनुमति दी गई है। ऋण मंजूर होने से पहले निविदा आमंत्रित करने की भी स्वीकृति मिली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में बिहार में बिजली की अधिकतम मांग 1,802 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 9,475 मेगावाट हो चुकी है। इसी बढ़ती जरूरत को ध्यान में रखकर वितरण व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने की योजना तैयार की गई है। दरभंगा और खगौल ग्रिड की भी बढ़ेगी ताकत बिजली क्षेत्र में एक अन्य फैसले के तहत दरभंगा और पटना के खगौल ग्रिड उपकेंद्रों में 200-200 एमवीए क्षमता के दो अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। इसके लिए 33.44 करोड़ रुपये की नई योजना स्वीकृत की गई है। दरभंगा ग्रिड में पहले से 220 एमवीए क्षमता के दो ट्रांसफॉर्मर हैं, जबकि खगौल ग्रिड में 200 एमवीए के तीन ट्रांसफॉर्मर काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था से दोनों ग्रिड की क्षमता बढ़ेगी। दरभंगा में अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर लगने के बाद एन-1 अनुपालन की शर्त भी पूरी हो सकेगी, जिससे किसी एक ट्रांसफॉर्मर के बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक क्षमता उपलब्ध रखने में मदद मिलेगी। पांच साल में एक करोड़ उद्यमी परिवार बनाने का लक्ष्य उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में मंत्रिमंडल ने बिहार एमएसएमई नीति-2026 को घटनोत्तर स्वीकृति दी है। इस नीति का आधार ‘एक करोड़ उद्यमी परिवार, सशक्त बिहार का आधार’ की परिकल्पना है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में एक करोड़ परिवारों को उद्यमिता से जोड़ने और एक करोड़ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने राज्य का साख-जमा अनुपात 75 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया है। इसके अलावा प्रत्येक जिले में एक औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने और बिहार के सभी 38 जिलों में एमएसएमई केंद्र स्थापित करने की योजना है। नई नीति में छोटे उद्योगों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने, कौशल विकास, नई तकनीक अपनाने, वित्तीय सहायता, बाजार उपलब्ध कराने और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन को प्राथमिकता दी गई है। उद्यमों के पंजीकरण और पहचान के लिए बिहार उद्यम पहचान संख्या तथा एकीकृत एमएसएमई पोर्टल की व्यवस्था प्रस्तावित है। वहीं, बिहार एमएसएमई निधि और ग्रोथ फंड के माध्यम से वित्तीय सहयोग देने का प्रावधान किया गया है। उत्पादों की बिक्री और बाजार विस्तार के लिए बिहार मार्ट तथा एमएसएमई मंडपम जैसे माध्यम विकसित किए जाएंगे। कारीगरों और छोटे उद्योगों को मिलेगा साझा सुविधा केंद्र अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना-2026 को भी घटनोत्तर मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्पियों, हथकरघा क्षेत्र और छोटे उद्यमों के लिए सामान्य सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने और बेहतर पैकेजिंग जैसी सुविधाएं विकसित करने पर जोर रहेगा। योजना में लुप्त होती कलाओं को संरक्षण देने, एमएसएमई से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की क्षमता बढ़ाने, कौशल प्रशिक्षण, उत्पादों के मानकीकरण, पूंजी उपलब्धता और निर्यात को प्रोत्साहित करने की भी व्यवस्था है। सरकार को उम्मीद है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पारंपरिक कारीगरों की आय में सुधार होगा। बिहार राज्य खेल-2026 में उतरेंगे 5500 खिलाड़ी राज्य में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार राज्य खेल-2026 के आयोजन को मंजूरी मिली है। इस प्रतियोगिता में 24 खेल विधाओं के तहत विभिन्न जिलों से लगभग 5,500 खिलाड़ी भाग लेंगे। आयोजन में 750 तकनीकी पदाधिकारी और 750 स्वयंसेवकों के शामिल होने का अनुमान है। खिलाड़ियों और आयोजन से जुड़े लोगों के रहने, भोजन, परिवहन, चिकित्सा, सुरक्षा तथा खेल उपकरणों की व्यवस्था के लिए बिहार ओलंपिक संघ को नामांकन के आधार पर अधिकृत करने की मंजूरी दी गई है। पूरे आयोजन पर लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। गोबर और कृषि अवशेष से बनेगी ऊर्जा, नई बायो-फ्यूल नीति मंजूर श्री चौधरी ने बतया कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बिहार बायो-फ्यूल एवं कंप्रेस्ड बायो-गैस उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2026 लागू करने की पहल को मंजूरी दी गई है। इसके तहत कृषि अवशेष, पशुओं से निकलने वाले अपशिष्ट, शहरों के ठोस कचरे और चीनी उद्योग के उपोत्पाद प्रेस-मड का उपयोग कर बायो-फ्यूल तथा कंप्रेस्ड बायो-गैस का उत्पादन प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उद्योग विभाग को दी गई है। उद्योग निदेशक इसके नोडल पदाधिकारी होंगे। परियोजनाओं के पंजीकरण और निगरानी के लिए सिंगल विंडो पोर्टल तथा सीबीजी एमआईएस विकसित करने की व्यवस्था है। इसके जरिए उत्पादन, कच्चे माल के उपयोग, जैविक खाद से जुड़े उत्पादों और रोजगार की जानकारी रखी जाएगी। इस पहल को केंद्र सरकार की गोबरधन और सैटैट जैसी योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। मोतिहारी, पूर्णिया और सारण में बनेंगे सिटी एसपी कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मंत्रिमंडल ने मोतिहारी, पूर्णिया और सारण में नगर पुलिस अधीक्षक के तीन पद सृजित करने की मंजूरी दी है। इन अधिकारियों के कार्यालयों के संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों में कुल 12 अतिरिक्त पद भी बनाए जाएंगे। सरकार ने बढ़ती आबादी और अपराध की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। भागलपुर में पुलिस व्यवस्था के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत पुलिस उपाधीक्षक, विधि-व्यवस्था, भागलपुर के मौजूदा पद को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1, विधि-व्यवस्था के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा। वहीं, बिहार पुलिस मुख्यालय के लिए पहले से सृजित पुलिस उपाधीक्षक के चार पदों में से एक को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-2, विधि-व्यवस्था, भागलपुर के रूप में स्थानांतरित किया जाएगा। आर्थिक अपराध इकाई को मिलेंगे 143 नए पद आर्थिक अपराधों की जांच और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के लिए बिहार की आर्थिक अपराध इकाई के विस्तार को भी मंजूरी मिली है। इसके तहत क्षेत्रीय आर्थिक अपराध इकाइयों के लिए 143 नए पद सृजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य आर्थिक अपराधों से संबंधित जांच की क्षमता बढ़ाना और इकाई के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना है। वैज्ञानिक जांच इकाइयों के लिए बनेगी निदेशालय संरचना गृह विभाग के अंतर्गत संचालित वैज्ञानिक जांच से जुड़ी इकाइयों के प्रशासनिक और तकनीकी प्रबंधन में भी बदलाव होगा। मंत्रिमंडल ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला, पुलिस प्रयोगशाला, अंगुलांक ब्यूरो और फोटो ब्यूरो जैसी इकाइयों के संचालन और निगरानी के लिए निदेशालय की संरचना गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत निदेशक प्रमुख के पहले से सृजित एक अस्थायी पद को समाप्त कर उसकी जगह एक स्थायी पद बनाया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच इकाइयों के बीच प्रशासनिक समन्वय और तकनीकी नियंत्रण को व्यवस्थित करना है। किशनगंज में स्टार्च फैक्ट्री, गोपालगंज में बढ़ेगा इथेनॉल उत्पादन अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मंत्रिमंडल ने दो औद्योगिक परियोजनाओं में निजी निवेश को भी मंजूरी दी है। किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड स्थित गलगलिया चेक पोस्ट पर मेसर्स ईस्टर्न एग्रो केमिकल्स लिमिटेड 88.62 करोड़ रुपये के निवेश से मक्का स्टार्च उत्पादन इकाई स्थापित करेगी। इसकी क्षमता प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन होगी। परियोजना से 217 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं, गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर प्रखंड के राजापट्टी में मेसर्स वेस्टवेल बायोरिफाइनरीज प्राइवेट लिमिटेड की अनाज आधारित इथेनॉल इकाई का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए 97.80 करोड़ रुपये के निजी निवेश को स्वीकृति मिली है। इकाई की उत्पादन क्षमता 167.5 किलोलीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर कुल 325 किलोलीटर प्रतिदिन की जाएगी। इस परियोजना से 210 कामगारों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। दोनों परियोजनाओं में कुल 186.42 करोड़ रुपये के निजी निवेश और 427 लोगों के लिए रोजगार के अवसर की संभावना बताई गई है। छोटे उद्यमों के भुगतान विवाद सुलझाने के लिए नई नियमावली श्री चौधरी ने बताया कि मंत्रिमंडल ने सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियमावली-2026 को घटनोत्तर स्वीकृति दी है। नई नियमावली के जरिए वर्ष 2007 की व्यवस्था को संशोधित कर उसकी जगह नया प्रावधान लागू किया जाएगा। इसे एमएसएमई विकास अधिनियम, 2006 और वर्ष 2026 के संशोधन के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य छोटे उद्यमों के भुगतान से जुड़े विवादों का समयबद्ध निपटारा करना और अनुपालन की प्रक्रिया को आसान बनाना है। सरकार को उम्मीद है कि भुगतान संबंधी अड़चनें कम होने से सूक्ष्म और लघु उद्योगों को कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। नवादा के वारिसलीगंज में नई चीनी मिल की योजना अपर मुख्य सचिव ने बताया कि सात निश्चय-3 के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ कार्यक्रम में नवादा जिले के वारिसलीगंज में नई चीनी मिल स्थापित करने की योजना बनाई गई है। चीनी मिल के साथ गन्ने से जुड़े उपोत्पादों पर आधारित डिस्टिलरी, को-जेनरेशन और कंप्रेस्ड बायो-गैस इकाइयां भी लगाने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य गन्ने की खेती का क्षेत्र बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इससे रोजगार के लिए होने वाले पलायन को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही राज्य की पुरानी बंद चीनी मिलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा चालू करने का निर्णय भी लिया गया है। सोनपुर का बढ़ेगा दायरा, सैटेलाइट टाउनशिप के लिए बड़ा फैसला श्री चौधरी ने बताया कि शहरी विकास से जुड़े फैसलों में सोनपुर आयोजना क्षेत्र के विस्तार को मंजूरी दी गई है। इस क्षेत्र में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप, अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा, फिल्म सिटी और शैक्षणिक संस्थानों सहित कई विकास परियोजनाओं की योजना है। भविष्य में राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय परियोजनाओं की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आयोजना क्षेत्र का दायरा बढ़ाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा चयनित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर लगा प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से हटाने को मंजूरी दी गई है। हालांकि, टाउनशिप की विकास योजना अधिसूचित होने के बाद भवन निर्माण और जमीन का विकास निर्धारित भूमि उपयोग तथा लागू विकास नियंत्रण नियमों के अनुसार ही किया जा सकेगा। तीन नई सड़कों के लिए 37.10 करोड़ की परामर्शी सेवा अपर मुख्य सचिव ने बताया कि पथ निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर तीन सड़क परियोजनाओं के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर की सेवाएं लेने को 37.10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इनमें पहली परियोजना विश्वामित्र पथ है, जो बक्सर से आरा होते हुए मनेर तक प्रस्तावित है। इसकी लंबाई 90 किलोमीटर होगी। दूसरी परियोजना गंगा अम्बिका पथ है। बिदुपुर से दिघवारा तक उत्तरी गंगा पथ के रूप में प्रस्तावित इस सड़क की लंबाई 56 किलोमीटर होगी। तीसरी परियोजना नारायणी पथ है, जो दरिहारा (कोन्हुआ) से गोपालगंज के डुमरिया घाट तक बनेगी। इसकी प्रस्तावित लंबाई 73.51 किलोमीटर है। तीनों मार्गों की कुल लंबाई 219.51 किलोमीटर होगी। इन सड़कों को बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल की डीबीएफओटी-टोल पद्धति पर विकसित करने की योजना है। मंजूर की गई 37.10 करोड़ रुपये की राशि परामर्शी सेवाओं के लिए है, न कि तीनों सड़कों की पूरी निर्माण लागत के लिए। किसानों के लिए बीज व्यवस्था पर 11.83 करोड़ श्री चौधरी ने बताया कि कृषि क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के बीज घटक के तहत 11.83 करोड़ रुपये की योजना के क्रियान्वयन, राशि की निकासी और खर्च को मंजूरी दी गई है। इस राशि से बीज प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। पहले से संचालित बीज प्रसंस्करण और भंडारण इकाइयों का आधुनिकीकरण भी किया जाएगा। प्राकृतिक आपदा या किसी आकस्मिक स्थिति में किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय बीज भंडार को मजबूत करने की योजना है। उन्होंने बताया कि आज की बैठक में कुल 43 प्रस्तावों को मंजूरी गई।


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