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मोतिहारी। “देते हैं भगवान को धोखा, इंसान को क्या छोड़ेंगे!” वर्ष 1967 की फिल्म ‘उपकार’ में गीतकार इंदीवर की लिखी ये पंक्तियां मोतिहारी में विजयादशमी की रात हुई चोरी पर सटीक बैठती हैं। जिस रात रावण के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का उद्घोष हो रहा था, उसी रात चोरों ने भगवान के दरबार में सेंध लगा दी। मिस्कॉट स्थित श्री साई बाबा मंदिर से बाबा का छत्र और गणेश जी का चांदी का मुकुट चोरी हो गया। रावण का पुतला तो जल गया, लेकिन लोभ और अनैतिकता की आग बुझी या नहीं, इसका जवाब मंदिर में हुई चोरी ने शहर के सामने खड़ा कर दिया है। व्यस्त मीना बाजार से चंद कदम दूर हुई इस वारदात ने धार्मिक आस्था के साथ पुलिस की गश्ती व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। मंदिर में चोरी का खुलासा बुधवार सुबह पूजा-अर्चना के लिए पट खुलने पर हुआ। श्री साई बाबा ट्रस्ट, मोतिहारी के ट्रस्टी रवि अग्रवाल ने "आईएनआई" को बताया कि मंदिर से साई बाबा का लगभग 10 किलोग्राम का छत्र और गणेश जी का करीब 100 ग्राम का चांदी का मुकुट गायब था। तत्काल डायल 112 को सूचना दी गई और नगर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। ट्रस्टी के अनुसार, चोरी से मंदिर को करीब 23 लाख रुपये की क्षति हुई है। डेढ़ महीने से खराब कैमरा, मंदिर में सोते रहे पुजारी नगर थाना पुलिस के अनुसार, चोर ताला काटकर मंदिर में दाखिल हुए। मंदिर का सीसीटीवी कैमरा करीब डेढ़ महीने से खराब पड़ा था। वारदात के वक्त पुजारी मंदिर में ही सो रहे थे, लेकिन उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। पुलिस का दावा है कि केवल गणेश जी का मुकुट चोरी हुआ है और साई बाबा का छत्र, दानपेटी तथा चरण पादुका सुरक्षित हैं। इसके विपरीत, मंदिर प्रबंधन ने छत्र चोरी होने की भी पुष्टि की है। चोरी गई वस्तुओं को लेकर पुलिस और ट्रस्ट के बयानों में अंतर है, जिसे जांच में स्पष्ट करना होगा। एसपी की कार्रवाई, गश्ती दल और बाइक पार्टी निलंबित मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात ने संबंधित क्षेत्र के गश्ती दल और बाइक पार्टी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन्होंने बताया कि घटना की गहन जांच की जा रही है। साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वाड और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम को घटनास्थल पर भेजा गया है। आस्था पर चोट, पुलिस के सामने बरामदगी की चुनौती साई के संस्थापक सदस्य डॉ. पी.के. राव ने घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि यह आस्था के साथ गैरकानूनी बदमाशी है। उन्होंने चोरी गई वस्तुओं की शीघ्र बरामदगी और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। धर्म केवल पूजा-पाठ और उत्सवों तक सीमित नहीं, बल्कि आचरण में मर्यादा और नैतिकता उतारने का संदेश भी है। विजयादशमी पर रावण दहन इसी संदेश का प्रतीक है। ऐसे में उसी रात मंदिर में चोरी होना उत्सव के आध्यात्मिक संदेश पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। शहर के बीचोंबीच मंदिर का ताला कटना और गश्ती पुलिस एवं पुजारी को वारदात की भनक तक नहीं लगना, ये सभी पहलू सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग करते हैं। अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती है, चोरी गई वस्तुओं की बरामदगी और श्रद्धालुओं का भरोसा बहाल करना।