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नई दिल्ली। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से इस वर्ष सितंबर में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.83 प्रतिशत से बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई जबकि खाद्य महंगाई 5.97 प्रतिशत से उछलकर 7.74 प्रतिशत हो गई। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, प्याज, अदरक, लहसुन और नींबू की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ाया है, जिसका असर शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिखाई दिया। एक महीने में महंगाई ने पकड़ी रफ्तार सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दर 5.54 प्रतिशत दर्ज की गई। अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत थी। यानी एक महीने में खुदरा महंगाई दर 0.71 प्रतिशत अंक बढ़ गई। खाने-पीने की चीजों की महंगाई में इससे भी तेज बढ़ोतरी हुई। अगस्त में खाद्य महंगाई दर 5.97 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 7.74 प्रतिशत पहुंच गई। इस तरह खाद्य महंगाई दर में 1.77 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई। गांवों में महंगाई की मार ज्यादा महंगाई के आंकड़ों में एक बार फिर ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई दर 6.08 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.88 प्रतिशत दर्ज की गई। खाने-पीने की चीजों के मामले में भी गांवों में महंगाई ज्यादा रही। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 8.06 प्रतिशत और शहरों में 7.18 प्रतिशत दर्ज की गई। प्याज ने निकाले आंसू, अदरक-लहसुन भी महंगे सितंबर में कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले भारी उछाल दर्ज किया गया। प्याज की औसत कीमत एक साल पहले के मुकाबले 108 प्रतिशत बढ़ गई। वहीं, चांदी के गहने 88 प्रतिशत, अदरक 63 प्रतिशत, लहसुन 55 प्रतिशत और नींबू 36 प्रतिशत महंगे हुए। इन वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने महंगाई के दबाव को और बढ़ा दिया। आलू और टमाटर ने दी थोड़ी राहत जहां कई जरूरी चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई, वहीं कुछ वस्तुओं के दाम घटने से राहत भी मिली। सितंबर में पिछले साल के मुकाबले आलू 12 प्रतिशत और टमाटर नौ प्रतिशत सस्ता हुआ। इसके अलावा मोटर वाहनों की कीमतों में पांच प्रतिशत तथा भिंडी और नारियल की कीमतों में चार-चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। माल ढुलाई 15% महंगी, परिवहन खर्च भी बढ़ा महंगाई बढ़ने के पीछे सिर्फ खाद्य पदार्थों की कीमतें ही नहीं, बल्कि सेवाओं का महंगा होना भी एक कारण रहा। सितंबर में रेस्त्रां और आवासीय सेवाएं पिछले साल की तुलना में 9.36 प्रतिशत महंगी हुईं। परिवहन सेवाओं की कीमतों में 5.01 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खास बात यह रही कि माल ढुलाई 15 प्रतिशत महंगी हुई, जिसका कुल महंगाई बढ़ाने में बड़ा योगदान रहा। सोने-चांदी की कीमतों में तेजी के कारण निजी सौंदर्य प्रसाधन, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं एवं सेवाओं के समूह की महंगाई दर 13.75 प्रतिशत रही। रिजर्व बैंक पहले ही जता चुका था महंगाई बढ़ने का अंदेशा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सात अक्टूबर को जारी मौद्रिक नीति बयान में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई थी। केंद्रीय बैंक के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध के दूसरे दौर के आर्थिक प्रभाव अब दिखाई देने लगे हैं। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए खुदरा महंगाई दर 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए छह प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। खाद्य कीमतों और परिवहन खर्च ने बढ़ाई चिंता सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि खुदरा महंगाई बढ़ाने में खाने-पीने की चीजों की कीमतों का प्रमुख योगदान रहा। इसके साथ माल ढुलाई और अन्य सेवाओं की बढ़ती लागत ने भी दबाव बढ़ाया। हालांकि, आलू और टमाटर जैसी कुछ वस्तुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन प्याज, अदरक, लहसुन और नींबू की तेज महंगाई के कारण कुल खाद्य महंगाई दर में बड़ा उछाल आया।