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सीवान। बिहार के सीवान जिले में वर्ष 2026 के दौरान कालाजार के 16 और पोस्ट कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस (पीकेडीएल) के 12 समेत कुल 28 मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2027 तक कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य हासिल करने के लिए संदिग्ध मरीजों की सक्रिय खोज, नियमित निगरानी और समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। 28 मरीजों में 12 पीकेडीएल से पीड़ित स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में इस वर्ष मिले 28 मरीजों में 16 विसरल लीशमैनियासिस (वीएल) यानी कालाजार और 12 पोस्ट कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस (पीकेडीएल) के हैं। इन मामलों को देखते हुए जिला स्तर पर कार्यशाला और समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में मरीजों की पहचान, जांच, उपचार और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। कार्यशाला में विभिन्न प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मेडिकल ऑफिसर, जीएनएम, एएनएम और वेक्टर जनित रोगों की निगरानी से जुड़े कर्मचारी शामिल हुए। जहां मरीज नहीं मिले, वहां भी होगी तलाश विश्व स्वास्थ्य संगठन की एनटीडी जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. माधुरी देवराजू ने कहा कि कालाजार के मामलों को नियंत्रित करने के लिए केवल सामने आए मरीजों का इलाज पर्याप्त नहीं है, बल्कि संदिग्ध मरीजों की लगातार खोज भी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन प्रखंडों में अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है, वहां भी स्वास्थ्यकर्मियों को सक्रिय रहना होगा। विशेष रूप से पीकेडीएल के मरीजों की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारी के लक्षण, जांच की प्रक्रिया, दवाओं की निर्धारित खुराक, उपचार के नियम और रिपोर्टिंग के बारे में जानकारी दी। दो सप्ताह से बुखार तो जांच जरूरी कार्यशाला में बताया गया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बुखार रहे तो उसे चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। संदिग्ध मरीजों की जांच निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आरके-39 किट से करने की जानकारी दी गई। पहले कालाजार से पीड़ित रह चुके लोगों में दोबारा लक्षण दिखाई देने पर जरूरी पुष्टि जांच कराने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा कालाजार मरीजों की एचआईवी जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। त्वचा पर सफेद-लाल धब्बों को न करें नजरअंदाज स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि पीकेडीएल के मरीजों में त्वचा पर सफेद या लाल रंग के धब्बे और गांठें दिखाई दे सकती हैं। ऐसे लक्षणों को सामान्य त्वचा संबंधी परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर पहले कालाजार से पीड़ित रह चुके लोगों को ऐसे बदलाव दिखने पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से लंबे समय तक बुखार रहने या त्वचा पर असामान्य धब्बे और गांठें दिखाई देने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध निःशुल्क जांच सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है। आशा और एएनएम को सौंपी निगरानी की जिम्मेदारी सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के माध्यम से पीकेडीएल मरीजों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्ष 1990 के दशक में कालाजार की जांच और उपचार से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए और बताया कि उस दौर में सीमित संसाधनों के बीच मरीजों की जांच और इलाज किया जाता था, जबकि अब आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मरीजों की लंबित क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान जल्द कराने का भी निर्देश दिया। मरीजों को मिलती है 7100 रुपये की सहायता जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओपी लाल ने बताया कि कालाजार उन्मूलन के लिए निर्धारित मानकों में प्रति 10 हजार की आबादी पर एक से कम मरीज होना महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने बताया कि कालाजार के मरीजों को श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में 7100 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पात्र मरीजों को सहायता राशि समय पर मिले और उपचार के बाद उनकी निगरानी में कोई कमी न रहे।