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नई दिल्ली। पंजाब शिक्षा विभाग में 1013 लेक्चरर पदों की भर्ती में अनुसूचित जाति (एससी) के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और पंजाब के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर भर्ती से जुड़े तथ्य, आरोपों पर की गई कार्रवाई और आरक्षण रोस्टर समेत सभी संबंधित रिकॉर्ड आयोग के सामने रखने को कहा है। सांसद तरुण चुघ की शिकायत पर आयोग ने लिया संज्ञान यह मामला राज्यसभा सांसद तरुण चुघ की ओर से दिए गए एक प्रतिवेदन के बाद सामने आया है। प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि पंजाब शिक्षा विभाग में लेक्चरर की भर्ती के दौरान आरक्षण नीति लागू नहीं की गई और अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को उनके आरक्षण का लाभ नहीं मिला। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले की जांच का आदेश दिया है। 1013 लेक्चरर पदों की भर्ती पर सवाल शिकायत का केंद्र पंजाब शिक्षा विभाग की ओर से अधिसूचित 1013 लेक्चरर पदों की भर्ती प्रक्रिया है। आरोप है कि इस भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को आरक्षण के निर्धारित लाभ से वंचित किया गया। आयोग ने इन आरोपों की जांच के लिए पंजाब सरकार से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि कई विषयों में आरक्षण नियमों और निर्धारित रोस्टर प्रणाली का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। इनमें पंजाबी, कॉमर्स, गणित, फिजिक्स, इकोनॉमिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और जियोग्राफी समेत कई विषय शामिल बताए गए हैं। हालांकि, ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और आयोग ने अब इन्हीं की जांच के लिए पंजाब सरकार से तथ्य और दस्तावेज मांगे हैं। मुख्य सचिव को नोटिस, सात दिन की समयसीमा एनसीएससी ने मामले में पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। मुख्य सचिव को नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर आयोग को जवाब देना होगा। आयोग ने मुख्य रूप से तीन तरह की जानकारी मांगी है—मामले के तथ्य, लगाए गए आरोपों पर अब तक की गई कार्रवाई और भर्ती से संबंधित सभी रिकॉर्ड। इन रिकॉर्ड में भर्ती अधिसूचना और आरक्षण रोस्टर भी शामिल हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने साफ किया है कि निर्धारित समयसीमा में जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वह संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत मिली सिविल कोर्ट की शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसी स्थिति में आयोग व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन भी जारी कर सकता है। एनसीएससी अध्यक्ष किशोर मकवाना बोले—बेहद गंभीर मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने लेक्चरर भर्ती में एससी उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने के आरोप को “बेहद गंभीर मामला” बताया है। उन्होंने कहा कि आयोग अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और सरकारी सेवाओं में आरक्षण के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए आयोग कानून के अनुसार सभी जरूरी कदम उठाएगा।



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