Full Story

नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्ध तकनीक आधारित होंगे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष क्षमताओं का बढ़ता इस्तेमाल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा और रणनीति तय करेगा। डॉ. सिंह ने गुरुवार को राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि दुनिया में युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। इसलिए, भारत को नई तकनीकों के विकास में सबसे आगे रहना होगा, ताकि देश हर तरह की सुरक्षा चुनौती का मजबूती से सामना कर सके। भारत अब सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहा, बेच भी रहा है केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। पहले देश रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर ज्यादा निर्भर था, लेकिन अब भारत खुद आधुनिक हथियार और रक्षा उपकरण बना रहा है और दूसरे देशों को निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद रक्षा उत्पादन 174 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं रक्षा निर्यात 34 गुना बढ़कर 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव में निजी कंपनियों, स्टार्टअप और 16 हजार से अधिक एमएसएमई की बड़ी भूमिका रही है। एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी बदल देंगी सेना का काम करने का तरीका डॉ. सिंह ने कहा कि भविष्य में सेना एआई की मदद से दुश्मन की गतिविधियों पर तेजी से नजर रख सकेगी, खतरे का पहले से अनुमान लगा सकेगी और कम समय में सही फैसला ले सकेगी। उन्होंने बताया कि क्वांटम टेक्नोलॉजी भविष्य में सुरक्षित संचार और साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाएगी। इसके लिए भारत पहले ही राष्ट्रीय क्वांटम मिशन शुरू कर चुका है। जैव सुरक्षा भी होगी बड़ी चुनौती केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भविष्य में सिर्फ पारंपरिक युद्ध ही नहीं, बल्कि जैविक खतरों से भी मुकाबला करना होगा। इसलिए बायोटेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाना जरूरी है, ताकि किसी भी स्वास्थ्य या जैविक संकट से समय रहते निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य की सुरक्षा के लिए खतरों की पहले से पहचान कर तैयारी करना, साइबर और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना और रक्षा तकनीक एवं जरूरी सप्लाई में आत्मनिर्भर बनने जैसे तीन बड़े क्षेत्रों पर काम करना होगा। वैज्ञानिक, उद्योग और सेना मिलकर करें काम डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग, स्टार्टअप और सेना के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। नई तकनीकों को सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें जल्द से जल्द सेना और देश की सुरक्षा में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नागरिक वैज्ञानिक और सेना साथ मिलकर काम करेंगे तो भारत न सिर्फ अपनी सुरक्षा मजबूत करेगा, बल्कि दुनिया में तकनीक के क्षेत्र में भी एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। सैनिकों के योगदान को किया सलाम केंद्रीय मंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए कहा कि हमारे सैनिक सिर्फ सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते बल्कि प्राकृतिक आपदा, आपातकाल और मानवीय संकट के समय भी देश की सेवा में हमेशा आगे रहते हैं। उनके समर्पण और बलिदान पर पूरे देश को गर्व है।