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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज कहा कि राज्य में अगला पंचायत चुनाव परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कराया जाएगा और करीब 7500 की आबादी पर एक पंचायत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने शुरू की परिसीमन की प्रक्रिया श्री चौधरी ने सोमवार को पटना के ताज सिटी सेंटर में आयोजित ‘ग्राम संसद-बिहार चैप्टर-V’ मुखिया संवाद कार्यक्रम में यह जानकारी दी और बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अगला पंचायत चुनाव परिसीमन के बाद ही कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नगर निकायों में भी परिसीमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पंचायत और नगर निकाय क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण हो सके। उन्होंने कहा कि करीब 7500 की आबादी पर एक पंचायत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। पंचायतों को तकनीकी मदद, बनेगा इंजीनियरिंग सेल पंचायतों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पंचायती राज विभाग में इंजीनियरिंग सेल विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे मुखिया को पंचायत क्षेत्र में विकास योजनाओं को लागू करने में तकनीकी सहायता मिलेगी और गांवों की विकास व्यवस्था को बेहतर किया जा सकेगा। ‘ग्राम संसद’ से मांगे गांवों के विकास के ठोस सुझाव श्री चौधरी ने त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों के विकास के लिए ठोस सुझाव देने का आह्वान किया और कहा कि बिहार के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है और ग्राम संसद के माध्यम से ऐसे सुझाव सामने आने चाहिए, जिन्हें नीतियों और योजनाओं में शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि 2037 में बिहार की स्थापना के 125 वर्ष पूरे होने तक राज्य को समृद्ध, सशक्त और विकसित बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत लोकतंत्र की महत्वपूर्ण इकाई है और मुखिया के पास अपने क्षेत्र के विकास के साथ जनसमस्याओं के समाधान की बड़ी जिम्मेदारी होती है। पंचायतों के लिए राजस्व के नए स्रोत पर मांगे सुझाव मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर राजस्व के नए स्रोत विकसित करने के लिए भी ग्राम संसद से सुझाव मांगे। उन्होंने कहा कि इससे गांवों में कचरा प्रबंधन, पेयजल, बिजली और सड़क समेत दूसरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार आम लोगों पर अतिरिक्त कर लगाने के पक्ष में नहीं है। हर पंचायत में 10 विकास योजनाओं पर काम श्री चौधरी ने बताया कि बिहार में ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक पंचायत में 10 विकास योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी केंद्रों के रख-रखाव, रंगाई-पुताई और आधारभूत सुविधाओं को तय समय सीमा में बेहतर करने का काम शामिल है। हर महीने दो दिन सहयोग शिविर, 30 दिनों में आवेदनों का निष्पादन मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसमस्याओं के तेजी से समाधान के लिए पंचायत स्तर पर हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के अंदर निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। समाधान से संतुष्ट नहीं होने वाले आवेदकों की समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री के स्तर पर भी राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। साल में कम से कम 12 ग्राम सभाएं श्री चौधरी ने बताया कि प्रत्येक महीने के अंतिम रविवार को ग्राम सभा की बैठक आयोजित करने की व्यवस्था शुरू की गई है। इस तरह साल में कम से कम 12 ग्राम सभा की बैठकें होंगी, जिनमें गांव के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा और निर्णय किए जाएंगे। पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के साथ उनके रख-रखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। 2030 से पहले एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य शिक्षा और रोजगार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 से पहले एक करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अगले चार-पांच वर्षों में ऐसी परिस्थितियां बनाने का प्रयास किया जाएगा कि बिहार के लोगों को रोजगार के लिए मजबूरी में राज्य से बाहर नहीं जाना पड़े। उन्होंने कहा कि बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के माध्यम से करीब 18 हजार करोड़ रुपये की बड़ी राशि राज्य से बाहर जाती है। इसे देखते हुए बिहार में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है। राज्य में नए निजी और सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं तथा अधिक निजी विश्वविद्यालय खोलने का लक्ष्य है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा बिहार में ही उपलब्ध हो सके। किसानों को 55 पैसे प्रति यूनिट बिजली श्री चौधरी ने कहा कि किसानों को कृषि कार्य के लिए 55 पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिस पर हर साल करीब 5 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। सभी कृषि फीडरों को सोलराइज करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रत्येक परिवार को हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद में बिहार में बने उत्पादों को प्राथमिकता देने की तैयारी भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि छड़, सीमेंट समेत बिहार में निर्मित उत्पादों की कम से कम 30 प्रतिशत खरीद करनी होगी। इस व्यवस्था को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। ‘गांव विकसित होगा, तभी देश विकसित होगा’ मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत और वर्ष 2037 तक समृद्ध तथा सशक्त बिहार के निर्माण के लिए त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के सुझाव और सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा, “गांव की समृद्धि देश की समृद्धि है। गांव विकसित होगा, तभी देश विकसित होगा।” कार्यक्रम को उच्च शिक्षा सह विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर , विधान पार्षद एवं ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख , ग्राम संसद के उपाध्यक्ष दीपक ठाकुर और ग्राम संसद की नेशनल ब्रांड एम्बेसडर किरण प्रभाकर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में बिहार राज्य मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश राय , बिहार राज्य पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद निराला , ग्राम संसद के संस्थापक एवं महासचिव ब्रजेश शर्मा , महासचिव मृत्युंजय सिंह समेत बड़ी संख्या में मुखिया और सरपंच मौजूद रहे।