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पटना। खातीपुरा (जयपुर)-दरभंगा अमृत भारत एक्सप्रेस के शुरू होने से बिहार और राजस्थान के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा तथा लाखों प्रवासी कामगारों, छात्रों, कारोबारियों और यात्रियों को बेहतर यात्रा सुविधा के साथ रोजगार, व्यापार और पर्यटन के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना स्थित संकल्प सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से, मुख्य कार्यक्रम स्थल खातीपुरा (जयपुर) से राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खातीपुरा (जयपुर)-दरभंगा अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान श्री चौधरी ने कहा कि यह ट्रेन केवल एक रेल सेवा नहीं, बल्कि बिहार और राजस्थान के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण सेतु है। प्रवासी मजदूरों और परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा राजस्थान में बड़ी संख्या में बिहार, विशेषकर मिथिला क्षेत्र के लोग रोजगार और व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। अब उन्हें अपने घर आने-जाने के लिए बेहतर रेल सुविधा मिलेगी। इससे यात्रा का समय, परेशानी और खर्च कम होगा तथा परिवारों के बीच संपर्क और मजबूत होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की धरती से देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह ट्रेन बड़ी राहत लेकर आई है। नई रेल सेवा से लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार और स्थानीय उत्पादों को मिलेगा नया बाजार नई ट्रेन से बिहार और राजस्थान के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। श्री चौधरी ने कहा कि यह ट्रेन मिथिला के प्रसिद्ध मखाना और राजस्थान के मशहूर घेवर जैसे स्थानीय उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने में मददगार साबित होगी। पर्यटन और सांस्कृतिक संबंध होंगे मजबूत दरभंगा और मिथिला क्षेत्र अपनी समृद्ध संस्कृति, धार्मिक स्थलों और परंपराओं के लिए जाना जाता है, जबकि जयपुर और राजस्थान देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण हैं। नई ट्रेन शुरू होने से दोनों राज्यों के लोगों के लिए पर्यटन आसान होगा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी रेल सेवाएं देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर राष्ट्रीय एकता और समावेशी विकास को मजबूती देती हैं। रेलवे के विकास से बदल रही बिहार की तस्वीर श्री चौधरी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय रेलवे में बड़े बदलाव हुए हैं। नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, विद्युतीकरण, आधुनिक स्टेशनों और यात्री सुविधाओं के विस्तार से देशभर में संपर्क व्यवस्था मजबूत हुई है। बिहार भी इस परिवर्तन का बड़ा लाभार्थी बना है। उन्होंने बताया कि राज्य के 38 में से 36 जिले रेल नेटवर्क से जुड़ चुके हैं और शेष दो जिलों को जोड़ने का कार्य भी तेजी से चल रहा है। केंद्र सरकार हर वर्ष बिहार की रेल परियोजनाओं पर लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जबकि राज्य में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाएं संचालित हैं। बुलेट ट्रेन से पटना-दिल्ली की दूरी होगी और कम मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली और पटना के बीच बुलेट ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके शुरू होने के बाद पटना से दिल्ली की यात्रा करीब सवा चार घंटे में पूरी हो सकेगी। यह ट्रेन आगे सिलीगुड़ी तक जाएगी, जिससे बिहार के लोगों को और अधिक सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से अब तक मढ़ौरा में 835 से अधिक आधुनिक रेलवे इंजन बनाए जा चुके हैं, जिन्हें देश और विदेश में भेजा गया है। यह बिहार की तकनीकी क्षमता और कुशल मानव संसाधन का प्रमाण है। इससे राज्य को जीएसटी के रूप में भी बड़ा राजस्व प्राप्त हो रहा है।