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नई दिल्ली। हर साल फसल कटाई के बाद देश के लाखों किसान एक जैसी परेशानी का सामना करते हैं। खेत में मेहनत से तैयार की गई फसल जब मंडी पहुंचती है तो कई बार कीमतें इतनी गिर जाती हैं कि किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। खासकर मूंग, उड़द और मूंगफली जैसी फसलों के मामले में यह समस्या और ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे में जब सरकार बड़े पैमाने पर इन फसलों की खरीद करने का फैसला करती है तो इसका मतलब केवल सरकारी खरीद नहीं होता बल्कि किसानों को उनकी मेहनत की बेहतर कीमत मिलने का भरोसा भी मिलता है। शिवराज सिंह चौहान की मंजूरी से खुला खरीद का रास्ता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत चार राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और हरियाणा में मूंग, उड़द और मूंगफली की बड़े पैमाने पर खरीद को मंजूरी दी है। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ दिलाना और बाजार में कीमतें गिरने की स्थिति में उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाना है। क्यों जरूरी है सरकारी खरीद फसल कटाई के समय अक्सर बाजार में आवक बढ़ जाती है और कीमतों पर दबाव बनता है। ऐसे में कई किसानों को अपनी उपज एमएसपी से कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। छोटे किसानों के पास लंबे समय तक भंडारण की सुविधा भी नहीं होती। सरकारी खरीद की व्यवस्था ऐसे समय में सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और किसानों को उनकी फसल का तय मूल्य दिलाने में मदद करती है। उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ इस पहल का सबसे बड़ा फायदा उत्तर प्रदेश के किसानों को होगा। राज्य में ग्रीष्मकालीन सीजन 2026 के लिए 48,298 मीट्रिक टन मूंग, 97,970 मीट्रिक टन उड़द और 41,718 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद की जाएगी। एमएसपी के आधार पर इस खरीद का कुल मूल्य 1490 करोड़ रुपये से अधिक है। यह सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा नहीं है बल्कि हजारों किसानों के लिए इस बात की गारंटी है कि उनकी उपज का बड़ा हिस्सा एमएसपी पर खरीदा जा सकेगा। गुजरात के मूंग किसानों को 160 करोड़ रुपये से अधिक का सहारा गुजरात में 18250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद को मंजूरी मिली है। इस खरीद का कुल एमएसपी मूल्य 160 करोड़ रुपये से अधिक होगा। इससे राज्य के किसानों को बाजार में कम कीमत मिलने की चिंता से राहत मिलेगी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। तमिलनाडु में बढ़ी खरीद सीमा तमिलनाडु के किसानों के लिए भी अच्छी खबर है। राज्य में मूंग खरीद की सीमा 885 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 990 मीट्रिक टन कर दी गई है। यानी अब अतिरिक्त 105 मीट्रिक टन मूंग की खरीद होगी। इस खरीद का कुल एमएसपी मूल्य 8.68 करोड़ रुपये है, जिससे अधिक किसानों को सरकारी खरीद का लाभ मिल सकेगा। हरियाणा के किसानों को भी मिलेगा एमएसपी का सुरक्षा कवच हरियाणा में ग्रीष्मकालीन सीजन 2026 के लिए 2115 मीट्रिक टन मूंग की खरीद को मंजूरी दी गई है। इस खरीद का कुल एमएसपी मूल्य 18 करोड़ रुपये से अधिक है। इससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। फायदा सिर्फ किसान को नहीं, पूरे गांव को होगा जब किसान की जेब में ज्यादा पैसा आता है तो उसका असर पूरे गांव की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। किसान बेहतर बीज खरीदता है, कृषि उपकरणों में निवेश करता है, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों पर खर्च बढ़ाता है। इससे स्थानीय बाजारों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम भारत लंबे समय से खाद्य तेलों और कुछ दालों के आयात पर निर्भर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसानों को मूंग, उड़द और मूंगफली जैसी फसलों का लाभकारी मूल्य मिलेगा तो वे इनकी खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे देश में उत्पादन बढ़ सकता है और आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।



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