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बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ईओएस-05 उपग्रह की तीसरी और अंतिम कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया सोमवार रात 8:57 बजे सफलतापूर्वक पूरी कर ली, जिसमें पेरिजी यानी पृथ्वी से उपग्रह की कक्षा के सबसे नजदीकी बिंदु को बढ़ाने के लिए एलएएम इंजन 1247 सेकंड तक चलाया गया और इसके बाद उपग्रह की अनुमानित कक्षा 34,903 x 35,884 किलोमीटर हो गई। रात 8:57 बजे पूरा हुआ आखिरी बड़ा मैनूवर इसरो ने बताया कि ईओएस-05 की तीसरी और अंतिम कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया 7 सितंबर 2026 को रात 8:57 बजे सफलतापूर्वक पूरी हुई। इस प्रक्रिया का मुख्य मकसद उपग्रह की कक्षा के पेरिजी को बढ़ाना था। आसान शब्दों में कहें तो पेरिजी वह बिंदु होता है, जहां अपनी कक्षा में घूमता उपग्रह पृथ्वी के सबसे करीब होता है। 20 मिनट 47 सेकंड तक चला एलएएम इंजन अंतिम कक्षा-वृद्धि के दौरान ईओएस-05 का एलएएम यानी लिक्विड एपोजी मोटर इंजन 1,247 सेकंड तक चला यानी करीब 20 मिनट 47 सेकंड की इंजन फायरिंग के जरिए उपग्रह की कक्षा में जरूरी बदलाव किया गया। मैनूवर के बाद ईओएस-05 की अनुमानित कक्षा 34,903 x 35,884 किलोमीटर बताई गई है। इसरो का सबसे अहम अपडेट—‘सैटेलाइट की सेहत सामान्य’ कक्षा बदलने की आखिरी प्रक्रिया के बाद इसरो ने उपग्रह की स्थिति को लेकर भी राहत भरी जानकारी दी है। अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, ईओएस-05 की सेहत सामान्य है यानी प्रक्षेपण से लेकर चरणबद्ध तरीके से कक्षा ऊपर उठाने की प्रक्रिया तक सैटेलाइट फिलहाल सामान्य स्थिति में है। जीएसएलवी-एफ17 से अंतरिक्ष पहुंचा 2,367 किलो का ईओएस-05 गौरतलब है कि ईओएस-05 का वजन 2367 किलोग्राम है और इसे जीएसएलवी-एफ17 के जरिए शुक्रवार तड़के 2:55 बजे अंतरिक्ष में भेजा गया था। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से शुक्रवार तड़के 2:55 बजे जीएसएलवी-एफ17 ने उड़ान भरी थी। उड़ान के करीब 18 मिनट बाद रॉकेट ने ईओएस-05 को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया था। जीएसएलवी की 19वीं उड़ान, श्रीहरिकोटा से 107वां लॉन्च यह मिशन इसरो के लिए कई मायनों में खास रहा। ईओएस-05 को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला जीएसएलवी मिशन इस लॉन्च व्हीकल की 19वीं उड़ान थी, जबकि श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से यह 107वां प्रक्षेपण रहा। इसके बाद उपग्रह की कक्षा को चरणबद्ध तरीके से ऊपर उठाया गया और अब तीसरी तथा अंतिम कक्षा-वृद्धि प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। 36 हजार किलोमीटर ऊपर से धरती पर नजर ईओएस-05 की सबसे बड़ी खासियत उसकी ऊंचाई और इमेजिंग क्षमता है। पूरी तरह सक्रिय होने के बाद यह करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाली जियोसिंक्रोनस कक्षा से धरती की तस्वीरें लेने वाला भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट बनेगा।यही वजह है कि इसे अंतरिक्ष में भारत की नई ‘आंख’ के तौर पर भी पेश किया गया है। विजिबल से हाइपरस्पेक्ट्रल तक, कई तरह की इमेजिंग ईओएस-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। इसमें विजिबल, इंफ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में तस्वीरें लेने की क्षमता बताई गई है। इन क्षमताओं के जरिए पृथ्वी की सतह और उसमें होने वाले बदलावों की व्यापक निगरानी की जा सकेगी। ईओएस-05 से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकेगा। इसका उपयोग कृषि, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक जरूरतों के लिए किए जाने की बात कही गई है। जियोसिंक्रोनस कक्षा से लगातार निगरानी की क्षमता के कारण यह देश को महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराने में भी भूमिका निभाएगा। लॉन्च के बाद खुल चुका है सोलर पैनल ईओएस-05 की शुरुआती स्थिति भी सामान्य बताई गई थी। सैटेलाइट से मिले डेटा के मुताबिक, उसके सभी वाल्व सही तरीके से काम कर रहे थे और उसका सोलर पैनल सफलतापूर्वक खुल गया था। अब तीसरी और अंतिम कक्षा-वृद्धि प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसरो ने एक बार फिर साफ किया है कि सैटेलाइट की स्थिति सामान्य है। दो मिशनों की विफलता के बाद अहम सफलता ईओएस-05 की सफलता इसरो के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण बताई गई है क्योंकि इससे पहले 12 जनवरी 2026 को ईओएस-एन1 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लेकर गया पीएसएलवी-सी62 मिशन सफल नहीं हुआ था। इससे पहले 18 मई 2025 को पीएसएलवी-सी61 मिशन भी विफल हुआ था। लगातार दो मिशनों की विफलता के बाद इसरो ने सावधानी बरती और लॉन्च गतिविधियों से कुछ समय दूरी बनाए रखी। ऐसे में ईओएस-05 की सफल उड़ान और अब उसकी अंतिम कक्षा-वृद्धि का सफल होना अंतरिक्ष एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। 1,536 किलो से 2,367 किलो तक बढ़ी जीएसएलवी की क्षमता जीएसएलवी की बढ़ती क्षमता भी इस मिशन की एक अहम कहानी है। पहली जीएसएलवी-डी1 उड़ान में 1,536 किलोग्राम का पेलोड था, जबकि अब इसी लॉन्च व्हीकल के जरिए 2,367 किलोग्राम वजनी ईओएस-05 को अंतरिक्ष में पहुंचाया गया है। इसरो के मुताबिक, संरचनात्मक वजन को बेहतर बनाने और प्रणोदन प्रणाली में सुधार के जरिए जीएसएलवी की क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया गया है। एक नजर में ईओएस-05 का ताजा अपडेट उपग्रह: ईओएस-05 अंतिम प्रक्रिया: तीसरी कक्षा-वृद्धि तारीख: 7 सितंबर 2026 समय: रात 8:57 बजे एलएएम इंजन फायरिंग: 1,247 सेकंड अनुमानित कक्षा: 34,903 x 35,884 किलोमीटर उपग्रह की स्थिति: सामान्य वजन: 2,367 किलोग्राम लॉन्च व्हीकल: जीएसएलवी-एफ17 जीएसएलवी की उड़ान: 19वीं श्रीहरिकोटा से लॉन्च: 107वां ईओएस-05 की तीसरी और अंतिम कक्षा-वृद्धि प्रक्रिया सफल होने के साथ अब भारत की यह नई अंतरिक्ष ‘आंख’ करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से पृथ्वी की निगरानी करने की दिशा में एक और अहम पड़ाव पार कर चुकी है।