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नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक के दोषियों के लिए फास्ट ट्रैक अदालत, कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान करने वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी दे दी, जिसे संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित कानून में पेपर लीक के आरोपियों के मामलों की फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनवाई का प्रावधान किया गया है, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। इसके अलावा कानून में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। सूत्रों की मानें तो इस संबंध में बनने वाले कानून में पेपर लीक मामले के दोषियों को 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान किया जाएगा। मोदी बोले- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को नहीं बख्शेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा था कि पेपर लीक के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। बाद में वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री ने बताया था कि सरकार सख्त कानून का मसौदा मंत्रिमंडल के सामने रखेगी और इसे संसद के इसी सत्र में लाने की कोशिश करेगी। संसद में भी बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा नीट-यूजी पेपर लीक के बाद देशभर में छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं, विपक्ष ने भी इस मुद्दे को संसद के मानसून सत्र का प्रमुख मुद्दा बना दिया है। विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार इसे स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। पहले सप्ताह नहीं चल सकी संसद पेपर लीक विवाद को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव इतना बढ़ गया कि मानसून सत्र के पहले सप्ताह में संसद के दोनों सदनों में कोई खास कामकाज नहीं हो सका। अब सरकार सख्त कानून लाकर इस मुद्दे पर अपना रुख और स्पष्ट करने की तैयारी में है।