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काठमांडू/मोतिहारी। नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंजर पैदा किया है, जिसका पैमाना हर घंटे और भयावह होता जा रहा है। रविवार दोपहर दो बजे तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 768 हो गई जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2715 लोग बचाए गए या घायल हुए हैं और 25 पुलिसकर्मी अब भी लापता हैं।मौतों का आंकड़ा जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसने नेपाल की इस आपदा को हाल के वर्षों की सबसे गंभीर त्रासदियों में शामिल कर दिया है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने रविवार दोपहर एक बजे 752 मौतों और 2502 लोगों के लापता होने की पुष्टि की थी। इसके महज एक घंटे बाद नेपाल पुलिस ने मृतकों की संख्या 768 होने की जानकारी दी। यानी केवल एक घंटे में ही 16 और मौतों की पुष्टि हुई। चितवन में सबसे अधिक तबाही, सैकड़ों शव बरामद नेपाल पुलिस के अनुसार प्रभावित जिलों से बड़ी संख्या में शव और मानव अवशेष बरामद किए गए हैं। दोपहर दो बजे तक चितवन में 264, नवलपरासी बरदघाट सुस्ता पूर्व में 194, नवलपरासी बरदघाट सुस्ता पश्चिम में 100, गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धादिंग में 50, तनाहुन में 37 और रसुवा में 13 शव बरामद किए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि भोटेकोशी की बाढ़ का असर केवल नदी किनारे बसे इलाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेज बहाव के साथ दूर-दराज के जिलों तक मानवीय त्रासदी फैल गई है। 2502 लोग अब भी लापता, 287 भारतीय भी शामिल एनडीआरआरएमए के दोपहर एक बजे के अपडेट के मुताबिक 2,502 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 933 कर्मचारी, 589 विदेशी नागरिक, विदेशी पर्यटकों के साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली, रसुवा के 562 स्थानीय निवासी, नुवाकोट के 115, मकवानपुर के 65 और लांगटांग राष्ट्रीय उद्यान के तीन लोग शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी एवं सुरक्षा एजेंसियों के कर्मी भी लापता बताए गए हैं। नेपाली सूत्रों के अनुसार लापता विदेशी नागरिकों में 287 भारतीय नागरिक शामिल हैं। यह आंकड़ा भारत के लिए भी चिंता का विषय बन गया है और लापता भारतीयों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। 8730 लोगों को सुरक्षित निकाला गया आपदा के बीच नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। करीब 19,895 सुरक्षा बलों को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया गया है। सुरक्षा बलों ने अब तक 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला है। हेलीकॉप्टर अभियानों के जरिए जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे 279 श्रमिकों और 227 विदेशी नागरिकों को भी एयरलिफ्ट किया गया है। काठमांडू घाटी के विभिन्न अस्पतालों में 160 घायल पीड़ितों का इलाज चल रहा है या उन्हें उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। सुरंगों में जिंदगी की तलाश, ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही सबसे चुनौतीपूर्ण बचाव अभियानों में से एक अपर त्रिशुली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का है। नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने बताया कि सुरंग में बचाव दल के प्रवेश के लिए छेद किया गया है और उसके जरिए ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है। मंत्री ने सुरंग में फंसे लोगों के परिजनों से बातचीत के दौरान कहा कि तकनीशियन सुरंग में प्रवेश के लिए बनाए गए छेद को बड़ा करने में जुटे हैं। सरकार ने बचाव अभियान के लिए आवश्यक तकनीकी और अन्य संसाधन तैयार रखने का दावा किया है। केरंग में भी करीब 1000 नेपाली फंसे नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रविवार को नुवाकोट के बिदुर नगरपालिका-1 के धुंगे पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केरंग में करीब 1,000 नेपाली नागरिक फंसे हुए हैं। सरकार उन्हें वैकल्पिक मार्गों से नेपाल वापस लाने की तैयारी कर रही है। 37 ट्रक और हेलीकॉप्टरों से पहुंचाई जा रही राहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने का अभियान भी तेज कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार 37 ट्रकों और सात हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाद्य एवं गैर-खाद्य सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचाई जा रही है। विशेष शल्य चिकित्सा दलों को भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। इसके अलावा प्रभावित स्थानीय निकायों में सरकारी नकद राहत राशि वितरित की जा रही है, ताकि आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता मिल सके। हर घंटे बदल रही तस्वीर भोटेकोशी बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब लापता लोगों की तलाश और दुर्गम इलाकों तक राहत पहुंचाना है। कई स्थानों पर बाढ़ के तेज बहाव ने सड़क संपर्क और बुनियादी ढांचे को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। इससे बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। मृतकों की बरामदगी, अस्पतालों में घायलों की बढ़ती संख्या और हजारों लोगों के अब भी लापता होने के बीच आपदा की वास्तविक भयावहता लगातार सामने आ रही है। रविवार दोपहर तक सामने आए आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि भोटेकोशी की बाढ़ केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नेपाल के लिए गहरे मानवीय संकट में बदल चुकी है।



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