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न्यूयॉर्क: मेटलाइफ स्टेडियम में रविवार देर रात फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर रोमांच अपने चरम पर था, मुकाबला पेनल्टी शूटआउट की ओर बढ़ता दिख रहा था तभी मैदान पर उतरे सब्स्टीट्यूट फेरान टोरेस ने 106वें मिनट में ऐसी जोरदार वॉली जमाई जिसने इतिहास बदल दिया। स्पेन ने मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 16 साल बाद दूसरी बार फीफा विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया जबकि लियोनेल मेसी का लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया। 120 मिनट तक चला रोमांच, एक गोल ने बदल दी कहानी फाइनल की शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और अर्जेंटीना के गोल पर लगातार हमले किए। हालांकि गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने एक के बाद एक शानदार बचाव कर मुकाबले को बराबरी पर बनाए रखा। दूसरी ओर अर्जेंटीना ने मजबूत रक्षापंक्ति के दम पर स्पेन को लगातार रोके रखा। 90 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं और मैच अतिरिक्त समय में पहुंच गया। रेड कार्ड बना टर्निंग पॉइंट निर्धारित समय के स्टॉपेज टाइम में अर्जेंटीना को सबसे बड़ा झटका लगा। मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज को पाउ कुबारसी पर खतरनाक टैकल के लिए सीधा रेड कार्ड दिखा दिया गया। इसके बाद अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय में 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। यहीं से स्पेन ने मैच पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया और अर्जेंटीना को उसके ही हाफ में धकेल दिया। टोरेस आए... और बन गए हीरो अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ की शुरुआत हुए महज 37 सेकंड ही हुए थे कि पेड्रो पोरो ने शानदार क्रॉस भेजा। निको विलियम्स ने बेहतरीन टच से गेंद फेरान टोरेस के सामने रख दी। टोरेस ने बिना समय गंवाए पहली ही कोशिश में दमदार वॉली लगाई और गेंद एमिलियानो मार्टिनेज की पहुंच से दूर नेट के ऊपरी हिस्से में जा समाई। 106वें मिनट का यह गोल स्पेन के लिए विश्व कप जिताने वाला गोल साबित हुआ और पूरा मेटलाइफ स्टेडियम स्पेनिश समर्थकों के जश्न से गूंज उठा। वीएआर ने छीनी दूसरी खुशी टोरेस ने सात मिनट बाद एक और गोल कर स्पेन की बढ़त दोगुनी कर दी थी, लेकिन इस बार ऑफसाइड फ्लैग उठ गया। वीएआर जांच के बाद गोल रद्द कर दिया गया और अर्जेंटीना की उम्मीदें जिंदा रहीं। मेसी ने आखिरी दम तक नहीं मानी हार एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद अर्जेंटीना ने अंत तक हार नहीं मानी। कप्तान लियोनेल मेसी ने लगातार हमले किए और बराबरी की हर संभव कोशिश की। 117वें मिनट में मेसी का खतरनाक शॉट लगभग गोल में बदलने वाला था, लेकिन मिकेल मेरिनो ने अपने चेहरे से गेंद रोककर स्पेन को बराबरी से बचा लिया। इस दौरान उन्हें इलाज भी कराना पड़ा। स्टॉपेज टाइम में मेसी की शानदार फ्री-किक पर अर्जेंटीना को आखिरी कॉर्नर मिला, लेकिन अंतिम कोशिश भी क्रॉसबार के ऊपर निकल गई और स्पेन ने राहत की सांस ली। मार्टिनेज ने बचाए कई गोल, लेकिन एक गलती भारी पड़ी अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने पूरे मैच में कई बेहतरीन बचाव किए और टीम को 100 मिनट से ज्यादा मुकाबले में बनाए रखा। हालांकि टोरेस की सटीक वॉली के सामने वह भी बेबस नजर आए। नॉकआउट में दिग्गजों को हराकर चैंपियन बना स्पेन स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। नॉकआउट चरण में उसने पुर्तगाल, बेल्जियम, फ्रांस और आखिर में अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीमों को हराकर विश्व फुटबॉल की नई बादशाहत हासिल की। 2010 में आंद्रेस इनिएस्ता ने अतिरिक्त समय में गोल कर स्पेन को पहला विश्व कप दिलाया था और अब 2026 में फेरान टोरेस ने उसी अंदाज में इतिहास दोहरा दिया। टोरेस ने रचा इतिहास विश्व कप फाइनल में गोल करने वाले केवल *पांचवें सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी** बने। * 2014 में मारियो गोट्ज़े के बाद अतिरिक्त समय में फाइनल का विजयी गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बने। * आंद्रेस इनिएस्ता के बाद विश्व कप फाइनल में गोल करने वाले दूसरे बार्सिलोना खिलाड़ी बने। मेसी का सपना टूटा, स्पेन का सुनहरा दौर लौटा लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना पूरा नहीं कर सके। दूसरी ओर स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अपने आक्रामक खेल, मिडफील्ड पर शानदार नियंत्रण और मजबूत रक्षापंक्ति के दम पर साबित कर दिया कि इस बार विश्व फुटबॉल का असली बादशाह वही है। मैच का नतीजा: स्पेन 1-0 अर्जेंटीना (अतिरिक्त समय) गोल: फेरान टोरेस (106') चैंपियन: स्पेन (दूसरा फीफा विश्व कप खिताब)



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