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नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को कॉलेज छात्रों के पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही बेसमेंट समेत पांच मंजिला पुरानी इमारत के ढहने से तीन लोगों की दबकर मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए जबकि हादसे के समय भवन में करीब 40 से 50 लोगों के मौजूद होने के प्रारंभिक अनुमान के बीच एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस और दमकल समेत विभिन्न एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चला रही हैं। दोपहर 1:34 बजे मिली इमारत गिरने की सूचना पुलिस के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 1 बजकर 34 मिनट पर साउथ कैंपस थाने को सत्य निकेतन मार्केट में एक इमारत गिरने की सूचना मिली। पुलिस और दूसरी राहत एजेंसियों की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया गया। स्थानीय जांच में पता चला कि इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी के रूप में किया जा रहा था। घटना के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। एम्स पहुंचे सात लोग, तीन की मौत एम्स ट्रॉमा सेंटर के मुताबिक, हादसे के बाद सात लोगों को अस्पताल लाया गया , जिनमें से तीन को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। एक अन्य घायल को इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। वहीं, पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना में कहा गया कि अब तक छह लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। अलग-अलग एजेंसियों की शुरुआती सूचनाओं में बचाए गए और अस्पताल पहुंचाए गए लोगों की संख्या अलग-अलग सामने आई है, जबकि राहत और तलाशी अभियान जारी है। इमारत में 40 से 50 लोगों के होने का प्रारंभिक अनुमान हादसे के समय इमारत में कितने लोग मौजूद थे और कितने अब भी मलबे में फंसे हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने 15 से ज्यादा लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई, जबकि मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक हादसे के वक्त इमारत में करीब 40 से 50 लोग मौजूद हो सकते हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि मलबे में फंसे लोगों की वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। एनडीआरएफ से पुलिस तक, कई एजेंसियां बचाव में जुटीं हादसे की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया है। इसमें दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और सेंट्रलाइज्ड एक्सीडेंट एंड ट्रॉमा सर्विसेज (कैट्स) की टीमें शामिल हैं। मौके पर आठ दमकल गाड़ियां और 17 एंबुलेंस तैनात की गईं। बचावकर्मी कंक्रीट और मलबे की परतों को हटाकर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। तेज धमाका हुआ तो लोगों को लगा भूकंप आ गया प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि इतनी तेज आवाज हुई कि शुरुआत में आसपास मौजूद लोगों को लगा कि शायद भूकंप आया है। कुछ ही पलों में घटनास्थल के आसपास धूल और धुएं का बड़ा गुबार छा गया। इसके बाद लोगों को समझ आया कि इमारत ढह गई है। मलबे के नीचे से सुनाई दे रही थीं मदद की आवाजें एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, मलबे के नीचे दबे लोगों की मदद के लिए आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। बचावकर्मियों ने मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शी ने इनमें चार बच्चों के भी शामिल होने की बात कही। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने ढही इमारत की पहचान ‘हॉस्टल डेज’ नाम के लड़कों के पीजी के रूप में की। उसने दावा किया कि हादसे में पास की एक अन्य संरचना को भी नुकसान पहुंचा और कमरों में मौजूद कुछ छात्र मलबे में दब गए। कैट्स की शुरुआती रिपोर्ट में 25 से 30 लोगों के हताहत होने की आशंका कैट्स के नोडल अधिकारी बलराज सिंह ने बताया कि पांच लोगों को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। उनके मुताबिक, शुरुआती रिपोर्टों में हादसे में 25 से 30 लोगों के हताहत होने की आशंका जताई गई है। हालांकि यह शुरुआती आकलन है और अधिकारियों ने मलबे में फंसे या कुल हताहत लोगों की अंतिम संख्या की अभी पुष्टि नहीं की है। कॉलेज छात्रों का बड़ा ठिकाना है सत्य निकेतन सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित घनी आबादी वाला इलाका है। यहां बड़ी संख्या में कॉलेज छात्र पीजी, हॉस्टल और किराये के मकानों में रहते हैं। हादसे का शिकार हुई इमारत में भी कॉलेज छात्रों के रहने की जानकारी दी गई है। इसी वजह से हादसे के बाद मलबे में फंसे लोगों की संख्या को लेकर चिंता और बढ़ गई है। कंक्रीट की परतों के बीच जिंदगी तलाश रहे बचावकर्मी राहत दलों की पहली प्राथमिकता मलबे में किसी भी जीवित व्यक्ति तक जल्द से जल्द पहुंचना है। बचावकर्मी कंक्रीट और मलबे को सावधानी से हटाकर लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या बताना संभव नहीं है। ऐसे में पूरा जोर जीवित लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने पर है।