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पटना/बीजिंग। बिहार के उभरते एथलीट सेतु मिश्रा ने चीन में चल रही एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारतीय 4x400 मीटर मिक्स्ड रिले टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर राज्य को एशियाई स्तर की एथलेटिक्स में पहला गोल्ड दिलाते हुए इतिहास रच दिया। बिहार के खेल इतिहास में यह पल हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। बिहार के उभरते एथलीट सेतु मिश्रा ने एशियाई स्तर पर राज्य को एथलेटिक्स में पहला गोल्ड मेडल दिलाकर इतिहास रच दिया। चीन में चल रही एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत की 4x400 मीटर मिक्स्ड रिले टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के बड़े हीरो बने बिहार के सेतु मिश्रा, जिन्होंने दबाव भरे मुकाबले में शानदार एंकर लेग दौड़ते हुए भारत को जीत की राह पर बनाए रखा और मेजबान चीन की कड़ी चुनौती के बीच टीम की बढ़त को संभाले रखा। हाई-वोल्टेज फाइनल में भारत ने चीन को पछाड़ा 4x400 मीटर मिक्स्ड रिले का फाइनल पूरी तरह रोमांच, स्पीड और दबाव से भरा रहा। एक तरफ मेजबान चीन की मजबूत चुनौती थी तो दूसरी ओर भारतीय टीम के सामने गोल्ड जीतने का बड़ा मौका। ऐसे में भारतीय क्वार्टेट ने जबरदस्त तालमेल, संतुलन और रफ्तार दिखाई। आखिरी क्षणों तक चले इस मुकाबले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए पोडियम के सबसे ऊंचे स्थान पर कब्जा जमा लिया। सेतु मिश्रा ने दिखाई दमदार रफ्तार, बने जीत के गेमचेंजर इस ऐतिहासिक जीत का सबसे चमकदार चेहरा रहे सेतु मिश्रा । बिहार के इस युवा धावक ने एंकर लेग में जब बैटन संभाली, तब मुकाबला बेहद कड़ा था। लेकिन, सेतु ने जिस आत्मविश्वास, गति और संयम के साथ दौड़ लगाई, उसने भारत की उम्मीदों को टूटने नहीं दिया। चीनी धावकों के दबाव के बीच उन्होंने शानदार तरीके से रफ्तार बनाए रखी और टीम को जीत के बेहद करीब पहुंचा दिया। उनकी यह दौड़ अब बिहार के खेल इतिहास की सबसे यादगार दौड़ों में गिनी जाएगी। रांची से एशियन गोल्ड तक: ऐसे बनी सेतु मिश्रा की पहचान सेतु मिश्रा की इस ऐतिहासिक सफलता की नींव इसी साल रांची में आयोजित सीनियर फेडरेशन कप एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रखी गई थी, जहां उन्होंने 400 मीटर दौड़ 46.29 सेकेंड में पूरी कर अपना पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन किया था। इसी शानदार टाइमिंग के दम पर उन्होंने अंडर-23 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। अब उसी लय और मेहनत को एशियाई मंच पर गोल्ड में बदलकर सेतु ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ उभरते एथलीट नहीं, बल्कि बिहार के नए ट्रैक स्टार हैं। बिहार के लिए क्यों खास है यह गोल्ड? यह सिर्फ भारत के लिए एक गोल्ड मेडल नहीं बल्कि बिहार के लिए एथलेटिक्स में एशियाई स्तर का पहला गोल्ड है। यही वजह है कि सेतु मिश्रा की यह उपलब्धि बिहार के खेल इतिहास में मील का पत्थर मानी जा रही है। लंबे समय से बड़े खेल मंचों पर पहचान बनाने की कोशिश कर रहे बिहार के लिए यह जीत एक नई उम्मीद, नया आत्मविश्वास और नई पहचान लेकर आई है। एक गोल्ड, कई बड़े संदेश सेतु मिश्रा की यह जीत सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं है, बल्कि यह मेहनत, धैर्य, स्पीड और बिहार की नई खेल पहचान की कहानी है। चीन की धरती पर भारत का तिरंगा सबसे ऊपर पहुंचाने वाली इस रिले टीम में बिहार के बेटे की अहम भूमिका ने पूरे राज्य को जश्न मनाने का मौका दे दिया है। यह गोल्ड साफ संकेत है कि अब बिहार के खिलाड़ी सिर्फ भाग लेने नहीं, बल्कि इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतर रहे हैं।



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