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पटना। बिहार की तीन पारंपरिक कलाओं नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग को जीआई टैग मिलने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुशी जताते हुए कहा कि इससे राज्य की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया में नई पहचान मिलेगी। वैश्विक स्तर पर मिलेगी बिहार की कला और शिल्प को नई पहचान श्री चौधरी ने शनिवार को कहा कि जीआई टैग मिलने से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला-कौशल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे इन उत्पादों की विशिष्टता को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा और वैश्विक बाजार में उनकी अलग पहचान स्थापित होगी। कारीगरों और बुनकरों की वर्षों की मेहनत का मिला सम्मान मुख्यमंत्री ने कहा कि नालंदा की बावन बूटी बुनकरी, गया की पत्थर शिल्पकला और भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग बिहार की सांस्कृतिक विविधता और सृजनात्मक परंपरा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। जीआई टैग इन क्षेत्रों से जुड़े कारीगरों और बुनकरों के वर्षों के परिश्रम, कौशल और समर्पण का सम्मान है। नाबार्ड और संबंधित संस्थाओं के प्रयासों की सराहना श्री चौधरी ने इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), संबंधित विभागों, उत्पादक समूहों, शिल्पकार संगठनों और अन्य हितधारकों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से उन महिला कलाकारों, बुनकरों और कारीगरों को बधाई दी, जिन्होंने पीढ़ियों से इन परंपरागत कलाओं को जीवित रखा है। रोजगार और स्वरोजगार के बढ़ेंगे अवसर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक उद्योगों, हस्तशिल्प, हथकरघा और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल श्री चौधरी ने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि बिहार के अन्य पारंपरिक उत्पादों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को और मजबूती मिलेगी। बिहार के लिए गर्व का क्षण मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है और राज्य की समृद्ध परंपराओं को दुनिया के सामने नई पहचान दिलाने वाला कदम है।



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