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(संजय कौशिक की विशेष रिपोर्ट) काठमांडू/मोतिहारी। नेपाल की धरती पर भोटेकोशी नदी ने 26 अगस्त को जो कहर बरपाया, उसका पानी भले उतरने लगा हो, लेकिन उन परिवारों की बेचैनी नहीं, जिनके अपने विनाशकारी बाढ़ के बाद से दिखाई नहीं दिए हैं। तबाही की लहरें अब भी हजारों परिवारों के भीतर उमड़ रही हैं। नदी के उफान में बह गए घरों, पुलों और बस्तियों के बीच अब सबसे बड़ी तलाश उन चेहरों की है, जिनके लौटने की उम्मीद में परिजन नदी किनारे, अस्पतालों और राहत शिविरों के आसपास आंखें बिछाए बैठे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, शनिवार शाम चार बजे तक भोटेकोशी बाढ़ से संबंधित 669 शव बरामद किए जा चुके हैं। 2301 घायल लोगों को बचाया गया है जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। मलबे में दबे लोगों को लेकर आधिकारिक आंकड़े लगातार बदल रहे हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए हर बीतता घंटा उम्मीद और आशंका के बीच झूल रहा है। भोटेकोशी का उफान अपने साथ पानी के अलावा चट्टानें, कीचड़, बर्फ और भारी मलबा लेकर आया था। कई इलाकों में 30 फीट से अधिक गाद और पत्थरों का मलबा जमा हो गया है। बचाव दल मशीनों से मलबा हटा रहे हैं, जबकि परिजन हर हटते पत्थर के साथ किसी जीवित व्यक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्हें किसी चमत्कार का इंतजार है, शायद किसी पत्थर के पीछे से कोई आवाज आए, शायद मलबे के नीचे से कोई हाथ दिखाई दे, शायद कोई अपना लौटकर कह दे कि वह जिंदा है। भोटेकोशी नदी के किनारे शनिवार को भी लोग मलबे को घूर रहे थे। किसी के हाथ में अपने परिजन की तस्वीर थी, किसी की आंखें राहत शिविरों में टिकी थीं और कोई सरकारी सूची में अपनों नाम ढूंढ रहा था। इनकी उम्मीद अभी भी बची है कि टनों गाद और पत्थरों के मलबे के नीचे से अभी कोई निकलेगा और कहेगा, "मैं जिंदा हूं।" इनकी उम्मीद के भी अपने तर्क हैं, "जब तक हमें उनका पता नहीं चलता, हम यह कैसे मान लें कि वे नहीं रहे?" ऐसी उम्मीद उन परिवारों को नदी किनारे रोके हुए है, हालांकि हर गुजरते दिन के साथ इस उम्मीद की जमीन कमजोर होती जा रही है। हर संख्या के पीछे एक घर है, परिवार है बरामद शवों में 248 चितवन, 158 पूर्व नवलपरासी (नवलपुर), 75 पश्चिम नवलपरासी (परासी), 54 गोरखा, 49 धाडिंग, 41 नुवाकोट, 31 तनाहुन और 13 रसुवा से मिले हैं। ये महज आंकड़े नहीं हैं। हर संख्या के पीछे किसी मां की गोद, किसी बच्चे की प्रतीक्षा, किसी पत्नी का सुहाग, किसी पिता का सहारा और किसी परिवार का पूरा संसार छिपा है। सरकारी रजिस्टर में बढ़ता एक अंक किसी घर में हमेशा के लिए घट गई एक आवाज का प्रतीक है। आपदा की भयावहता के बीच बचाव दलों के सामने चुनौती सिर्फ मलबा हटाने की नहीं, बल्कि उस मलबे के नीचे दबे रिश्तों और उम्मीदों को खोजने की भी है। बाढ़ ने कई परिवारों से उनके प्रियजन ही नहीं छीने, बल्कि उनके घर और आजीविका के साधन भी बहा दिए। जिन लोगों को बचा लिया गया है, उनमें से कई अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं, जबकि हजारों परिवार अब भी यह जानने की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके अपने जीवित हैं या नहीं। बचाव अभियान में 4854 पुलिसकर्मी नेपाल पुलिस ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 4,854 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। इनमें से 27 पुलिसकर्मी अभी भी संपर्क से बाहर हैं। घायलों में 1,622 नुवाकोट, 676 रसुवा और तीन धाडिंग में हैं। काठमांडू घाटी के विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे 140 घायलों को छुट्टी दी जा चुकी है। बचावकर्मियों के लिए चुनौती भी असाधारण है। जगह-जगह जमा मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल तथा नदी के बदलते प्रवाह ने प्रभावित इलाकों तक पहुंच को कठिन बना दिया है। आपदा अब पुनर्निर्माण की चुनौती बन चुकी है नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले का आकलन है कि चीन से लगी उत्तरी सीमा के पास आई इस विनाशकारी हिमनदीय बाढ़ के बाद देश को पुनर्निर्माण के लिए 4 से 5 अरब अमेरिकी डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। बाढ़ ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। स्कूल, अस्पताल, जलविद्युत परियोजनाएं और करीब दो दर्जन पुल प्रभावित हुए हैं। चट्टान, कीचड़ और बर्फ के तेज बहाव ने कई इलाकों में सामान्य जीवन की पूरी संरचना को तहस-नहस कर दिया। नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने कहा है कि देश विदेशी सहयोगियों से विशेषीकृत तकनीकी सहायता मांग रहा है, जबकि घरेलू सुरक्षा और राहत बल खोज एवं बचाव अभियान में लगे हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार सरकार ने भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित स्थानीय सरकारों के लिए 67.5 मिलियन नेपाली रुपये यानी 6.75 करोड़ नेपाली रुपये जारी किए हैं। प्राधिकरण की कार्यकारी समिति की 35वीं बैठक में क्षति की गंभीरता के आधार पर रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और तनहु की 15 प्रभावित स्थानीय इकाइयों को अनुदान देने का निर्णय लिया गया। तत्काल राहत जिला आपदा प्रबंधन समितियों के माध्यम से वितरित की जाएगी। सरकार का कहना है कि वित्तीय सहायता का उद्देश्य स्थानीय बचाव कार्यों को तेज करना और प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाना है। पानी उतर रहा है, इंतजार नहीं आपदा के बाद की सबसे कठिन तस्वीर शायद वही है जो कैमरों में दर्ज नहीं होती। नदी किनारे बैठा वह व्यक्ति, जो घंटों से एक ही दिशा में देख रहा है; अस्पताल के बाहर खड़ा वह परिवार, जो हर एंबुलेंस के साथ उम्मीद से उठ खड़ा होता है, और राहत शिविर में वह बच्चा, जो अब भी अपने माता-पिता के लौटने का इंतजार कर रहा है। भोटेकोशी का पानी धीरे-धीरे पीछे हट रहा है। लेकिन अपने पीछे छोड़ गया मलबा सिर्फ घरों और सड़कों पर नहीं है। वह लोगों की स्मृतियों, रिश्तों और भविष्य पर भी जमा है। नेपाल के सामने अब दो सवाल एक साथ खड़े हैं, मलबे के नीचे कितनी जिंदगियां हैं और मलबा हटने के बाद कितने परिवार अपने जीवन को फिर से खड़ा कर पाएंगे। 669 शव बरामद हो चुके हैं। हजारों घायल बचाए जा चुके हैं। लेकिन जिनके अपने अब भी लापता हैं, उनके लिए यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उनके लिए हर हटता पत्थर एक संभावना है, हर मिलती पहचान एक भय और हर गुजरती शाम एक ऐसी प्रतीक्षा, जिसका कोई निश्चित अंत नहीं। भोटेकोशी ने नेपाल से बहुत कुछ छीन लिया है। अब नदी के किनारे खड़े लोग उससे सिर्फ एक चीज चाहते हैं, लापता अपनों की सकुशल वापसी। लापता लोगों के परिजनों की आंखों में अब भी उम्मीद की एक पतली-सी लौ जल रही है। उन्हें अब भी भरोसा है कि लाखों क्यूसेक पानी के वेग और 30 फुट से अधिक गाद, पत्थरों और मलबे के नीचे शायद किसी की सांस बची हो। इस उम्मीद का कोई वैज्ञानिक आधार हो या न हो, लेकिन जिनके अपने लापता हैं, उनके लिए यही उम्मीद जीवन का सहारा है।



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