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मोकी (चीन)। सानिका चंद्रकांत माने के 17वें मिनट में किए गए निर्णायक गोल और भारतीय रक्षापंक्ति के बेजोड़ प्रदर्शन की बदौलत भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने रविवार को मेजबान चीन को कड़े फाइनल में 1-0 से हराकर एएचएफ महिला जूनियर एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम करने के साथ प्रतियोगिता में खिताबी हैट्रिक पूरी कर ली। चैंपियनों पर पुरस्कारों की बारिश मुकाबले में गोल केवल एक हुआ, लेकिन वही भारत को एशियाई चैंपियन बनाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। भारत ने न सिर्फ अपना महाद्वीपीय खिताब बचाया, बल्कि एफआईएच जूनियर महिला विश्व कप के लिए भी योग्यता हासिल कर ली। भारतीय टीम की उपलब्धि के बाद हॉकी इंडिया ने खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के लिए पुरस्कार राशि की घोषणा की। टीम की प्रत्येक खिलाड़ी को तीन लाख रुपये और सहयोगी स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को डेढ़ लाख रुपये दिए जाएंगे। शुरुआती सीटी के साथ तनाव, चीन के पास ज्यादा गेंद फाइनल की शुरुआत संभलकर हुई। खिताबी मुकाबले का दबाव दोनों टीमों के खेल में दिखाई दिया और शुरुआती मिनटों में खिलाड़ी जोखिम लेने से बचती नजर आईं। मेजबान चीन ने गेंद पर अधिक कब्जा रखा और भारतीय टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की। चीन मैदान में आगे जरूर दिखाई दिया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने धैर्य नहीं खोया। भारत की रक्षापंक्ति संगठित रही और उसने चीन को कोई स्पष्ट मौका नहीं बनाने दिया। पहला क्वार्टर बिना गोल के समाप्त हुआ, लेकिन मुकाबले की धार लगातार तेज होती जा रही थी। 17वां मिनट: सानिका ने मौका देखा और इतिहास लिख दिया दूसरा क्वार्टर शुरू हुआ और महज दो मिनट बाद भारत ने वह वार कर दिया, जिसका जवाब चीन पूरे मुकाबले में नहीं खोज सका।सानिका चंद्रकांत माने ने गेंद के बिना शानदार और समझदारी भरी दौड़ लगाई। वह चीनी रक्षक के पीछे से निकलते हुए गोल से करीब पांच मीटर की दूरी पर पहुंच गईं। इसी दौरान चीन के गोल घेरे में भेजे गए लंबे स्लैप-पुश पर सानिका ने बड़ी सफाई से अपनी स्टिक लगाई। उनकी हल्की लेकिन सटीक डिफ्लेक्शन ने गोलकीपर शू मेंगजियाओ को छकाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। भारत 1-0 से आगे था और मुकाबले का सबसे निर्णायक क्षण सामने आ चुका था। चीन का एकमात्र पेनल्टी कॉर्नर, गोल होकर भी नामंजूर बढ़त गंवाने के बाद चीन ने बराबरी के लिए दबाव बढ़ाया और उसे मैच का एकमात्र पेनल्टी कॉर्नर मिला। चीन का सीधा प्रयास भारतीय गोल में पहुंचा, लेकिन गेंद बैकबोर्ड की तय ऊंचाई से ऊपर गई थी। नियमों के अनुसार गोल को अमान्य कर दिया गया। भारतीय खेमे ने राहत की सांस ली, जबकि घरेलू दर्शकों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। यह चीन के लिए बराबरी का सबसे बड़ा मौका था, जो हाथ से निकल गया। कप्तान के पास था दूसरा गोल, चीनी गोलकीपर ने बचाया मध्यांतर से केवल दो मिनट पहले भारत ने अपनी बढ़त दोगुनी करने का बेहतरीन अवसर बनाया। कप्तान खैदेम शिलेइमा चानू को गोल पर निशाना लगाने का मौका मिला, लेकिन चीनी गोलकीपर ने तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए गेंद को हथेली से बाहर धकेल दिया। दूसरा गोल नहीं आया, मगर भारत 1-0 की बढ़त के साथ मध्यांतर में पहुंच गया। अब अगले दो क्वार्टर में इस मामूली बढ़त की रक्षा करनी थी। तीसरे क्वार्टर में चीन का पलटवार, भारतीय डिफेंस सतर्क मध्यांतर के बाद चीन नई ऊर्जा और आक्रामक इरादे के साथ मैदान पर लौटा। तीसरे क्वार्टर के सातवें मिनट में चीन ने बराबरी का खतरनाक मौका तैयार किया। एक चीनी खिलाड़ी बेसलाइन से ओवरलैप करते हुए आगे निकली और उसने गोल के सामने खतरनाक माइनस पास भेजा। भारतीय रक्षापंक्ति ने खतरे को समय रहते पढ़ लिया। पास अपने लक्ष्य तक पहुंचता, उससे पहले ही भारतीय डिफेंडर ने उसे रोककर चीन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आखिरी क्वार्टर में गोलपोस्ट के आगे खड़ा हुआ नीला किला फाइनल का चौथा और आखिरी क्वार्टर भारत की रक्षात्मक मजबूती का प्रदर्शन बन गया। भारतीय खिलाड़ी अपने गोल घेरे के आसपास अनुशासित, संगठित और पूरी तरह सतर्क रहीं। उन्होंने चीन के लिए गोल तक पहुंचने का लगभग हर रास्ता बंद कर दिया।मेजबान टीम ने बराबरी के लिए लगातार कोशिश की, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति गोलपोस्ट के सामने किले की तरह खड़ी रही। समय बीतता गया और चीन की बेचैनी बढ़ती गई, मगर भारत का नियंत्रण नहीं टूटा। आखिरी सीटी बजते ही भारत एशियाई चैंपियन अंतिम मिनटों में चीन ने दबाव बनाने की कोशिश जारी रखी, लेकिन भारतीय टीम ने अपनी एक गोल की बढ़त को मजबूती से बचाए रखा। आखिरी सीटी बजते ही स्कोर भारत के पक्ष में 1-0 था। भारतीय खिलाड़ी चैंपियन बन चुकी थीं और मेजबान चीन अपने घरेलू मैदान पर मामूली अंतर से खिताब चूक गया था। इस फाइनल में जीत और हार का अंतर बेहद छोटा था—सानिका की एक सटीक डिफ्लेक्शन और भारतीय डिफेंस की अटूट दीवार। पूरे टूर्नामेंट में नहीं हारा भारत भारतीय टीम ने प्रतियोगिता का अंत अजेय रहते हुए किया। भारत ने एलीट पूल में तीन मुकाबले जीते और एक मैच ड्रॉ खेला। इसके बाद सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-1 से करारी शिकस्त देकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। फाइनल में मेजबान चीन को 1-0 से हराते हुए भारत ने अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया और तीसरी बार महिला जूनियर एशिया कप चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। एक गोल में समाई पूरी खिताबी कहानी सानिका चंद्रकांत माने का 17वें मिनट का गोल स्कोरबोर्ड पर केवल एक अंक था, लेकिन उसके भीतर भारत की पूरी खिताबी कहानी समाई थी। उस गोल ने टीम को एशियाई चैंपियन बनाया, खिताबों की हैट्रिक पूरी कराई और एफआईएच जूनियर महिला विश्व कप का टिकट भी दिला दिया। फाइनल में चीन के पास गेंद का कब्जा और घरेलू दर्शकों का समर्थन था, लेकिन भारत के पास धैर्य, अनुशासन और निर्णायक मौके को गोल में बदलने की क्षमता थी—और आखिर में खिताब उसी टीम ने उठाया, जिसने दबाव के सबसे कठिन क्षणों में अपनी रक्षा को अभेद्य बनाए रखा।



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