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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और विनिर्मित वस्तुओं की बढ़ी कीमतों के असर से देश की थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर जुलाई में मामूली घटकर 9.78 प्रतिशत रही, लेकिन यह लगातार तीसरे महीने नौ प्रतिशत से ऊपर दर्ज की गई। आखिर महंगाई बढ़ क्यों रही है इस बार भी सबसे बड़ा कारण बना कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की महंगाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते ईंधन की कीमतें बढ़ीं और उसका असर फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान पर भी साफ दिखाई दिया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में ईंधन और ऊर्जा श्रेणी की महंगाई 20.05 प्रतिशत रही। वहीं खनिज तेल के दाम सालभर में 32.4 प्रतिशत और कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस की कीमतें 26.99 प्रतिशत बढ़ गईं। फैक्ट्री में बनने वाले सामान भी हुए महंगे महंगे ईंधन का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ा, जिससे फैक्ट्री में बनने वाले सामान भी महंगे हो गए। जुलाई में विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर 8.29 प्रतिशत रही। इस दौरान तैयार खाद्य उत्पाद 8.89 प्रतिशत , तंबाकू उत्पाद 13.36 प्रतिशत , कपड़े 12.8 प्रतिशत , रसायन और केमिकल उत्पाद 13.12 प्रतिशत , रबर और प्लास्टिक उत्पाद 10.38 प्रतिशत , बुनियादी धातु 12.56 प्रतिशत और बिजली के उपकरण 12.34 प्रतिशत महंगे हुए। खेती और कच्चे माल पर भी असर प्राथमिक उत्पादों में भी कीमतों का दबाव बना रहा। खाद्य वस्तुएं 5.44 प्रतिशत , गैर-खाद्य उत्पाद 17.66 प्रतिशत और खनिज 13.28 प्रतिशत महंगे हुए। यानी खेती से लेकर फैक्ट्री तक, लगभग हर सेक्टर में लागत बढ़ने का असर देखने को मिल रहा है। चार महीनों का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाने वाला चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में औसत थोक महंगाई 9.47 प्रतिशत रही। इसी दौरान कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 44.62 प्रतिशत और खनिज तेल की 42.4 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान कोयला और लिग्नाइट 1.46 प्रतिशत तथा बिजली 0.65 प्रतिशत सस्ती हुई, लेकिन इससे महंगाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। पश्चिम एशिया संकट बना बड़ा फैक्टर 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी आई। महंगा ईंधन ट्रांसपोर्ट और उत्पादन दोनों की लागत बढ़ा रहा है, जिसका असर अब बाजार में मिलने वाले कई उत्पादों की कीमतों पर भी दिख रहा है।