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पटना। बिहार में पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने कई बड़े फैसले किए हैं, जिनके तहत परीक्षाओं में तकनीक और एआई का इस्तेमाल बढ़ाने, हर महीने छात्रों से सीधे संवाद करने, 15 अगस्त से रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा देने और राज्य में मॉडल स्कूलों की संख्या बढ़ाकर 1001 करने की तैयारी है। परीक्षा सुधार के लिए राज्य स्तरीय समिति मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को शिक्षा विभाग की ओर से अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर का उद्घाटन करते हुए कहा कि बिहार में परीक्षाओं को सुचारु, पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति का गठन किया गया है। यह समिति बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ कक्षा-आधारित मूल्यांकन में भी तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के इस्तेमाल पर सुझाव देगी ताकि छात्रों के ज्ञान, समझ और विश्लेषण क्षमता का अधिक बेहतर तरीके से आकलन किया जा सके। हर स्कूल को उत्कृष्टता का केंद्र बनाने की तैयारी श्री चौधरी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर स्कूल तक पहुंचाने के लिए एक अलग राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है।इस समिति का लक्ष्य प्रत्येक विद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनाना और छात्रों के सीखने के स्तर में लगातार सुधार लाना होगा।सरकार का फोकस केवल भवन और संसाधनों पर नहीं, बल्कि पढ़ाई की वास्तविक गुणवत्ता और बच्चों के सीखने के नतीजों पर भी रहेगा। हर महीने छात्रों के लिए ‘सहयोग शिविर’ सरकार ने शिक्षा सुधार में छात्रों की सीधी भागीदारी बढ़ाने का फैसला भी किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी स्कूलों तथा कॉलेजों में जाकर छात्रों से संवाद करेंगे। छात्रों से मिलने वाले सुझावों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री स्तर पर हर महीने छात्रों के लिए एक सहयोग शिविर आयोजित किया जाएगा, जहां उनकी समस्याएं और सुझाव सीधे सुने जाएंगे और उन पर कार्रवाई की जाएगी। छात्र कल्याण के लिए बनेगा अलग निदेशालय छात्रों से जुड़े काम कई विभागों में बंटे होने के कारण समन्वय की समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था बनाने का फैसला किया है। श्री चौधरी के मुताबिक, छात्रों के कल्याण से जुड़े सभी संबंधित विभाग मिलकर एक निदेशालय बनाएंगे। इसका उद्देश्य छात्र हित से जुड़े मामलों का बेहतर समन्वय, तेज निष्पादन और समस्याओं का एकीकृत समाधान करना होगा। ‘बिहार के बच्चों को पढ़ने बाहर न जाना पड़े’ मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था खड़ी करना चाहती है, जिससे बिहार के बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में भेज सकते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कोटा सहित अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में बिहार के छात्रों के पढ़ने जाने का जिक्र करते हुए इसे राज्य के भीतर बेहतर शैक्षणिक ढांचा खड़ा करने की जरूरत का संकेत बताया। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से 18 हजार करोड़, बड़ा हिस्सा बाहर जा रहा श्री चौधरी ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत लगभग 18 हजार करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं और इसका बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोटा में लाखों बच्चे पढ़ने जाते हैं और वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों में भी बड़ी संख्या बिहार के लोगों की है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य बिहार में ही वैसी शिक्षा व्यवस्था और तैयारी का माहौल तैयार करना है, जिससे छात्रों का बाहर जाना कम हो। 551 मॉडल स्कूल तैयार, लक्ष्य 1001 राज्य में मॉडल स्कूलों का नेटवर्क भी बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में अब तक 551 मॉडल स्कूल बनाए जा चुके हैं और सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 1001 मॉडल स्कूल करने का है। इन स्कूलों के जरिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और आधुनिक शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। 15 अगस्त से रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई श्री चौधरी ने एक और अहम घोषणा करते हुए कहा कि 15 अगस्त से ऐसी व्यवस्था शुरू की जाएगी, जिसके तहत बच्चे रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। इसका मकसद छात्रों को स्कूल समय के बाद भी पढ़ाई और शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच उपलब्ध कराना है। हालांकि इस ऑनलाइन व्यवस्था का विस्तृत स्वरूप, मंच और संचालन संबंधी तकनीकी जानकारी विज्ञप्ति में नहीं दी गई है। कंप्यूटर-अंग्रेजी के साथ संस्कृत, उर्दू और बिहार की भाषाओं पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी बच्चों को कंप्यूटर और अंग्रेजी की शिक्षा देने पर काम किया जाएगा। इसके साथ संस्कृत, उर्दू और बिहार की पांच भाषाओं के विकास को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीक के दौर में एआई का लाभ उठाकर शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत है। शिक्षा से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई श्री चौधरी ने शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसे मामलों में गुंडा एक्ट तथा सीसीए के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों के तहत दोषियों को एक वर्ष तक जेल में रखने का प्रावधान है। युवा ही करेंगे बिहार का नवनिर्माण मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के युवाओं और नौजवानों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने कहा कि बिहार का भविष्य युवा हैं और आने वाली पीढ़ी ही राज्य का नवनिर्माण करेगी। सरकार शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि युवाओं को कौशल, अवसर और बेहतर भविष्य से जोड़ना चाहती है।



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