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पटना। बिहार सरकार ने राज्य में पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 366 सहायक प्राध्यापकों की संविदा पर नियुक्ति और गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने के लिए 2520 करोड़ रुपये की योजना समेत 17 प्रस्तावों को आज मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, हवाई संपर्क और जल प्रबंधन से जुड़े 17 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है। पांच मेडिकल कॉलेजों में नियुक्त होंगे 366 सहायक प्राध्यापक राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के 366 खाली पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी। यह व्यवस्था नियमित नियुक्ति होने तक लागू रहेगी। जिन मेडिकल कॉलेजों में नियुक्तियां होंगी, उनमें बेतिया और पूर्णिया के साथ जननायक कर्पूरी ठाकुर चिकित्सा महाविद्यालय मधेपुरा, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय छपरा तथा श्रीराम जानकी चिकित्सा महाविद्यालय समस्तीपुर शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी एनएमसी के मानकों के अनुरूप कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और पढ़ाई की व्यवस्था मजबूत करना है। डेंटल कॉलेजों के खाली पद भी भरे जाएंगे राज्य के सरकारी डेंटल कॉलेजों में खाली पड़े प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, रीडर, व्याख्याता और सहायक प्राध्यापक के पदों पर भी संविदा नियुक्ति की जाएगी। सरकार के इस निर्णय से डेंटल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने और शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारु बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर संवरेगा विष्णुपद मंदिर गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के व्यापक विकास के लिए मंत्रिमंडल ने 2520 करोड़ रुपये की योजना को प्रशासनिक स्वीकृति दी है। मंदिर क्षेत्र को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत मंदिर परिसर और घाटों का विकास होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मल्टीलेवल पार्किंग, एलिवेटेड पथ, डोरमेट्री, कैंटीन और पैदल पुल समेत कई सुविधाएं तैयार की जाएंगी। इस परियोजना के पूरा होने से विष्णुपद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ गया में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। सोन और फल्गु नदियों को जोड़ने पर 996.05 करोड़ सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए 996.05 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी गई है। विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास और नदी जोड़ योजना पर कुल 3516.05 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के माध्यम से जल प्रबंधन को मजबूत करने और क्षेत्र की जल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा। मखाना के बीज से बाजार तक बनेगी मजबूत व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्रीय मखाना विकास योजना के लिए 89.79 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। योजना का उद्देश्य मखाना की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत करना है। इसके तहत उत्पादन और बेहतर बीज से लेकर किसानों के प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने तक काम किया जाएगा। मखाना के निर्यात और प्रमाणीकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का जोर इस योजना के माध्यम से मखाना उत्पादक किसानों, व्यापारियों और किसान उत्पादक संगठनों की आय बढ़ाने पर रहेगा। पाम ऑयल की खेती के लिए 2.10 करोड़ रुपये राज्य में पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-पाम ऑयल योजना के तहत 2.10 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गई है। योजना के तहत किसानों को पाम ऑयल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य में तिलहन उत्पादन के नए विकल्प विकसित करना और किसानों को फसल विविधीकरण से जोड़ना है। फल-फूल और मशरूम की खेती पर 78.34 करोड़ बागवानी विकास मिशन के लिए करीब 78.34 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है। इससे फल, फूल और मशरूम की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के साथ उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। फसल विविधीकरण के तहत किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा बागवानी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जेलों की खाली जमीन पर खुलेंगे पेट्रोल पंप बिहार की जेलों के पास खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल अब पेट्रोल पंप खोलने के लिए किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने इसके लिए कारा पेट्रोलियम रिटेल आउटलेट परिचालन नियमावली-2026 के गठन को मंजूरी दी है। पूर्णिया और मुजफ्फरपुर की जेलों में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप खोले जाएंगे जबकि बक्सर और भागलपुर की जेलों में हिंदुस्तान पेट्रोलियम पंपों का संचालन करेगी। इन कंपनियों का चयन नामांकन के आधार पर किया गया है। छोटे शहरों तक पहुंचेगी उड़ान, जिलों में बनेंगे हेलीपोर्ट संशोधित उड़ान योजना के तहत बिहार के अलग-अलग हवाईअड्डों को विकसित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और बिहार सरकार के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी गई है। आकांक्षी जिलों में हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना भी बनाई गई है। इससे छोटे शहरों का हवाई संपर्क बेहतर होने के साथ आपातकालीन सेवाओं, पर्यटन और व्यापार को लाभ मिलने की उम्मीद है। नई हवाई सुविधाओं से निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करने में भी मदद मिल सकती है। ईंट-भट्ठा कारोबारियों को वन टाइम सेटलमेंट का मौका ईंट-भट्ठा कारोबारियों के बकाया भुगतान के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी गई है। यह योजना तीन महीने तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत ईंट सत्र 2024-25 तक के बकाये में ब्याज की राशि छोड़कर मूल बकाया जमा करने का विकल्प मिलेगा। इससे कारोबारियों को राहत मिलने के साथ सरकार को लंबित राजस्व की वसूली में तेजी आने की उम्मीद है। नदियों और जलाशयों से हटेगी गाद मंत्रिमंडल ने बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति-2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत नदियों, बराजों और जलाशयों में जमा गाद को व्यवस्थित तरीके से हटाने पर जोर दिया जाएगा। निकाली जाने वाली गाद का उपयोग सड़क, रेलवे और दूसरी निर्माण परियोजनाओं में मिट्टी भरने के लिए किया जा सकेगा। इससे जलस्रोतों की क्षमता बहाल करने के साथ निर्माण कार्यों के लिए सामग्री भी उपलब्ध होगी। बाढ़ और सिंचाई कार्यों के लिए 1000 करोड़ बिहार आकस्मिकता निधि से जल संसाधन विभाग को 1000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है। इस राशि का उपयोग बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई और प्रगति यात्रा से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। इनके साथ ही बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में पैरावेट स्कूल के संचालन के लिए छह स्थायी पद सृजित करने को भी स्वीकृति मिली है।