Full Story

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार ने वैश्विक साख निर्धारक एजेंसी मूडीज रेटिंग्स का भरोसा बढ़ाया है। उसने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान छह प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। इसके पीछे बड़ी वजह वित्त वर्ष की शुरुआत में अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रदर्शन है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत बढ़ी। इसके बाद मूडीज ने अपने पुराने अनुमान में एक प्रतिशत अंक की बड़ी बढ़ोतरी की है। मुश्किल माहौल में भी भारत की रफ्तार मजबूत मूडीज की रिपोर्ट कहती है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि भारत की विकास दर दूसरी जी20 अर्थव्यवस्थाओं और समान साख वाले उभरते बाजारों के मुकाबले तेज बनी रहेगी यानी वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल अपनी रफ्तार बनाए हुए है। लेकिन महंगा तेल बिगाड़ सकता है खेल मूडीज ने ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया जरूर है, लेकिन साथ ही कुछ बड़े खतरों की तरफ भी इशारा किया है। इनमें ईंधन और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें सबसे अहम हैं। अगर ईंधन लंबे समय तक महंगा बना रहता है तो महंगाई बढ़ सकती है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। रोजमर्रा का खर्च बढ़ने से लोग दूसरी चीजों पर कम पैसा खर्च कर सकते हैं और इससे बाजार में मांग तथा आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार कमजोर पड़ सकती है। ‘अल नीनो’ बढ़ा सकता है खाने-पीने की चीजों के दाम एक और चिंता ‘अल नीनो’ को लेकर है। मूडीज का मानना है कि इसके असर से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। अगर खाना और ऊर्जा दोनों महंगे होते हैं तो परिवारों का बजट प्रभावित होगा। इसका असर उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ सकता है और आखिरकार अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया संकट का असर बढ़ा तो सरकार पर भी बढ़ेगा दबाव मूडीज के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के आर्थिक असर से निपटने के लिए सरकार की प्रतिक्रिया अभी काफी सीमित रही है। लेकिन वैश्विक ऊर्जा कीमतें लगातार ऊपर जाती हैं तो स्थिति बदल सकती है। ऐसे हालात में सरकार को सब्सिडी और दूसरी सहायता योजनाओं पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत पड़ सकती है। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा खर्च भी चुनौती एजेंसी ने सरकारी वित्त को लेकर एक और चुनौती बताई है। रक्षा और बुनियादी ढांचे पर बढ़ता खर्च वित्तीय मजबूती की कोशिशों को मुश्किल बना सकता है। फिलहाल भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि पहली तिमाही में जीडीपी की रफ्तार 7.8% रही और मूडीज ने पूरे वित्त वर्ष का ग्रोथ अनुमान छह प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। हालांकि आगे की राह इस बात पर भी निर्भर करेगी कि ईंधन और खाद्य कीमतें किस दिशा में जाती हैं और पश्चिम एशिया के संघर्ष का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर कितना असर पड़ता है।