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मुंबई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली के दबाव में बीते सप्ताह आधे प्रतिशत से अधिक लुढ़के घरेलू शेयर बाजार की चाल निर्धारित करने में अगले सप्ताह औद्योगिक उत्पाद (आईआईपी) तथा अमेरिका के जॉब ओपनिंग्स, जीडीपी, कोर पीसीई, पीएमआई और फेडरल रिजर्व अधिकारियों की टिप्पणियों की अहम भूमिका रहेगी। बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 399.22 अंक यानी 0.53 प्रतिशत की गिरावट लेकर सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को 73895.74 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 205.9 अंक यानी 0.88 प्रतिशत का गोता लगाकर 23140.50 अंक पर रहा। दिग्गजों से ज्यादा मिडकैप को चोट बिकवाली का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी इसकी चपेट में आए।सबसे ज्यादा दबाव मिडकैप पर दिखा। सूचकांक 1.7 प्रतिशत यानी 284.93 अंक लुढ़ककर 16,574.62 पर बंद हुआ। स्मॉलकैप भी 0.8 प्रतिशत यानी 56.97 अंक गिरकर 7,145.92 पर पहुंच गया। एक्सिस बैंक ने मारी बाजी हालांकि, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई की। सेंसेक्स के शेयरों में एक्सिस बैंक 2.82 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,220 रुपये पर पहुंचकर सबसे बड़ा गेनर रहा। महिंद्रा एंड महिंद्रा 2.24 प्रतिशत और एशियन पेंट्स 1.93 प्रतिशत चढ़ा। बजाज फाइनेंस में 1.21 प्रतिशत, एचसीएल टेक में 1.17 प्रतिशत और टाइटन में 1.01 प्रतिशत की तेजी रही। इंडिगो, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, रिलायंस, मारुति और एसबीआई भी बढ़त लेकर बंद हुए। ट्रेंट-इन्फोसिस फिसले, बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी दूसरी तरफ ट्रेंट 1.41 प्रतिशत गिरकर 2,666 रुपये पर बंद हुआ, जबकि इन्फोसिस 0.81 प्रतिशत टूटकर 1,000.95 रुपये पर आ गया। कोटक महिंद्रा बैंक 0.47 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक 0.41 प्रतिशत और टाटा स्टील 0.37 प्रतिशत कमजोर हुआ। इटरनल, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी और अदाणी पोर्ट्स भी लाल निशान में रहे। त्योहार से पहले इन सेक्टरों में दिखी चमक सेक्टोरल मोर्चे पर तस्वीर मिली-जुली रही। त्योहारी मांग की उम्मीद के बीच कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 1.14 प्रतिशत चढ़ा, जबकि ऑटो में 0.95 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। रियल्टी 0.65 प्रतिशत मजबूत हुआ। इंडस्ट्रियल्स और पावर में 0.53-0.53 प्रतिशत तथा यूटिलिटीज में 0.42 प्रतिशत की बढ़त रही। वहीं, हॉस्पिटल्स इंडेक्स 2.12 प्रतिशत टूट गया। हेल्थकेयर 0.50 प्रतिशत, ऑयल एंड गैस 0.25 प्रतिशत और टेलीकम्युनिकेशन 0.23 प्रतिशत नीचे रहा। कच्चा तेल नरम, फिर भी महंगाई की चिंता कायम भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की नजर संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका-ईरान संघर्ष और संभावित कूटनीतिक बातचीत से जुड़े संकेतों पर रही। अमेरिका-चीन वार्ता से जुड़े घटनाक्रम पर भी बाजार की नजर बनी रही। सप्ताह के आखिर में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आईं, लेकिन इसमें जारी तेज उतार-चढ़ाव ने महंगाई को लेकर चिंता कम नहीं होने दी। वहीं, बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने घरेलू बाजार पर दबाव बनाए रखा। भारत के पीएमआई ने जगाई उम्मीद इस दबाव के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से राहत का संकेत भी मिला। सितंबर के शुरुआती परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएआई) आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में गतिविधियां मजबूत बने रहने के संकेत मिले। त्योहारी मांग की उम्मीद ने रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में खरीदारी को सहारा दिया। फार्मा शेयरों को भी समर्थन मिला। इसके उलट बीमा कमीशन से जुड़े नियामकीय बदलावों के बाद फाइनेंशियल सर्विसेज और सख्त वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के बीच आईटी सेक्टर दबाव में रहा। अब आईआईपी और अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी निगाहें आने वाले सप्ताह में घरेलू स्तर पर आईआईपी के आंकड़े औद्योगिक गतिविधियों की मजबूती की तस्वीर पेश करेंगे। वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका के जॉब ओपनिंग्स, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), कोर पीसीई और पीएमआई के आंकड़े अहम होंगे। इनके अलावा फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों से ब्याज दरों की आगे की दिशा और वैश्विक नकदी को लेकर नए संकेत मिल सकते हैं। कमाई बनेगी बाजार की अगली कसौटी जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल में बनी अनिश्चितता शेयरों के वैल्यूएशन में बड़ी बढ़ोतरी की गुंजाइश सीमित कर सकती है। ऐसे माहौल में कंपनियों की कमाई बाजार के रिटर्न की प्रमुख कसौटी बन सकती है। हालांकि, मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों के संकेत और घरेलू बाजार में पर्याप्त नकदी बड़ी गिरावट को सीमित करने में सहारा दे सकती है। ऐसे में आने वाला सप्ताह बाजार के लिए सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि घरेलू मजबूती और वैश्विक दबाव के बीच संतुलन का भी इम्तिहान होगा।