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नई दिल्ली/पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से 18 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग की और शिक्षा, रोजगार, उद्योग, पर्यटन तथा कृषि क्षेत्र के लिए भी कई बड़े प्रस्ताव रखे। श्री चौधरी ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में राज्य की तरक्की का एक दमदार और व्यापक विजन देश के सामने रखा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में साफ तौर पर कहा कि बिहार अब देश की विकास यात्रा में सिर्फ एक सहयोगी मात्र नहीं है बल्कि 'विकसित भारत 2047' के सपने को साकार करने वाली एक सक्रिय परिवर्तनकारी शक्ति बन चुका है। उन्होंने बिहार के विकास को और रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार से 18 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग भी की। जल जीवन मिशन: आखिर क्यों की गई 18000 करोड़ रुपये की मांग मुख्यमंत्री ने अपने अभिभाषण में बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक 'हर घर नल का जल' कार्यक्रम की सफलता को रेखांकित किया और बताया कि राज्य ने अपनी दूरदर्शिता और निवेश के बल पर 'जल जीवन मिशन' के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल कर लिया है। लेकिन, कुछ तकनीकी कारणों से इस मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली केंद्रीय अंश की राशि राज्य को प्राप्त नहीं हो सकी थी। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि इस मद में बिहार द्वारा अपने संसाधनों से खर्च की जा चुकी राशि के एवज में 13 हजार करोड़ रुपये और वर्तमान में चल रही नल-जल योजनाओं को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए 5000 करोड़ रुपये यानी कुल 18 हजार करोड़ रुपये की सहायता राशि तुरंत जारी की जाए। महिला सशक्तिकरण: 'लखपति दीदी' योजना में बिहार देश में अव्वल श्री चौधरी ने सीएम ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि बिहार की जीविका दीदियों और महिलाओं ने देश भर में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी'लखपति दीदी योजना' के तहत कुल 48 लाख 30 हजार लखपति दीदियों के साथ बिहार पूरे देश में पहले स्थान पर काबिज है। उन्होंने केंद्र को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस योजना के तहत तय किए गए अपने सभी लक्ष्यों को समय सीमा से बहुत पहले ही पूरा कर लेगी। एक लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश और 14 सैटेलाइट टाउनशिप मुख्यमंत्री ने औद्योगीकरण और नई तकनीक के मोर्चे पर बिहार सरकार 'मिशन मोड' में काम करने को लेकर पिछले दो वर्षों का लेखा-जोखा रखते हुए बताया कि राज्य में उद्योग और सड़क अवसंरचना के विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया गया है। बिहार सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सेमीकंडक्टर नीति-2026, बिहार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति 2026 और बिहार एआई मिशन जैसी आधुनिक नीतियां लागू की हैं।शहरी इलाकों के नियोजित विकास के लिए तीन लाख एकड़ से अधिक भूमि पर 14 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का महात्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति: लखीसराय के कजरा में देश का सबसे बड़ा बैटरी-आधारित सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया चुका है, जबकि पीरपैंती (भागलपुर) में 2,400 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। खेल और वैश्विक पर्यटन का नया केंद्र बनेगा बिहार बिहार अब बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। हाल ही में एशियन महिला एवं पुरुष हॉकी चैंपियनशिप और एशियन रग्बी चैंपियनशिप के सफल आयोजन के बाद बिहार की नजरें अब बड़े लक्ष्यों पर हैं: स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर: बिहार 2028 में 'नेशनल यूथ गेम्स', 2030 में 'हॉकी विश्व कप' और 2031 में 'राष्ट्रीय खेलों' की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, जिसके लिए केंद्र से विशेष सहयोग मांगा गया है। पर्यटन (वन स्टेट : वन ग्लोबल डेस्टिनेशन): 'गयाजी' (बोधगया सहित) को वैश्विक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। विष्णुपद कॉरिडोर और महाबोधि कॉरिडोर का काम तेजी से जारी है। इस वैश्विक कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बिहार ने केंद्र से इंटरनेशनल एयर कनेक्टिविटी (अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा) की सुविधा बढ़ाने का विशेष आग्रह किया है। "सबका साथ, सबका विकास" के मंत्र से बढ़ेगा देश श्री चौधरी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि बिहार सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ उनके मूल मंत्र 'सबका साथ, सबका विकास' को आधार मानकर आगे बढ़ रही है। उन्होने कहा कि समृद्ध और आत्मनिर्भर बिहार ही 'विकसित भारत-2047' की परिकल्पना को धरातल पर उतारेगा।