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मोतिहारी। बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के लिए रविवार का दिन मानो मौत की एक लंबी परछाईं लेकर आया। जिले के अलग-अलग इलाकों में हुए हादसों और घटनाओं ने सात परिवारों की खुशियां छीन लीं और कई घरों में मातम पसार दिया। कहीं बिजली के खुले तार मौत बनकर टूटे, कहीं पारिवारिक विवाद ने भाई के हाथों भाई की हत्या करा दी, कहीं एक किशोरी ने फांसी लगाकर जीवन समाप्त कर लिया तो कहीं पोखर ने दस वर्षीय मासूम को हमेशा के लिए अपने आगोश में ले लिया। एक सड़क हादसे में घायल महिला की इलाज के दौरान मौत ने इस दर्दनाक रविवार की त्रासदी को और गहरा कर दिया। जिले में हुई सात मौतों में तीन की जान विद्युत स्पर्शाघात से गई। रामगढ़वा थाना क्षेत्र के बेल पंचायत निवासी 44 वर्षीय वीरेंद्र साह रविवार सुबह टहलने निकले थे। बेल नहर के समीप विद्युत ट्रांसफार्मर के खुले तार की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। रोज की तरह घर से निकले वीरेंद्र के लिए शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह सुबह की सैर उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी। इसी तरह चकिया थाना क्षेत्र के देवपुर छपरा विश्वनाथ गांव में महज आठ वर्ष की मासूम प्रतीक्षा बिजली की चपेट में आकर मौत की नींद सो गई। वह दुकान से सामान खरीदकर घर लौट रही थी। इसी दौरान लोहे के विद्युत खंभे के संपर्क में आने से उसमें प्रवाहित करंट ने मासूम की जान ले ली। जिस उम्र में उसके हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए थीं, उस उम्र में एक बिजली के खंभे ने उसके परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रूपडीह गांव में भी करंट ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया। 54 वर्षीय शिवनाथ महतो अपने दालान में मवेशियों को चारा खिलाने गए थे। इसी दौरान वह खुले बिजली के तार के संपर्क में आ गए और उनकी मौत हो गई। पारिवारिक विवाद ने भाई के हाथों भाई की ले ली जान मोतिहारी नगर थाना क्षेत्र के जानपुल चौक स्थित तेलिया पट्टी में शनिवार देर रात पारिवारिक संपत्ति और नशाखोरी को लेकर हुए विवाद ने खूनी रूप ले लिया। आरोप है कि काली प्रसाद के पुत्र अजीत प्रसाद ने अपने भाई अनुराग प्रसाद पर धारदार हथियार से गले पर वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल अनुराग की मौत हो गई। एक ही परिवार के तीन भाइयों में से पहले ही एक भाई की मौत हो चुकी थी। अब दूसरे भाई की हत्या ने परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी टीस शायद लंबे समय तक बनी रहेगी। पुलिस ने आरोपी अजीत प्रसाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 14 साल की अमरीना ने फांसी लगाकर खत्म कर ली जिंदगी जितना थाना क्षेत्र के बनकटवा गांव में रविवार को एक और हृदयविदारक घटना सामने आई। मेराज आलम की 14 वर्षीय पुत्री अमरीना ने अपने घर में ही फांसी लगा ली। परिजन जब तक उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। किशोरी की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। पोखर में डूबा दस साल का बचपन कुंडवाचैनपुर थाना क्षेत्र में भी रविवार एक परिवार के लिए कभी न भूलने वाला दिन बन गया। सुनील राम के 10 वर्षीय पुत्र अर्जुन कुमार की खदुआ पोखर में डूबने से मौत हो गई। बताया गया कि अर्जुन पोखर में नहाने गया था, लेकिन पानी की गहराई उसके जीवन से बड़ी साबित हुई। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। सड़क हादसे में घायल महिला ने इलाज के दौरान तोड़ा दम चकिया थाना क्षेत्र के पूरन छपरा निवासी रामबालक राम की 43 वर्षीय पत्नी रेखा देवी भी रविवार को जिंदगी की जंग हार गईं। वह शुक्रवार को मुजफ्फरपुर जिले के बरुराज थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। मुजफ्फरपुर में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन रविवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। एक दिन, सात मौतें और कई उजड़े परिवार पूर्वी चंपारण में रविवार को हुई इन घटनाओं ने एक बार फिर सड़क, बिजली और घरेलू सुरक्षा से लेकर पारिवारिक तनाव तक के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सात मौतें केवल आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि सात परिवारों की ऐसी त्रासदी हैं, जिनके घरों में रविवार की शाम चूल्हे तो जले होंगे, लेकिन अपनों के बिना जिंदगी की रोशनी बुझ चुकी थी। कहीं सुबह की सैर मौत की आखिरी यात्रा बन गई, कहीं बाजार से लौटती मासूम बच्ची घर पहुंचने से पहले ही दुनिया छोड़ गई, कहीं भाई ने भाई का गला काट दिया और कहीं खेलते-नहाते बचपन को पोखर ने हमेशा के लिए निगल लिया। रविवार गुजर गया, लेकिन इन सात परिवारों के लिए यह दिन शायद उनकी जिंदगी का सबसे मनहूस दिन बनकर हमेशा याद रहेगा।



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