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(संजय कौशिक की विशेष रिपोर्ट) काठमांडू/मोतिहारी। नेपाल की भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के सातवें दिन तबाही का दायरा और गहरा हो गया है। बाढ़ और उसके बाद मची जल-प्रलय में मृतकों की संख्या बढ़कर 1009 हो गई है, जबकि करीब 3,916 लोग अब भी लापता हैं। इनमें से 987 शव ने पल में और 22 भारतीय क्षेत्र से बरामद किए गए। मलबे, उफनती नदियों और तबाह बस्तियों के बीच राहत एवं बचाव दल लगातार जिंदगी की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अब हर बरामद शव के साथ किसी परिवार की उम्मीद का एक और दीपक बुझता जा रहा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मंगलवार सुबह नौ बजे के अपडेट के अनुसार 987 शव बरामद किए गए हैं। सबसे अधिक मौतें चितवन में 321, नवलपरासी पूर्व में 216 और नवलपरासी पश्चिम में 170 दर्ज की गई हैं। तनहुन में 38, रसुवा में 27, नुवाकोट में 95, धाडिंग में 55 और गोरखा में 65 लोगों को बचाया गया है। आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब भी मलबे और नदी की धाराओं में मानव अवशेष मिलने का सिलसिला जारी है। 3,916 लोग अब भी लापता, सूची में सुरक्षा बलों से लेकर विदेशी नागरिक तक लापता लोगों की संख्या 3,916 तक पहुंच गई है। इनमें नेपाल पुलिस के 25, नेपाली सेना के 45, सशस्त्र पुलिस बल के 13, सीमा शुल्क कार्यालय के 15 और आव्रजन विभाग के तीन कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 583 विदेशी नागरिक और पर्यटकों के साथ यात्रा कर रहे 164 नेपाली गाइड भी लापता हैं। रसुवा, नुवाकोट और विभिन्न जलविद्युत परियोजना स्थलों पर रहने वाले सैकड़ों लोगों का भी अब तक कोई पता नहीं चल सका है। आपदा के बीच राहत दलों ने 11,814 लोगों को सुरक्षित बचाया है। नेपाली सेना ने अब तक 573 हेलीकॉप्टर उड़ानें संचालित की हैं, जिनमें मंगलवार की 12 उड़ानें भी शामिल हैं। इन अभियानों के जरिए 3,449 नेपाली नागरिकों और 253 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। काठमांडू से निजी क्षेत्र की ओर से भी 29 उड़ानें संचालित की गई हैं। 21 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में जुटे नेपाल सरकार ने बचाव, स्वास्थ्य सेवा और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 21,011 सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा है। इनमें नेपाल पुलिस के 7,912, नेपाली सेना के 8,896 और सशस्त्र पुलिस बल के 4,203 जवान शामिल हैं। रसुवा और नुवाकोट के दुर्गम इलाकों में पिछले दो दिनों में सशस्त्र पुलिस बल ने 50 हेलीकॉप्टर उड़ानों से आवश्यक सामग्री पहुंचाई है। राहत अभियान को 37 ट्रकों और 37 बोलेरो वाहनों से भी गति दी जा रही है। नेपाल की त्रासदी का साक्षी बना भारत का गंडक तट भोटे कोशी की त्रासदी की लहरें नेपाल की सीमा तक सीमित नहीं रहीं। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोले जाने के बाद तेज धारा के साथ मलबा और शव बहकर भारतीय क्षेत्र की गंडक नदी में पहुंचे। नेपाल की बाढ़ में बिछड़े लोगों के शव अब भारत के नदी तटों पर मिल रहे हैं, मानो नदी दोनों देशों के बीच खिंची सीमा को पार कर मौत की कहानी अपने साथ लेकर आ रही हो। भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में अब तक 22 शव बरामद किए जा चुके हैं। कुशीनगर में 13 शव, चार का पोस्टमार्टम जारी कुशीनगर में सुरक्षित रखे गए चार शवों का मंगलवार को प्रशासनिक निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। वहीं नौ शव गोरखपुर स्थित एम्स की मोर्चरी में सुरक्षित रखे गए हैं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शवों को नेपाल प्रशासन को सौंपने की तैयारी है। कुशीनगर में शव मिलने का सिलसिला 26 अगस्त से जारी है। उस दिन तीन शव मिले थे। 27 अगस्त को एक, 29 अगस्त को तीन और 30 अगस्त को चार शव बरामद किए गए। बीती रात दो और शव मिलने के बाद यह संख्या 13 हो गई। कुशीनगर के अतिरिक्त भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित एक अन्य क्षेत्र महाराजगंज जिले से भी आठ शव बरामद किए गए हैं। महाराजगंज जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय ने कहा, "हमारी टीमों ने रविवार रात तक छह शव निकाले थे; आज (सोमवार) दो और शव बरामद किए गए हैं।" बगहा में मिले शव को नेपाल भेजने की प्रक्रिया शुरू बिहार के बगहा में गंडक नदी से बरामद एक शव को पोस्टमार्टम के बाद नेपाल प्रशासन को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर बगहा की एसडीएम चांदनी कुमारी के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम अनुमंडलीय अस्पताल पहुंची। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को वाल्मीकिनगर ले जाया गया, जहां से उसे नेपाल प्रशासन को सौंपे जाने की तैयारी है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गंडक की तेज धारा में कई अन्य शव भी बहते देखे गए। एसडीआरएफ ने उन्हें निकालने का प्रयास किया, लेकिन उफनती नदी ने राहतकर्मियों के सामने भी ऐसी चुनौती खड़ी कर दी, जिसके आगे कई बार मानवीय प्रयास बेबस नजर आए और शव आंखों के सामने पानी की अथाह धाराओं में ओझल हो गए। भोटेकोशी की बाढ़ अब केवल नेपाल की एक प्राकृतिक आपदा नहीं रह गई है। यह उन परिवारों की सामूहिक त्रासदी बन चुकी है जो सातवें दिन भी दरवाजे पर लौटते कदमों की आहट सुनने को बेचैन हैं। किसी के घर से बेटा गायब है, किसी की मां, किसी का पिता, तो किसी की पूरी दुनिया ही नदी की धारा में बह गई। नेपाल की पहाड़ियों से निकली वह जलधारा अब भारत के गंडक तटों तक पहुंचकर यह सवाल छोड़ रही है—कितने नाम अभी मलबे के नीचे दबे हैं और कितनी आंखें अब भी अपनों की राह देख रही हैं।



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