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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जैव विविधता तथा वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारत को अपनी समृद्ध जैव विविधता और विविध प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर गर्व है, जो लाखों लोगों की आजीविका और अनेक वन्यजीव प्रजातियों का सहारा हैं। श्री मोदी ने शुक्रवार को पर्यावरण दिवस के मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि देश में पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इन प्रयासों की वजह से कई दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिली है। दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुआ, स्लॉथ बीयर और चीता जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे विशेष कार्यक्रम अच्छे परिणाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार प्रयासों से न केवल इन प्रजातियों की सुरक्षा हो रही है, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास भी बेहतर बनाए जा रहे हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का असर श्री मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का भी उल्लेख किया। इस अभियान के तहत लोगों को अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस पहल से हर साल करीब 1.19 लाख हेक्टेयर नए वन क्षेत्र जुड़ रहे हैं, जिससे देश में हरियाली बढ़ रही है। पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार प्रयास पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने वन क्षेत्र बढ़ाने, लुप्तप्राय जीवों की रक्षा करने और खराब हो चुके प्राकृतिक क्षेत्रों को फिर से विकसित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें प्रोजेक्ट चीता भी शामिल है, जिसके तहत दशकों बाद चीतों को भारत में फिर से बसाया गया है। इसके अलावा हिम तेंदुओं, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और स्लॉथ बीयर जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। प्रकृति बचाने का सामूहिक संकल्प प्रधानमंत्री का यह संदेश विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और प्रकृति संरक्षण में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से दिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा धरती को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करना है।



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