Full Story

इम्फाल। मणिपुर के तामेंगलोंग जिले की दो दूरस्थ कुकी बस्तियों में रविवार को अज्ञात हथियारबंद लोगों के दो अलग-अलग हमलों में दो महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई, कुछ अन्य घायल हो गए और एक महिला के लापता होने की आशंका है। दोनों हमले 13 सितंबर को हुए, जिसे कुकी समुदाय ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाता है। यह दिन 1990 के दशक की शुरुआत में हुए कुकी-नगा जातीय संघर्ष में मारे गए लोगों की स्मृति में वार्षिक शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है। लोंगपी में सामान लेकर लौट रहे ग्रामीणों पर हमला पहली घटना लोंगपी गांव में रविवार दोपहर करीब तीन बजे हुई। तीन ग्रामीण आवश्यक सामान लेकर घर लौट रहे थे, तभी अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने कथित तौर पर उन पर हमला कर दिया। घटना में एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान जूली सिंगसन और थांगवेल उर्फ रोएल गांगटे के रूप में हुई है। उनके साथ मौजूद तीसरी महिला के लापता होने की आशंका जताई गई है। गांव के केंद्र की ओर बढ़े हमलावर, फिर हुआ मुकाबला वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर्स ने एक बयान में दावा किया कि दो लोगों की हत्या के बाद हमलावर गांव के केंद्र की ओर बढ़े थे। इस दौरान उनका कड़ा मुकाबला किया गया और उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया गया। वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर्स ने दावा किया कि मृतक जूली गर्भवती थीं। संगठन ने इस हमले को मानवता और विशेष रूप से कुकी-जो समुदाय पर “असहनीय हमला” बताया है। हालांकि, हमलावरों की पहचान और हमले के कारण की पुष्टि नहीं की गई है। टोलेन में तड़के हमला, पति-पत्नी की मौत दूसरा हमला टोलेन गांव में रविवार तड़के करीब चार बजे हुआ। इस हमले में एक महिला और उसके पति की मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतकों की पहचान ल्हिंगजंगई सिंगसित और सैनेह सिंगसित के रूप में की गई है। असम राइफल्स ने घायल को पहुंचाया अस्पताल। घटना की सूचना मिलने के बाद कैमै बेस से असम राइफल्स के जवानों ने कार्रवाई करते हुए घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए जिरीबाम पहुंचाया। सैनेह सिंगसित ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उनके बेटे की हालत गंभीर बताई गई है। शोक के दिन हुई हिंसा ने बढ़ाई संवेदनशीलता इन दोनों घटनाओं की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि वे कुकी समुदाय के ‘ब्लैक डे’ पर हुईं। कुकी समुदाय हर वर्ष 13 सितंबर को 1990 के दशक की शुरुआत में हुए कुकी-नगा जातीय संघर्ष में मारे गए लोगों की याद में शोक मनाता है। ऐसे दिन हुई हिंसा ने क्षेत्र में पहले से मौजूद अविश्वास और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है। एनएच-37 के किनारे रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल दोनों हमलों के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के आसपास रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। टोलेन गांव इसी संवेदनशील गलियारे पर स्थित है। यह राजमार्ग इंफाल को जिरीबाम से जोड़ता है। मणिपुर में जारी संघर्ष के बीच इस मार्ग के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर इन घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुकी संगठनों ने मांगी निष्पक्ष जांच मणिपुर के कुकी नागरिक समाज संगठनों ने दोनों हमलों की निंदा करते हुए तत्काल, निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। संगठनों ने कहा है कि जिम्मेदार लोगों की पहचान विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर की जाए और उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत उन पर मुकदमा चलाया जाए। यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल हमलावरों की पहचान स्पष्ट नहीं हुई है और घटना को लेकर किसी समुदाय पर बिना साक्ष्य आरोप लगाने से तनाव बढ़ सकता है।