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एवियन/वाशिंगटन/नई दिल्ली। करीब चार महीने से पश्चिम एशिया को अस्थिर कर रहे अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त करने की दिशा में दोनों देशों ने 60 दिन के युद्ध विराम और व्यापक शांति प्रक्रिया से जुड़े एक ऐतिहासिक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, अमेरिका द्वारा ईरान की घेराबंदी हटाने, प्रतिबंधों को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने तथा परमाणु कार्यक्रम सहित लंबित विवादों के स्थायी समाधान के लिए बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। युद्ध जिसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ यह संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा था। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई तथा कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत के बाद पूरा पश्चिम एशिया युद्ध की आग में झुलसने लगा था। संघर्ष बढ़ते-बढ़ते खाड़ी क्षेत्र, लेबनान और कई अन्य मोर्चों तक पहुंच गया। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, कई देशों में महंगाई बढ़ी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडराने लगा। वर्साय में ट्रंप, तेहरान में पेजेशकियन युद्ध समाप्ति की दिशा में यह ऐतिहासिक क्षण फ्रांस के वर्साय महल और ईरान की राजधानी तेहरान में एक साथ दर्ज हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में समझौते पर हस्ताक्षर किए जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तेहरान में डिजिटल माध्यम से दस्तावेज को मंजूरी दी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित समारोह में हुए इस हस्ताक्षर को दोनों देशों ने युद्ध समाप्ति की दिशा में पहला निर्णायक कदम बताया। व्हाइट हाउस द्वारा जारी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप फारसी भाषा के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते दिखाई दिए। हस्ताक्षर के बाद उन्होंने वह कलम विदेश मंत्री मार्को रुबियो को सौंपते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल तक पहुंचाने का निर्देश दिया। कुछ ही देर बाद तेहरान में राष्ट्रपति पेजेशकियन ने भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए। पाकिस्तान बना शांति का सेतु इस पूरे समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि हस्ताक्षर होते ही समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। कई महीनों की प्रत्यक्ष और परोक्ष वार्ताओं के बाद दोनों पक्ष इस सहमति तक पहुंचे हैं। दुनिया के लिए सबसे बड़ी राहत: खुलेगा होर्मुज समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है। युद्ध के दौरान इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया था। अब अगले 60 दिनों तक इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को बिना किसी शुल्क और रुकावट के आवाजाही की गारंटी दी गई है। शांति समझौते की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि वे अभी भी युद्ध-पूर्व स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। अमेरिका ने हटाई ईरान की नाकेबंदी समझौते के कुछ ही समय बाद अमेरिका ने ईरान की समुद्री घेराबंदी समाप्त करने की घोषणा कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले जहाजों पर लगी सभी रोक हटा ली गई है।" हालांकि अमेरिकी नौसैनिक जहाज क्षेत्र में मौजूद रहेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समझौते की सभी शर्तों का पालन हो रहा है। 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज युद्ध से बुरी तरह प्रभावित ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए समझौते में 300 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण एवं विकास योजना का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही अमेरिका ने सैद्धांतिक रूप से ईरान पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर सहमति जताई है। दोनों पक्ष आने वाले दिनों में इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा तय करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो यह ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक पुनर्निर्माण कार्यक्रम साबित हो सकता है। परमाणु कार्यक्रम पर अभी बाकी है असली परीक्षा युद्ध समाप्ति के बावजूद सबसे जटिल मुद्दा अभी भी ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। समझौते में तय किया गया है कि अगले 60 दिनों में दोनों पक्ष परमाणु सुरक्षा , निरीक्षण और नियंत्रण संबंधी व्यापक समझौते तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। साथ ही उसने अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में कम करने पर सहमति व्यक्त की है। ट्रंप बोले- दुनिया को आर्थिक तबाही से बचाना जरूरी था जी-7 सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि युद्ध जारी रहता तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होता। उन्होंने कहा कि दुनिया पहले ही ऊर्जा संकट, महंगाई और व्यापारिक अनिश्चितता का सामना कर रही है। ऐसे में कूटनीतिक समाधान ही सबसे बेहतर विकल्प था। मैक्रों ने कहा- यह साल की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस समझौते को वर्ष की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलताओं में से एक बताया। उनके अनुसार दशकों से एक-दूसरे के विरोधी रहे दो देशों को युद्ध से निकालकर बातचीत की मेज तक लाना वैश्विक कूटनीति की बड़ी उपलब्धि है। ईरान का संदेश : शांति चाहते हैं, लेकिन सतर्क रहेंगे ईरान की संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि अमेरिका पर ईरान का अविश्वास अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वहीं, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के भरोसे पर इस समझौते को मंजूरी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में बातचीत का मतलब अमेरिकी नीतियों को स्वीकार करना नहीं होगा। लेबनान मोर्चा बना सबसे बड़ा इम्तिहान हालांकि समझौते में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को रोकने की बात कही गई है लेकिन इसकी सफलता अभी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं मानी जा रही। इजरायल ने संकेत दिया है कि वह फिलहाल लेबनानी क्षेत्र से सेना हटाने के पक्ष में नहीं है और हिजबुल्ला के खिलाफ उसके अभियान जारी रहने की खबरें हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ अगले 60 दिनों को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। अब दुनिया की नजर अगले 60 दिनों पर अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता केवल युद्ध विराम नहीं बल्कि चार महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में सबसे बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। यदि दोनों पक्ष परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अंतिम सहमति बना लेते हैं तो यह समझौता पश्चिम एशिया की राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दिशा बदल सकता है।



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