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पटना। खेल-कूद या अन्य शारीरिक गतिविधियों के दौरान घुटने की गंभीर चोट झेलने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है कि बिहार में पहली बार अत्याधुनिक जाइरोस ज्वेल एसीएल ग्राफ्ट तकनीक से एसीएल की सफल सर्जरी की गई है, जिसे स्पोर्ट्स इंज्यूरी और हड्डी रोग उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पटना के सीआईएसआरओ अस्पताल में पहली बार अत्याधुनिक जाइरोस ज्वेल एसीएल ग्राफ्ट तकनीक के जरिए एसीएल (एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट) की सफल सर्जरी की गई है। यह जटिल सर्जरी अस्पताल के वरिष्ठ आर्थ्रोस्कोपी एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार ने सफलतापूर्वक की। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति बेहतर बताई जा रही है और वह तेजी से रिकवरी की ओर बढ़ रहा है। क्या होती है एसीएल चोट एसीएल घुटने के अंदर मौजूद एक महत्वपूर्ण लिगामेंट होता है, जो घुटने को स्थिर रखने में मदद करता है। फुटबॉल, क्रिकेट, कबड्डी, बैडमिंटन और अन्य खेलों के दौरान अचानक मुड़ने, कूदने या गिरने से यह लिगामेंट फट सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को चलने, दौड़ने, सीढ़ियां चढ़ने और सामान्य गतिविधियां करने में भी परेशानी होने लगती है। कई मामलों में सर्जरी ही इसका प्रभावी इलाज माना जाता है। नई तकनीक क्यों है खास अब तक एसीएल सर्जरी में मरीज के शरीर से हैमस्ट्रिंग या अन्य ऊतक निकालकर नया लिगामेंट तैयार किया जाता था, जिससे अतिरिक्त दर्द और रिकवरी में अधिक समय लग सकता था। जाइरोस ज्वेल एसीएल ग्राफ्ट तकनीक कई मायनों में आधुनिक और उन्नत मानी जा रही है। तकनीक की प्रमुख खूबियां * शरीर से अतिरिक्त ऊतक निकालने की जरूरत नहीं। * ऑपरेशन के बाद अपेक्षाकृत तेज रिकवरी। * मरीज जल्दी चलना-फिरना शुरू कर सकता है। * प्राकृतिक ऊतक के विकास में मददगार। * जटिल और दोबारा होने वाली एसीएल सर्जरी में भी उपयोगी। * घुटने को प्राकृतिक एसीएल जैसी मजबूती देने के लिए विकसित तकनीक। सफल रही सर्जरी, शुरू हुआ पुनर्वास विशेषज्ञों के अनुसार, खेल गतिविधि के दौरान मरीज का एसीएल पूरी तरह फट गया था। विस्तृत जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद डॉक्टरों ने आधुनिक ग्राफ्ट तकनीक का चयन किया। आर्थ्रोस्कोपिक प्रक्रिया के माध्यम से सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इसके बाद मरीज ने फिजियोथेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम शुरू कर दिया है तथा उसकी रिकवरी संतोषजनक बताई जा रही है। क्या बोले डॉ. रवि कुमार वरिष्ठ आर्थ्रोस्कोपी एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार ने कहा कि बिहार में पहली बार इस तकनीक का उपयोग खेल के दौरान लगी चोटों के इलाज के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक मरीजों को बेहतर स्थिरता, तेज रिकवरी और लंबे समय तक बेहतर परिणाम देने में मदद करती है। उनका उद्देश्य खिलाड़ियों और सक्रिय जीवनशैली वाले लोगों को जल्द और सुरक्षित तरीके से सामान्य जीवन में वापस लाना है। अब बिहार में ही मिलेगा अत्याधुनिक इलाज सीआईएसआरओ अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिषेक सर्राफ ने कहा कि अस्पताल को गर्व है कि वह यह आधुनिक तकनीक बिहार के मरीजों तक लेकर आया है। उन्होंने कहा कि अब एसीएल की उन्नत सर्जरी और पुनर्वास के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। राज्य में ही विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।