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नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग (ईसीआई) के आंतरिक कामकाज को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आयोग ने शनिवार को कहा कि एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी नीतिगत मामले से संबंधित नहीं था। आयोग के मुताबिक, एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूचियों का सत्यापन और उन्हें दुरुस्त करना है तथा जिन पात्र नागरिकों के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर क्या बोला आयोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त एस. एस. संधू तथा विवेक जोशी की मौजूदगी में शनिवार को हुई पूर्ण आयोग की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति में कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई। आयोग ने कहा कि यह पत्र आयोग या उसके सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़े किसी नीतिगत विषय के बारे में नहीं था। इसका संबंध आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से था। आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-पुनर्वितरण आदेश दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि उप निर्वाचन आयुक्त से आईटी विभाग की निगरानी कभी वापस नहीं ली गई थी। एसआईआर पर मतभेद के दावे के बीच आया स्पष्टीकरण यह बयान ऐसे समय आया है जब एक अंग्रेजी दैनिक की रिपोर्ट में SIR को लेकर आयोग के भीतर मतभेद होने का दावा किया गया था। इसके बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। चुनाव आयोग ने इन सवालों के बीच दोहराया कि उसके निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। 24 जून 2025 के एसआईटार आदेश पर भी थी सर्वसम्मति आयोग के मुताबिक, 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर कराने के लिए जारी आदेश को आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। एसआईआर की शुरुआत बिहार से हुई और बाद में इसे पश्चिम बंगाल तथा 30 अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया। आयोग ने यह भी कहा कि 27 अक्टूबर 2025 को 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा 14 मई 2026 को अन्य 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी SIR कार्यक्रमों को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि 27 मई 2026 के आदेश में उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने एसआईआर कराने के आयोग के निर्णय को कानून सम्मत माना था। आयोग के अनुसार, मतदाताओं की अंतिम संख्या तभी सामने आएगी, जब तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन पूरा हो जाएगा। गोवा में छूटे 97 मतदाताओं का मामला, 81 ने भरा फॉर्म-6 गोवा में SIR के दौरान कुछ मतदाताओं के नाम छूटने के मामले पर आयोग ने कहा कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ स्तरीय अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं के घर जाकर फॉर्म लेने के निर्देश दिए थे। आयोग के मुताबिक, ऐसे 97 मतदाताओं में से 81 ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर दिया है। छूट गया नाम तो अब भी कर सकते हैं आवेदन आयोग ने जोर देकर कहा कि SIR का उद्देश्य सटीक मतदाता सूची तैयार करना है। अगर कोई पात्र नागरिक सूची में शामिल होने से रह गया है तो निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है। आयोग की विज्ञप्ति में घर-घर सहायता, ऑनलाइन सुनवाई, कमजोर वर्गों के मतदाताओं के लिए विशेष शिविर और दावे-आपत्तियां दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने जैसे उपायों पर भी जोर दिया गया है। दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों के लिए बढ़ेगा समय पूर्ण आयोग ने शनिवार की बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के अनुरोध पर विचार करते हुए दोनों जगह SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। इसके साथ आयोग ने अपनी डिजिटल प्रणालियों की समीक्षा और आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने की बात कही है। आयोग के अनुसार, उसके आधिकारिक मतदाता सेवा प्लेटफॉर्म के जरिए पात्र नागरिक मतदाता पंजीकरण और चुनाव संबंधी विवरण में संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं।



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