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नई दिल्ली। इस साल जून में सुस्त पड़े मानसून ने जुलाई की शुरुआत में जोरदार वापसी करते हुए देश में बारिश की कमी को 41.4 प्रतिशत से घटाकर 15.2 प्रतिशत तक ला दिया है, हालांकि जहां मध्य और दक्षिण भारत में हालात तेजी से सुधरे हैं, वहीं पूर्वोत्तर अब भी कमजोर बारिश से जूझ रहा है और कई राज्यों में भारी बारिश व बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। जून में चिंता बढ़ाने वाली थी बारिश की कमी मौसम विभाग के अनुसार, 20 जून तक देश में मानसून की चाल बेहद सुस्त थी। इस दौरान सामान्य के मुकाबले 41.4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। जहां 20 जून तक आमतौर पर 92.8 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी, वहां इस बार सिर्फ 54.4 मिलीमीटर बारिश हुई। इस कमी ने खेती, जलस्तर और मौसम के आगे के रुख को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। जुलाई के पहले हफ्ते ने बदली तस्वीर जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने जोर पकड़ा और अच्छी बारिश के दम पर देश की कुल संचयी वर्षा में बड़ा सुधार दर्ज हुआ। 8 जुलाई तक कुल बारिश बढ़कर 195.5 मिलीमीटर पहुंच गई। इसके साथ ही देश में बारिश की कुल कमी घटकर 15.2 प्रतिशत रह गई, जो अब सामान्य औसत के काफी करीब मानी जा रही है। यानी जून की चिंता के बाद जुलाई ने राहत की फुहारें ला दी हैं। मध्य भारत में सबसे बड़ा सुधार पिछले करीब 18 दिनों में सबसे बड़ा बदलाव मध्य भारत में देखने को मिला। जून के महीने में यह इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित था और 20 जून तक यहां 65 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई थी। लेकिन जुलाई के पहले हफ्ते में हुई तेज बारिश ने हालात पूरी तरह बदल दिए। अब यही क्षेत्र सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज कर चुका है। दक्षिण भारत में भी हालात सुधरे दक्षिण भारत के राज्यों में भी बारिश की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। जून के मध्य तक यहां 25 प्रतिशत की कमी थी, जो अब घटकर 14 प्रतिशत रह गई है। यानी यहां भी मानसून ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की है और बारिश की कमी कम हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत में बढ़ी कमी उत्तर-पश्चिम भारत में जून के दौरान स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर थी और यहां केवल 7 प्रतिशत की कमी थी। लेकिन जुलाई की शुरुआत में अन्य क्षेत्रों की तुलना में यहां मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी रही। इसका असर यह हुआ कि अब इस क्षेत्र में बारिश की कमी बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत अब भी परेशानी में देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में अब भी मानसून की बेरुखी बनी हुई है। जून में यहां 44 प्रतिशत की कमी थी और अब मामूली सुधार के बाद भी यह आंकड़ा 39 प्रतिशत की कमी पर बना हुआ है। यानी देश के इस हिस्से को अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार है। अब कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने कहा है कि 9 जुलाई से मानसून की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है , लेकिन अगले दो से तीन दिनों में राजस्थान, हरियाणा, पंजाब के बाकी हिस्सों और उसके बाद पूरे देश में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। इसका मतलब है कि इन इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। बाढ़ और फ्लैश फ्लड का भी खतरा मौसम विभाग ने गुजरात, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, कोंकण और गोवा के निचले इलाकों में बाढ़ की सामान्य आशंका जताई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के शिमला और सिरमौर तथा उत्तराखंड के ज्यादातर पहाड़ी जिलों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का हल्का खतरा भी बताया गया है। मानसून की उत्तरी सीमा यहां तक पहुंची विभाग के मुताबिक, फिलहाल मानसून की उत्तरी सीमा बाड़मेर, जोधपुर, राजगढ़ और भटिंडा से होकर गुजर रही है। इससे साफ है कि मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों को भी कवर कर सकता है।